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SHREEJI DARSHAN & SHRINGAR/विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ-शुक्ल पक्ष-द्वितीया

जय श्री कृष्ण 🙏

व्रज – विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष द्वितीया
Monday, 18 May 2026

श्वेत धोरा का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर श्वेत कुल्हे पर श्वेत मोर चंद्रिका के जोड़ के श्रृंगार

आज के मनोरथ-

राजभोग में रथ बैठे गिरधारी आज माई
शाम को पुष्प वितान

राजभोग दर्शन

कीर्तन – (राग : तोडी)

देख गजबाज़ आज वृजराज बिराजत गोपनके शीरताज ।
देस देस ते खटदरसन आवत मनवा छीत कूल पावत
किरत अपरंपार ऊंचे चढ़े दान जहाज़ ।।१।।
सुरभि तिल पर्वत अर्ब खर्ब कंचन मनी दीने, सो सुत हित के काज ।
हरि नारायण श्यामदास के प्रभु को नाम कर्म करावन,
महेर मुदित मन बंधि है धर्म की पाज ।।२।।

साज – श्रीजी में आज श्वेत मलमल पर रूपहरी ज़री की तुईलैस की किनारी की धोरेवाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी और तकिया के ऊपर सफ़ेद बिछावट की जाती है और चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल जड़ी होती है.

वस्त्र – श्रीजी को आज स्वेत धोरा का पिछोड़ा धराया जाता है.

श्रृंगार – प्रभु को आज वनमाला (चरणारविन्द तक) का भारी श्रृंगार धराया जाता है. मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.

श्रीमस्तक पर रुपहली किनारी से सुसज्जित श्वेत कुल्हे के ऊपर सिरपैंच, तीन मोरपंख की चन्द्रिका की जोड़ एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.

श्रीकर्ण में हीरा के कुंडल धराये जाते हैं. रंग-बिरंगी पुष्पों की दो मालाजी धरायी जाती हैं.कली, कमल आदि सभी माला धरायी जाती है.

श्रीहस्त में एक कमल की कमलछड़ी, चाँदी के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.पट श्वेत गोटी उष्णकाल की आती हैं.

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