जय श्री कृष्ण 🙏
व्रज -ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष षष्ठी
Saturday, 20 June 2026
बादली मलमल का आड़बंद एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर तुर्रा के श्रृंगार
राजभोग दर्शन –
कीर्तन – (राग : सारंग)
पनिया न जैहोरी आली नंदनंदन मेरी मटुकी झटकिके पटकी l
ठीक दुपहरीमें अटकी कुंजनमें कोऊ न जाने मेरे घटकी ll 1 ll
कहारी करो कछु बस नहि मेरो नागर नटसों अटकी l
‘नंददास’ प्रभुकी छबि निरखत सुधि न रही पनघटकी ll 2 ll
साज – आज श्रीनाथजी में बादली मलमल की पिछवाई धरायी जाती है.
वस्त्र – आज श्रीजी को बादली मलमल का आड़बंद धराया जाता है.
श्रृंगार – आज प्रभु को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन श्रृंगार धराया जाता है. मोती के आभरण धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर बादली छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच, तुर्रा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.श्रीकर्ण में एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं. श्वेत पुष्पों की सुन्दर थागवाली दो कलात्मक मालाजी धरायी जाती हैं.
श्रीहस्त में कमलछड़ी, झीने लहरिया के वेणुजी एवं वेत्रजी धराये जाते हैं.पट ऊष्णकाल व गोटी हकीक के आते है.

