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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/आषाढ़-शुक्ल पक्ष-सप्तमी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 03:52:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज &#8211; आषाढ़ शुक्ल पक्ष सप्तमी Monday, 20 July 2026 आज कछु कुंजनमें बरबासी । दलबादरमें देख सखीरी चमकत है चपलासी ।।१।। न्हेनी न्हेनी बूदंन बरखन लागी पवन चलत सुखरासी । मंद मंद गरजन सुनियत है नाचत मोर कलासी ।।२।। अधरंग (गहरे पतंगी) मलमल के धोती पटका एवं श्रीमस्तक पर गोल &#8230;<p class="read-more"> <a class="" href="https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-20-jul-2026/"> <span class="screen-reader-text">SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/आषाढ़-शुक्ल पक्ष-सप्तमी</span> Read More &#187;</a></p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज &#8211; आषाढ़ शुक्ल पक्ष सप्तमी<br />
Monday, 20 July 2026</h6>
<p>आज कछु कुंजनमें बरबासी ।<br />
दलबादरमें देख सखीरी चमकत है चपलासी ।।१।।<br />
न्हेनी न्हेनी बूदंन बरखन लागी पवन चलत सुखरासी ।<br />
मंद मंद गरजन सुनियत है नाचत मोर कलासी ।।२।।</p>
<p style="text-align: center;"><strong>अधरंग (गहरे पतंगी) मलमल के धोती पटका एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर चमकनी गोल चंद्रिका के श्रृंगार</strong></p>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong><br />
कीर्तन – (राग : मल्हार)</p>
<p>कुंवर चलोजु आगे गहवरमें जहाँ बोलत मधुरे मोर l<br />
विकसत वनराजी कोकिला करत रोर ।।१।।<br />
मधुरे वचन सुनत प्रीतम के लीनो प्यारी चितचोर l<br />
‘गोविंद’ बलबल पिय प्यारी की जोर ।।२।।</p>
<p><strong>साज –</strong> आज श्रीजी में श्री गिरिराजजी की कन्दरा में निकुंजलीला के सुन्दर चित्रांकन से सुशोभित पिछवाई धरायी जाती है जिसमें श्री स्वामिनीजी, श्री यमुनाजी एवं श्री गोपीजन श्रीप्रभु की सेवा में रत है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी के ऊपर सफ़ेद बिछावट की जाती है.</p>
<p><strong>वस्त्र &#8211;</strong> श्रीजी को अधरंग (गहरे पतंगी) मलमल के धोती पटका धरायी जाती है.</p>
<p><strong>श्रृंगार &#8211;</strong> प्रभु को आज छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है.हीरा के सर्व आभरण, श्रीमस्तक पर अधरंग (गहरे पतंगी) रंग की गोल पाग के ऊपर सिरपैंच, लूम तथा चमकनी गोल चंद्रिका और बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है.</p>
<p>श्रीकर्ण में हीरा के कर्णफूल की एक जोड़ी धराये जाते हैं.पीले पुष्पों की रंगीन थाग वाली दो कलात्मक सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं. इसी प्रकार दो मालाजी हमेल की भांति धरायी जाती है.</p>
<p>श्रीहस्त में कमलछड़ी, चाँदी के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.पट ऊष्णकाल का एवं गोटी हक़ीक की आती है.</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/षाढ़-शुक्ल पक्ष-पंचमी (चतुर्थी क्षय)</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-18-jul-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 03:53:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 &#160; व्रज –षाढ़ शुक्ल पक्ष पंचमी (चतुर्थी क्षय) Saturday, 18 July 2026 केसरी मलमल का आसमानी हाशिये का आड़बंद एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर गोल चंद्रिका के श्रृंगार राजभोग दर्शन कीर्तन – (राग : मल्हार) हों इन मोरनकी बलिहारी l जिनकी सुभग चंद्रिका माथे धरत गोवर्धनधारी ll 1 ll बलिहारी &#8230;<p class="read-more"> <a class="" href="https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-18-jul-2026/"> <span class="screen-reader-text">SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/षाढ़-शुक्ल पक्ष-पंचमी (चतुर्थी क्षय)</span> Read More &#187;</a></p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<p>&nbsp;</p>
