जय श्री कृष्ण 🙏
व्रज – अधिक ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष प्रतिपदा
Sunday, 17 May 2026
विशेष – आज से पुरुषोत्तम(अधिक) मास शुरू हो रहा हे जो अधिक ज्येष्ठ के रूप में 17 मई 2026 से 15 जून 2026 तक रहेगा. श्रीजी को पूरे अधिक मास में विविध प्रकार के मनोरथ कर के रिझाया जाएगा.
केसरी मलमल के धोती पटका एवं श्रीमस्तक पर केसरी कूल्हे पर तीन मोर चंद्रिका के जोड़ के श्रृंगार
आज के मनोरथ-
🪷 साहेबान की मंडली
🪷 मोगरा की कली के श्रृंगार
राजभोग दर्शन –
कीर्तन – (राग : सारंग)
भलेई मेरे आये हो पिय
भलेई मेरे आये हो पिय ठीक दुपहरी की बिरियाँ l
शुभदिन शुभ नक्षत्र शुभ महूरत शुभपल छिन शुभ घरियाँ ll 1 ll
भयो है आनंद कंद मिट्यो विरह दुःख द्वंद चंदन घस अंगलेपन और पायन परियां l
‘तानसेन’ के प्रभु मया कीनी मों पर सुखी वेल करी हरियां ll 2 ll
साज – आज श्रीजी में केसरी मलमल की, रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी के हांशिया से सुसज्जित पिछवाई धरायी गया है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की गयी है.
वस्त्र – आज श्रीजी को केसरी मलमल की धोती एवं राजशाही पटका धराया गया है. दोनों वस्त्र रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित हैं.
श्रृंगार – आज प्रभु को मध्य का (घुटने तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया है. मोती के आभरण धराये हैं.
श्रीमस्तक पर केसरी कुल्हे के ऊपर तीन मोरपंख की चंद्रिका की जोड़ धराये हैं.
श्रीकर्ण में कुंडल धराये हैं. कली आदि की माला धराई है. पुष्पों की कलात्मक थागवाली दो मालाजी धरायी हैं.
श्रीहस्त में कमलछड़ी, गंगा जमुनी वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये हैं. पट ऊष्णकाल का व गोटी राग रंग की है.

