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SHREEJI DARSHAN & SHRINGAR/पौष-कृष्ण पक्ष-त्रयोदशी

जय श्री कृष्ण 🙏

व्रज – पौष कृष्ण पक्ष त्रयोदशी
Wednesday, 17 December 2025

सप्तम(बैंगनी) घटा

विशेष – आज श्रीजी में बैंगनी घटा के दर्शन होंगे. यह घटा नियत है और सामान्यतया आज के दिन ही होती है यद्यपि इसका क्रम निश्चित नहीं और इस वर्ष सातवे क्रम पर ली गयी है.

श्रीजी में शीतकाल में विविध रंगों की घटाओं के दर्शन होते हैं. घटा के दिन सर्व वस्त्र, साज आदि एक ही रंग के होते हैं. आकाश में वर्षाऋतु में विविध रंगों के बादलों के गहराने से जिस प्रकार घटा बनती है उसी भाव से श्रीजी में मार्गशीर्ष व पौष मास में विविध रंगों की द्वादश घटाएँ द्वादश कुंज के भाव से होती हैं.

कई वर्षों पहले चारों यूथाधिपतिओं के भाव से चार घटाएँ होती थी परन्तु गौस्वामी वंश परंपरा के सभी तिलकायतों ने अपने-अपने समय में प्रभु के सुख एवं वैभव वृद्धि हेतु विभिन्न मनोरथ किये.

इसी परंपरा को कायम रखते हुए नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री गोवर्धनलालजी महाराज ने निकुंजनायक प्रभु के सुख और आनंद हेतु सभी द्वादश कुंजों के भाव से आठ घटाएँ बढ़ाकर कुल बारह (द्वादश) घटाएँ (दूज का चंदा सहित) कर दी जो कि आज भी चल रही हैं.

इनमें कुछ घटाएँ (हरी, श्याम, लाल, अमरसी, रुपहली व बैंगनी) नियत दिनों पर एवं अन्य कुछ (गुलाबी, पतंगी, फ़िरोज़ी, पीली और सुनहरी घटा) ऐच्छिक है जो बसंत-पंचमी से पूर्व खाली दिनों में ली जाती हैं.

ये द्वादश कुंज इस प्रकार है –

अरुण कुंज, हरित कुंज, हेम कुंज, पूर्णेन्दु कुंज, श्याम कुंज, कदम्ब कुंज, सिताम्बु कुंज, वसंत कुंज, माधवी कुंज, कमल कुंज, चंपा कुंज और नीलकमल कुंज.

जिस रंग की घटा हो उसी रंग के कुंज की भावना होती है. इसी श्रृंखला में आज श्रीजी में बैंगनी घटा होगी. साज, वस्त्र आदि सभी बैंगनी रंग के होते हैं. सर्व आभरण हीरे के धराये जाते हैं.

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : सारंग)

ए कहूं उमडे घुमडे गाजतहो पिय कहुं बरखत कहुं उघरजात ।
कहुं दमकत चमकत चपला ज्यों एकठोरन ठहरात ।।१।।
स्याम घनके लछन तुमहीपें स्यामघन मेहनेह आडंबर वृथा वहे जात ।
मुरारीदास प्रभु तिहारे वाम चरन पुजीयेजु को किनकी कही न बात को पत्यात ।।२।।

साज – श्रीजी में आज बैंगनी रंग के दरियाई वस्त्र की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर बैंगनी बिछावट की जाती है एवं स्वरुप के सम्मुख लाल रंग की तेह बिछाई जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को बैंगनी रंग के दरियाई वस्त्र का सूथन, चोली, घेरदार वागा एवं मोजाजी धराये जाते हैं. ठाड़े वस्त्र भी बैंगनी रंग के धराये जाते हैं.

श्रृंगार – प्रभु को आज छोटा (कमर तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. हीरा के सर्व आभरण धराये जाते हैं.

श्रीमस्तक पर बैंगनी रंग की गोल पाग के ऊपर सिरपैंच, मोती की लूम तथा चमकनी गोल चंद्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.

श्रीकर्ण में कर्णफूल धराये जाते हैं. श्वेत पुष्पों की रंग-बिरंगी थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं. हीरे की एक माला हमेल की भांति धरायी जाती है.एक हार एवं पचलड़ा धराया जाता हैं.

आज श्रीकंठ में पुरे दिन सफ़ेद मनका की माला धरायी जाती हैं.श्रीहस्त में चाँदी के वेणुजी एवं वेत्रजी धराये जाते हैं.पट बैंगनी एवं गोटी चाँदी आती हैं.

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