<h6>व्रज –षाढ़ शुक्ल पक्ष पंचमी (चतुर्थी क्षय)<br />
Saturday, 18 July 2026</h6>
<p style="text-align: center;"><strong>केसरी मलमल का आसमानी हाशिये का आड़बंद एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर गोल चंद्रिका के श्रृंगार</strong></p>
<p><strong>राजभोग दर्शन</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : मल्हार)</p>
<p>हों इन मोरनकी बलिहारी l<br />
जिनकी सुभग चंद्रिका माथे धरत गोवर्धनधारी ll 1 ll<br />
बलिहारी या वंश कुल सजनी बंसी सी सुकुमारी l<br />
सुन्दर कर सोहे मोहन के नेक हू होत न न्यारी ll 2 ll<br />
बलिहारी गुंजाकी जात पर महाभाग्य की सारी l<br />
सदा हृदय रहत श्याम के छिन हू टरत न टारी ll 3 ll<br />
बलिहारी ब्रजभूमि मनोहर कुंजन की अनुहारी l<br />
‘सूरदास’ प्रभु नंगे पायन अनुदिन गैया चारी ll 4 ll</p>
<p><strong>साज –</strong> आज श्रीजी में पीले मलमल की आसमानी हाशिये की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की गयी है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> आज श्रीजी को केसरी मलमल का आसमानी हाशिये का आड़बंद धराया जाता है.</p>
<p><strong>श्रृंगार –</strong> आज प्रभु को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है.<br />
मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.<br />
श्रीमस्तक पर केसरी रंग की गोल पाग के ऊपर सिरपैंच, गोल चंद्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.<br />
श्रीकर्ण में एक जोड़ी मोती के कर्णफूल धराये जाते हैं.<br />
श्वेत पुष्पों एवं तुलसी की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं वहीँ दो मालाजी हमेल की भांति भी धरायी जाती है.<br />
श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, सुवा वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं. पट ऊष्णकाल का गोटी हक़ीक की छोटी आती है.</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/आषाढ़-शुक्ल पक्ष-तृतीया</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-17-jul-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 03:44:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज &#8211; आषाढ़ शुक्ल पक्ष तृतीया Friday, 17 July 2026 छैल जो छबीला, सब रंग में रंगीला बड़ा चित्त का अड़ीला, कहूं देवतों से न्यारा है। माल गले सोहै, नाक-मोती सेत जो है कान, कुण्डल मन मोहै, लाल मुकुट सिर धारा है। दुष्टजन मारे, सब संत जो उबारे ताज, चित्त में &#8230;<p class="read-more"> <a class="" href="https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-17-jul-2026/"> <span class="screen-reader-text">SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/आषाढ़-शुक्ल पक्ष-तृतीया</span> Read More &#187;</a></p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज &#8211; आषाढ़ शुक्ल पक्ष तृतीया<br />
Friday, 17 July 2026</h6>
<p>छैल जो छबीला, सब रंग में रंगीला<br />
बड़ा चित्त का अड़ीला, कहूं देवतों से न्यारा है।<br />
माल गले सोहै, नाक-मोती सेत जो है कान,<br />
कुण्डल मन मोहै, लाल मुकुट सिर धारा है।<br />
दुष्टजन मारे, सब संत जो उबारे ताज,<br />
चित्त में निहारे प्रन, प्रीति करन वारा है।<br />
नन्दजू का प्यारा, जिन कंस को पछारा,<br />
वह वृन्दावन वारा, कृष्ण साहेब हमारा है।।</p>
<p style="text-align: center;"><strong>नियम का ताज़बीबी के अन्नय भाव के सूथन, फेंटा और पटका के श्रृंगार</strong></p>
<p>उत्थापन दर्शन पश्चात नियम का मोगरे की कली का पहला श्रृंगार कली के श्रृंगार पर विशिष्ट पोस्ट आज दोपहर में</p>
