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SHREEJI DARSHAN & SHRINGAR/अधिक-ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष-अष्टमी (सप्तमी क्षय)

जय श्री कृष्ण 🙏

व्रज – अधिक ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष अष्टमी (सप्तमी क्षय)
Saturday, 23 May 2026

सुवापंखी मलमल का आड़बंद एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर गोल बाँकी चंद्रिका के श्रृंगार

आज के मनोरथ

  • राजभोग में अंगूर की मंडली
  • शाम को कुंजन माँझ बिराजत मोहन

राजभोग दर्शन

कीर्तन – (राग : सारंग)

तनक प्याय दे पानी याहि मिस गए वाके घर l
समझ बूझ के जल भर लाई पीवन लागे ओक ढीली करि
तब ग्वालिन मंद मंद मुसिकानी ll 1 ll
वेही जल वैसे ही गयो ओर जल भर लाई
तब ग्वालिन बोली मधुर सी बानी l
‘चतुरबिहारी’ प्यारे प्यासे हो तो पीजिये
नातर सिधारो रावरे जु प्यास मैं जानी ll 2 ll

साज – आज श्रीजी में श्री गिरिराज जी की कन्दरा में विराजित श्री गुसांईजी के पुत्रों के चित्रांकन वाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को सुवापंखी मलमल का आड़बंद धराया जाता है. आड़बंद रुपहली तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होता है परन्तु किनारी बाहर आंशिक ही दृश्य होती है अर्थात भीतर की ओर मोड़ दी जाती है.

श्रृंगार – आज प्रभु को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.

श्रीमस्तक पर सुवापंखी रंग की गोल पाग के ऊपर सिरपैंच, क़तरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.

श्रीकर्ण में एक जोड़ी मोती के कर्णफूल धराये जाते हैं.श्वेत पुष्पों एवं तुलसी की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं वहीँ दो मालाजी हमेल की भांति भी धरायी जाती है.

श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, झीनें लहरियाँ के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं. पट ऊष्णकाल का गोटी हक़ीक की छोटी आती है.

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