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SHREEJI DARSHAN & SHRINGAR/माघ-कृष्ण पक्ष-सप्तमी

जय श्री कृष्ण 🙏

व्रज – माघ कृष्ण पक्ष सप्तमी
Friday, 09 January 2026

दशम (पीली/बसंती) घटा

पीरेही कुंडल नूपुर पीरे पीरो पीतांबरो ओढे ठाडो ।
पीरीही पाग लटक सिर सोहे पीरो छोर रह्यो कटि गाढो ।।१।।
पीरी बनी कटि काछनी लालके पीरो छोर रच्यो पटुकाको ।
गोविन्द प्रभुकी लीला दरसत पीरोही लकुट लिये कर ठाडो ।।२।।

विशेष – आज श्रीजी में शीतकाल की दशम (पीली) घटा है. विगत कल ही श्रीजी ने बसंत के आगम का श्रृंगार धराया है और बसंत ऋतु का आभास हो और हम तत्परता से बसंत का स्वागत करें इस भाव से आज श्रीजी में पीली घटा के दर्शन होंगे.

श्रीजी में शीतकाल में विविध रंगों की घटाओं के दर्शन होते हैं. घटा के दिन सर्व वस्त्र, साज आदि एक ही रंग के होते हैं. आकाश में वर्षाऋतु में विविध रंगों के बादलों के गहराने से जिस प्रकार घटा बनती है उसी भाव से श्रीजी में मार्गशीर्ष व पौष मास में विविध रंगों की द्वादश घटाएँ द्वादश कुंज के भाव से होती हैं.

कई वर्षों पहले चारों यूथाधिपतिओं के भाव से चार घटाएँ होती थी परन्तु गौस्वामी वंश परंपरा के सभी तिलकायतों ने अपने-अपने समय में प्रभु के सुख एवं वैभव वृद्धि हेतु विभिन्न मनोरथ किये.

इसी परंपरा को कायम रखते हुए नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री गोवर्धनलालजी महाराज ने अपने पुत्र श्री दामोदरलालजी की विनती और आग्रह पर निकुंजनायक प्रभु के सुख और आनंद हेतु सभी द्वादश कुंजों के भाव से आठ घटाएँ बढ़ाकर कुल बारह (द्वादश) घटाएँ (दूज का चंदा सहित) कर दी जो कि आज भी चल रही हैं.

इनमें कुछ घटाएँ (हरी, श्याम, लाल, अमरसी, रुपहली व बैंगनी) नियत दिनों पर एवं अन्य कुछ (गुलाबी, पतंगी, फ़िरोज़ी, पीली और सुनहरी घटा) ऐच्छिक है जो बसंत-पंचमी से पूर्व खाली दिनों में ली जाती हैं.

ये द्वादश कुंज इस प्रकार है –

अरुण कुंज, हरित कुंज, हेम कुंज, पूर्णेन्दु कुंज, श्याम कुंज, कदम्ब कुंज, सिताम्बु कुंज, वसंत कुंज, माधवी कुंज, कमल कुंज, चंपा कुंज और नीलकमल कुंज.

जिस रंग की घटा हो उसी रंग के कुंज की भावना होती है. इसी श्रृंखला में आज वसंत कुंज की भावना से श्रीजी में पीली घटा होगी. साज, वस्त्र आदि सभी पीले रंग के होते हैं. सर्व आभरण स्वर्ण के धराये जाते हैं.

शीतकाल में द्वादश घटाएँ होती हैं जिनमें केवल आज की पीली घटा में ही पीला मलमल का कटि-पटका भी धराया जाता है. अन्य किसी घटा में कटि-पटका नहीं धराया जाता.

आज पूरे दिन पिले फूलो की मालाजी आती हैं.

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : जेतश्री/धनाश्री)

देखत व्रजनाथ वदन मदन कोटि वारो l
जलज निकट नयन मीन उपमा बिचारो ll 1 ll
कुंडल ससि सूर उदित अघटनकी घटना l
कुंतल अलिमाल तामें मुरली कल रटना ll 2 ll
जलद खंड सुंदर तन पीत बसन दामिनी l
वनमाला सक्र चाप मोही सब भामिनी ll 3 ll
मुक्तामनि हार-मंडित तारागन पांति l
‘परमानंद स्वामी’ गोपाल सब विचित्र भांति ll 4 ll

साज – श्रीजी में आज पीले रंग के दरियाई वस्त्र की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर पीली बिछावट की जाती है एवं स्वरुप के सम्मुख लाल रंग की तेह बिछाई जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को पीले रंग के दरियाई वस्त्र का सूथन, चोली, घेरदार वागा एवं मोजाजी धराये जाते हैं. पीले मलमल का कटि-पटका भी धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र भी पीले रंग के धराये जाते हैं.

श्रृंगार – प्रभु को आज छोटा (कमर तक) चार माला का हल्का श्रृंगार धराया जाता है. सर्व आभरण स्वर्ण के धराये जाते हैं.

श्रीमस्तक पर पीले रंग की गोल-पाग के ऊपर सिरपैंच, पीले रेशम के दोहरा कतरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. अलख धराये जाते हैं.

श्रीकर्ण में सोना के दो कर्णफूल धराये जाते हैं. पीले पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.
श्रीहस्त में स्वर्ण के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं. आरसी सोने की, पट पीला व गोटी छोटी सोने की आती है

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