<p>आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष में कुछ नियम के श्रृंगार धराये जाते हैं जो वैशाख मास के शुक्ल पक्ष में भी धराये जाते हैं.इसमें विशेष यह है कि ये वस्त्र श्रृंगार वैशाख मास में जिस क्रम से आवें उसके ठीक उलट क्रम से आषाढ़ मास में धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीजी ने अपने सभी भक्तों को आश्रय दिया है, मान दिया है चाहे वो किसी भी धर्म संप्रदाय से हो.</p>
<p>इसी भाव से आज ठाकुरजी अपनी अनन्य मुस्लिम भक्त ताज़बीबी की भावना से सूथन-पटका का श्रृंगार धराते हैं. यह श्रृंगार ताज़बीबी की विनती पर सर्वप्रथम भक्तकामना पूरक श्री गुसांईजी ने धराया था.</p>
<p>ताज़बीबी की ओर से यह श्रृंगार वर्ष में कम से कम छह बार धराया जाता है यद्यपि इस श्रृंगार को धराने के दिन निश्चित नहीं हैं.</p>
<p>ताज़बीबी बादशाह अकबर की बेग़म, प्रभु की भक्त और श्री गुसांईजी की परम-भगवदीय सेवक थी. उन्होंने कई कीर्तनों की रचना भी की है और उनके सेव्य स्वरुप श्री ललितत्रिभंगी जी वर्तमान में गुजरात के पोरबंदर में श्री रणछोड़जी की हवेली में विराजित हैं.</p>
<p>आज श्रीजी को सूथन, फेंटा और पटका का श्रृंगार धराया जाता है. यद्यपि आज का दिन इस श्रृंगार के लिए नियत नहीं परन्तु सामान्यतया आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष के मध्य में धराया अवश्य जाता है.</p>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : मल्हार)</p>
<p>ओढे लाल उपरैनी झिनी ।<br />
तन सुख सेत सुदेश अशं पर बहुत अगरज भीनी ।।१।।<br />
अति सुगंध सीतल ऊर चंदन आदि ये रचना कीनी ।<br />
हरी धरी भु पर पाग दुपेचीं कोटि मदन छबी छीनी ।।२।।<br />
सूथन बनी हिरमिचीं शोभित गति गयंदकी<br />
लीनी ।<br />
परमानंद प्रभु चतुर शिरोमनि व्रजवनिता प्रेम रति दीनी ।।३।।</p>
<p><strong>साज –</strong> आज श्रीजी में गुलाबी धोरा की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> आज श्रीजी को गुलाबी धोरा के रंग की मलमल का धोरे (थोड़े-थोड़े अंतर से किनारी के धोरे) वाला सूथन और राजशाही पटका धराया जाता है. दोनों वस्त्र रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित हैं. ठाड़े वस्त्र गुलाबी रंग के धराये जाते हैं.</p>
<p><strong>श्रृंगार –</strong> प्रभु को आज मध्य (घुटने तक) का उष्णकालीन छेड़ान का श्रृंगार धराया जाता है.मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीमस्तक पर गुलाबी धोरा के रंग के फेंटा के ऊपर सिरपैंच, चंद्रिका, कतरा तथा बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है.<br />
श्रीकर्ण में लोलकबिन्दी (लड़ वाले कर्णफूल) धराये जाते हैं.श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर कलात्मक मालाजी धरायी जाती हैं.<br />
श्रीहस्त में कमलछड़ी, गंगा जमुनी के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.पट उष्णकाल का व गोटी बाघ-बकरी की आती है.</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/आषाढ़-शुक्ल पक्ष-प्रतिपदा</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-15-jul-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 Jul 2026 00:17:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज – आषाढ़ शुक्ल पक्ष प्रतिपदा Wednesday, 15 July 2026 रथयात्रा मनोरथात्मकरथे रथात्मात्मन् हरे मम l श्रीकृष्णस्योपवेशार्थमधिवासं कुरु प्रभो ll भावार्थ &#8211; हे प्रभु, मेरे मनोरथात्मक हृदयरुपी रथ में प्रभु श्रीकृष्ण के बिराजवे की योग्यता करने के लिये अधिवास करें अथवा मेरे इस हृदयरुपी रथ में हे हरि (सर्वदुःख हर्ता) अधिवास &#8230;<p class="read-more"> <a class="" href="https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-15-jul-2026/"> <span class="screen-reader-text">SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/आषाढ़-शुक्ल पक्ष-प्रतिपदा</span> Read More &#187;</a></p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज – आषाढ़ शुक्ल पक्ष प्रतिपदा<br />
Wednesday, 15 July 2026</h6>
<h4 style="text-align: center;">रथयात्रा</h4>
<p><strong>मनोरथात्मकरथे रथात्मात्मन् हरे मम l</strong><br />
