जय श्री कृष्ण 🙏
व्रज -अधिक ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष नवमी
Sunday, 24 May 2026
केसरी मलमल का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर केसरी कुल्हे पर तीन मोर चंद्रिका के जोड़ के श्रृंगार
आज के मनोरथ
- राजभोग में नंदमहोत्सव
- शाम को सांझी मनोरथ
राजभोग दर्शन –
साज – (राग : सारंग)
लालन पहिरत है नवचंदन l
विविध सुगंध मिलाय अरगजा व्रजयुवतिन मनफंदन ll 1 ll
शीतल मंद बहत मलयानिल मोहन मन को रंजन l
अंग अंग छबि कहा लों वरनो मनमथ मनके गंजन ll 2 ll
आरत चित विलोकत हरिमुख चपल चलन दृग खंजन l
‘गोविंद’ प्रभुपिय सदा बसो जिय गिरिधर विरह निकंदन ll 3 ll
साज – आज श्रीजी में श्री ठाकुरजी को पलना झुलाते नंद-यशोदा जी, नंदोत्सव एवं छठी पूजन के सुन्दर कलात्मक चित्रांकन की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है.
वस्त्र – आज प्रभु को केसरी मलमल का पिछोड़ा धराया जाता हैं. सभी वस्त्र रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होते हैं.
श्रृंगार – आज प्रभु को वनमाला का (चरणारविन्द तक) ऊष्णकालीन श्रृंगार धराया जाता है.मोती के आभरण धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर केसरी कुल्हे के ऊपर सिरपैंच, तीन मोरपंख की मोर-चंद्रिका की जोड़ एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.
श्रीकर्ण में मकराकृति कुंडल धराये जाते हैं.श्वेत पुष्पों की सुन्दर थागवाली दो कलात्मक वनमाला धरायी जाती हैं.
श्रीहस्त में चार कमल की कमलछड़ी, गंगा जमुनी के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते है.पट व गोटी ऊष्णकाल के धराए जाते है.

