जय श्री कृष्ण 🙏
व्रज – माघ कृष्ण पक्ष तृतीया
Tuesday, 06 January 2026
गुलाबी साटन के घेरदार वागा एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर चंद्रिका के श्रृंगार
आज विशेष रूप से प्रभु की पीठिका पर अमरसी साटन की दग्गल किनारी के रूप में धरायी जाती है.
वर्ष में ये एक ही बार धरायी जाती है.
राजभोग दर्शन –
कीर्तन – (राग : आसावरी)
जाको मन लाग्यो गोपाल सों ताहि ओर कैसें भावे हो ।
लेकर मीन दूधमे राखो जल बिन सचु नहीं पावे हो ।।१।।
ज्यो सुरा रण घूमि चलत है पीर न काहू जनावे हो ।
ज्यो गूंगो गुर खाय रहत है सुख स्वाद नहि बतावे हो ।।२।।
जैसे सरिता मिली सिंधुमे ऊलट प्रवाह न आवे हो ।
तैसे सूर कमलमुख निरखत चित्त ईत ऊत न डुलावे हो ।।३।।
साज – आज श्रीजी में शीतकाल की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है.
वस्त्र – आज श्रीजी को गुलाबी साटन का तुईलैस की किनारी से सुसज्जित सूथन, चोली, घेरदार वागा धराये जाते हैं.
गुलाबी मोजाजी धराये जाते हैं. ठाड़े वस्त्र हरे रंग के धराये जाते हैं.पीठिका पर अमरसी साटन की दग्गल किनारी के रूप में धरायी जाती है.
श्रृंगार – आज प्रभु को छोटा (कमर तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. हरे मीना के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर गुलाबी गोल पाग के ऊपर सिरपैंच, चंद्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.
श्रीकर्ण में एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं.पुष्पों की सुन्दर मालाजी धरायी जाती है.
श्रीहस्त में फिरोजी मीना के वेणुजी एवं वेत्रजी धराये जाते हैं.पट गुलाबी एवं गोटी चांदी की आती हैं.
संध्या-आरती दर्शन के उपरांत श्रीकंठ के श्रृंगार बड़े कर छेड़ान के (छोटे) श्रृंगार धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर लूम-तुर्रा रूपहरी धराये जाते हैं.