<strong>श्रीकृष्णस्योपवेशार्थमधिवासं कुरु प्रभो ll</strong></p>
<p>भावार्थ &#8211; हे प्रभु, मेरे मनोरथात्मक हृदयरुपी रथ में प्रभु श्रीकृष्ण के बिराजवे की योग्यता करने के लिये अधिवास करें<br />
अथवा मेरे इस हृदयरुपी रथ में हे हरि (सर्वदुःख हर्ता) अधिवास (अधिकवास) करें.</p>
<p>हे कृष्ण, आपके लिये ही मनोरथात्मक रथ की भावना की है अतः आप इस रथ में बिराजकर मेरे भी मनोरथ पूर्ण करें जिस प्रकार आपने गोपीजनों के मनोरथ पूर्ण किये हैं.</p>
<p>हे प्रभु, आप बलरामजी एवं सुभद्रा बहन सहित मेरे हृदयरुपी रथ में आरूढ़ होकर मुझे भक्तिदान द्वारा इस संसार-सागर से उबारें अथवा भक्तिदान द्वारा संसार-सागर से मेरी रक्षा करें.</p>
<p>सभी वैष्णवों को भक्त मनोरथ पूरक प्रभु के रथ में बिराजने की बधाई</p>
<p>आज से सेवाक्रम में कई परिवर्तन होंगे.<br />
शीतल जल के फव्वारे, खस के पर्दे, खस के पंखा, जल का छिड़काव, प्रभु के सम्मुख जल में रजत खिलौनों का थाल, मणिकोठा में पुष्पों पत्तियों से सुसज्जित फुलवारी आदि ऊष्णकाल के धोतक साज आज से पूर्ण हो जायेंगे.</p>
<p>आज ही मध्याह्न समय श्री महाप्रभुजी ने गंगाजी की मध्यधारा में सदेह प्रवेश कर आसुरव्यामोह लीला कर नित्यलीला में प्रवेश किया था, जिसके स्मरण में आज के दिन श्रीजी को श्वेत वस्त्र धराये जाते हैं.पर्वरुपी उत्सव के कारण कुल्हे जोड़ का श्रृंगार धराया जाता है.</p>
<p>आज से श्रीजी को पुनः ठाड़े वस्त्र धरने प्रारंभ हो जायेंगे यद्यपि आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) तक कुछ मुख्य दिनों को ही ठाड़े वस्त्र धराये जायेंगे. तदुपरांत प्रतिदिन प्रभु को ठाडे वस्त्र धराये जायेंगे.</p>
<p>आज से आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा तक प्रतिदिन राजभोग दर्शन में प्रभु के सम्मुख चांदी का रथ रखा जाता है.</p>
<p><strong>भोग विशेष &#8211;</strong> श्रीजी को आज गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में कूर (कसार) के गुंजा और दूधघर में सिद्ध की गयी केसर युक्त बासोंदी की हांडी अरोगायी जाती है.</p>
<p>श्रीजी को उत्सव भोग भी गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में ही धरे जाते हैं.उत्सव भोग में विशेष रूप से आम, जामुन, अंकूरी (अंकुरित मूंग) के बड़े थाल, शीतल के दो हांडा, खरबूजा के बीज-चिरोंजी के लड्डू, खस्ता शक्करपारा, छुट्टी बूंदी, दूधघर में सिद्ध मावे के पेड़ा-बरफी, दूधपूड़ी, बासोंदी, जीरा मिश्रित दही, केसरी-सफेद मावे की गुंजिया, तले हुए बीज-चालनी के सूखे मेवा, विविध प्रकार के संदाना (आचार) के बटेरा, विविध प्रकार के फलफूल आदि अरोगाये जाते हैं.</p>
<p>राजभोग में अनसखड़ी में दाख (किशमिश) का रायता, सखड़ी में घोला हुआ सतुवा, मीठी सेव, श्रीखण्ड-भात, दहीभात और केसरी पेठा अरोगाया जाता है.</p>
<p>आज प्रभु को उष्णकाल की विशिष्ट सामग्री ‘सतुवा’ अंतिम बार अरोगाये जाते हैं. मैं पूर्व में भी बता चुका हूँ कि मेष संक्रांति (14 अप्रैल) से रथयात्रा तक श्रीजी में मगद (बेसन के लड्डू) के स्थान पर सतुवा अरोगाये जाते हैं.</p>
<p>यह सामग्री अनसखड़ी में लड्डू के रूप में व सखड़ी में घोले हुए सतुवा के रूप में अरोगायी जाती है और उष्णकाल में विशिष्ट लाभप्रद होती है.कल से प्रभु को मगद के लड्डू पुनः अरोगाये जाने आरंभ हो जायेंगे.</p>
<p><strong>राजभोग दर्शन</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : मल्हार)</p>
<p>गोवर्धन पर्वत के ऊपर परम मुदित बोलत हे मोर l<br />
अति आवेश होत सबही के मन, ठायं ठायं नाचत मोर,<br />
ध्वनि सुन मुरली की मंदस्वर कलघोर ll 1 ll<br />
श्रीअंग जलद घटा सुहाई वासन दामिनी<br />
इन्द्रवधु वनमाल मोतिनहार झलक डोर l<br />
‘कुंभनदास’ प्रभु प्रेम नीर बरखत नित निरंतर अंतर<br />
गिरिवरधरनलाल नवल नंदकिशोर ll 2 ll</p>
<p><strong>साज &#8211;</strong> श्रीजी में आज सफेद मलमल की सुनहरी ज़री की तुईलैस के ‘धोरे-वाली’ वाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया और चरणचौकी के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है.</p>
