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SHREEJI DARSHAN & SHRINGAR/फाल्गुन-शुक्ल पक्ष-चतुर्थी

जय श्री कृष्ण 🙏

व्रज – फाल्गुन शुक्ल पक्ष चतुर्थी
Saturday, 21 February 2026

मोहन होहो होहो होरी।।
काल्ह हमारे आंगन गारी देआयो सो कोरी।।1।।
अब क्योंदूर बैठे जसोदा ढिंग निकसो कुंज बिहारी।।
उमगउमग आईं गोकुल की वे सब वाई दिन बारी।।2।।
तबही लाल ललकार निकारे रूप सुधाकी प्यासी।।
लपट गई घनश्याम लालसों चमक चमक चपलासी।।3।।
काजर दे भजिभार भरुवाकें हँसहँस ब्रजकीनारी।।
कहें रसखान एक गारीपर सो आदर बलिहार।।4।।

केसरी लट्ठा के घेरदार वागा, श्रीमस्तक पर केसरी गोल पाग पर मोर चंद्रिका के श्रृंगार

कीर्तनों में अष्टपदी गाई जाती है.

राजभोग दर्शन –

कीर्तन खेलो होरी फाग सबे मिल झुमक गावो झुमक गावो ll ध्रु ll
संग सखा खेलन चले वृषभान गोप की पौरी l श्रवन सुनत सब गोपिका गई है कुंवरि पे दोरी ll 1 ll
मोहन राधा कारने गहि लीनो नौसर हार l हार हेत दरसन भयो सब ग्वालन कियो जुहार ll 2 ll
राधा ललितासो कह्यो नेंक हार हाथ ते लेहूं l चंद्रभागा सो यों कह्यो नेंक इनही बैठन देहु ll 3 ll
बहोत भांति बीरा दीये कीनों बहोत सन्मान l राधा मुख निरखत हरि मानो मधुप करत मधुपान ll 4 ll
मोहन कर पिचकाई लीये बंसी लिये व्रजनारी l जीती राधा गोपिका सब ग्वालन मानी हार ll 5 ll
फगुआ को पट खेंचते मुरली आई हाथ l फगुआ दीये ही बने तुम सुनो गोकुल के नाथ ll 6 ll
मधु मंगल तब टेरियो लीनो सुबल बुलाय l मुरली तो हम देयगी प्यारी, राधा को सिर नाय ll 7 ll
ढोल मुरंज डफ बाजही और मुरलीकी घोर l किलकत कौतुहल करे मानो आनंद निर्तत मोर ll 8 ll
राधा मोहन विहरही सुन्दर सुघर स्वरुप l पोहोप वृष्टि सुरपति करें तुम धनि धनि व्रज के भूप ll 9 ll
होरी खेलत रंग रह्यो चले यमुना जल न्हान l सिंधपोरी ठाड़े हरी गोपी वारि वारि दे दान ll 10 ll
नरनारी आनंद भयो तनमन मोद बढाय l श्रीगोकुलनाथ प्रताप तें जन ‘श्यामदास’ बलिजाय ll 11 ll

साज – आज श्रीजी में आज सफ़ेद मलमल की सादी पिछवाई धरायी जाती है जिसके ऊपर गुलाल, चन्दन से खेल किया गया है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को केसरी लट्ठा का सूथन, चोली, घेरदार वागा एवं केसरी कटि-पटका धराये जाते हैं.लाल ठाड़े वस्त्र धराये जाते हैं. सभी वस्त्रों पर अबीर, गुलाल आदि को छांटकर कलात्मक रूप से खेल किया जाता है.

श्रृंगार – आज श्रीजी को छोटा (कमर तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. फाल्गुन के लाल, सफ़ेद मीना के सर्व आभरण धराये जाते हैं.

श्रीमस्तक पर केसरी रंग की गोल-पाग के ऊपर सिरपैंच, मोरपंख की सादी चन्द्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.

श्रीकर्ण में कर्णफूल धराये जाते हैं. पाग एवं कपोल पर अबीर गुलाल से खेल खिलाया जाता है. लाल एवं सफ़ेद पुष्पों की सुन्दर थागवाली दो मालाजी धरायी जाती हैं.

श्रीहस्त में पुष्पछड़ी, फ़ीरोज़ा के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.पट चीड़ का व गोटी फाल्गुन की आती है.

संध्या-आरती दर्शन उपरांत श्रीमस्तक व श्रीकंठ के आभरण बड़े किये जाते हैं. शयन समय श्रीमस्तक पर सुनहरी लूम-तुर्रा धराये जाते हैं.

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