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SHREEJI DARSHAN & SHRINGAR/आषाढ़-कृष्ण पक्ष-अष्टमी

जय श्री कृष्ण 🙏

व्रज – आषाढ़ कृष्ण पक्ष अष्टमी
Wednesday, 08 July 2026

श्वेत मलमल का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर टिपारा के साज के श्रृंगार

ऊष्णकाल का चौथा अभ्यंग स्नान

आज श्रीनाथजी में ऊष्णकाल का चौथा अभ्यंग होगा.

ज्येष्ठ और आषाढ़ मास में श्रीजी में नियम के चार अभ्यंग स्नान और तीन शीतल जल स्नान होते हैं. यह सभी स्नान ऊष्ण से श्रमित प्रभु के सुखार्थ होते हैं.

अभ्यंग स्नान मंगला दर्शन उपरान्त होता है जिसमें प्रभु को चन्दन, आवंला एवं फुलेल (सुगन्धित तेल) से अभ्यंग (स्नान) कराया जाता है.

ऊष्णकाल में जिस दिन अभ्यंग हो उस दिन साज में शीतल भाव के चित्राम की पिछवाई आती है.

अभ्यंग के भाव से आज गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में श्रीनाथजी को सतुवा के लड्डू अरोगाये जाते हैं.

साज – (राग : सारंग)

आवत ही यमुना भर पानी l
श्याम रूप काहुको ढोटा वाकी चितवन मेरी गैल भुलानी ll 1 ll
मोहन कह्यो तुमको या व्रजमें हमे नहीं पहचानी l
ठगी सी रही चेटकसो लाग्यो तब व्याकुल मुख फूरत न बानी ll 2 ll
जा दिनतें चितये री मो तन तादिनतें हरि हाथ बिकानी l
‘नंददास’ प्रभु यों मन मिलियो ज्यों सागरमें सरित समानी ll 3 ll

राजभोग दर्शन –

साज – आज श्रीजी में शीतल भाव के चित्राम की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की गयी है.

वस्त्र – आज श्रीजी को श्वेत मलमल का पिछोड़ा धराया है.

श्रृंगार – आज प्रभु को वनमाला का (चरणारविन्द तक) ऊष्णकालीन श्रृंगार जिसमें हीरा के सर्व आभरण धराये हैं.

श्रीमस्तक पर टिपारा के श्वेत मोर पंख का साज धराया है.श्रीकर्ण में कुंडल धराये हैं.कली आदि की माला धरायी है. पुष्पों की कलात्मक थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी हैं.

श्रीहस्त में कमलछड़ी, चांदी के वेणुजी एवं वेत्रजी धराये जाते हैं.पट ऊष्णकाल का व बड़ी गोटी हकीक की आती है.

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