<p><strong>वस्त्र &#8211;</strong> श्रीजी को आज श्वेत डोरिया के वस्त्र पर सुनहरी ज़री के धोरा वाला पिछोड़ा धराया जाता है. केसरी डोरिया के ठाड़े वस्त्र धराये जाते हैं.</p>
<p><strong>श्रृंगार –</strong> श्री ठाकुरजी को आज वनमाला (चरणारविन्द) से दो अंगुल ऊंचा ऊष्णकालीन भारी श्रृंगार धराया जाता है.सर्व आभरण हीरा के मिलमा धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीमस्तक पर श्वेत कुल्हे के ऊपर सिरपैंच, पांच मोरपंख की चन्द्रिका की जोड़ एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में मकराकृति कुंडल धराये जाते हैं.आज हांस, चोटी, पायल आदि नहीं धराये जाते. श्रीकंठ में कली, वल्लभी आदि सभी माला, नीचे पदक, ऊपर माला, हार आदि सब धराये जाते हैं. सफेद एवं पीले पुष्पों की कलात्मक दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.पीठिका के ऊपर मोती का चौखटा धराया जाता है.</p>
<p>श्रीहस्त में कमलछड़ी, हीरा के वेणुजी तथा दो वेत्रजी (हीरा व मोती के) धराये जाते हैं.पट उष्णकाल का व गोटी मोती की आती है. श्रीजी के सम्मुख चांदी का रथ रखा जाता है.</p>
<p>आज भोग-आरती में प्रभु को छुंकमां अंकूरी (अंकुरित मूंग) अरोगायी जाती है.मैं पूर्व में भी बता चुका हूँ कि अक्षय तृतीया से रथयात्रा तक प्रतिदिन संध्या-आरती में प्रभु को बारी-बारी से जल में भीगी चने की दाल (अजवायन युक्त), भीगी मूँग दाल व तीसरे दिन अंकुरित मूँग (अंकूरी) अरोगाये जाते हैं.</p>
<p>आज से जन्माष्टमी तक इस क्रम में कुछ परिवर्तन होगा. आज से श्रीजी को यही सामग्री तीन दिन छुकमां व अगले तीन दिन कच्ची अरोगायी जाएगी.</p>
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/आषाढ़-कृष्ण पक्ष-अमावस्या</title>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Jul 2026 01:56:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज – आषाढ़ कृष्ण पक्ष अमावस्या Tuesday, 14 July 2026 नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री बड़े गिरधारीजी महाराज (१८२५) का उत्सव विशेष &#8211; आज नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री बड़े गिरधारीजी महाराज (१८२५) का उत्सव है. आपने अपने जीवनकाल में नाथद्वारा में श्रीजी के सुख हेतु एवं जनसुखार्थ गिरधर सागर आदि कई स्थानों &#8230;<p class="read-more"> <a class="" href="https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-14-jul-2026/"> <span class="screen-reader-text">SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/आषाढ़-कृष्ण पक्ष-अमावस्या</span> Read More &#187;</a></p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज – आषाढ़ कृष्ण पक्ष अमावस्या<br />
Tuesday, 14 July 2026</h6>
<p style="text-align: center;"><strong>नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री बड़े गिरधारीजी महाराज (१८२५) का उत्सव</strong></p>
<p><strong>विशेष &#8211;</strong> आज नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री बड़े गिरधारीजी महाराज (१८२५) का उत्सव है.</p>
<p>आपने अपने जीवनकाल में नाथद्वारा में श्रीजी के सुख हेतु एवं जनसुखार्थ गिरधर सागर आदि कई स्थानों का निर्माण करवाया.</p>
<p>आपके समय में नाथद्वारा के ऊपर मराठाओं आदि के आक्रमण के कारण आपने घसियार में श्रीजी का नूतन मंदिर सिद्ध करवा कर विक्रम संवत १८५८ में श्रीजी, श्री नवनीतप्रियाजी एवं श्री विट्ठलनाथजी को पधराये.</p>
<p>आप वहां अत्यधिक उल्लास व उत्साह से श्रीजी को सेवा, मनोरथ आदि करते थे. आपने घसियार में ही लीलाप्रवेश किया था.</p>
<p>आपके पुत्र श्री दामोदरजी ने श्रीजी को घसियार से विक्रम संवत १८६४ की फाल्गुन कृष्ण सप्तमी को पुनः वर्तमान खर्चभंडार के स्थान पर पाट पर पधराये.</p>
<p>सेवाक्रम &#8211; उत्सव होने के कारण श्रीजी मंदिर के सभी मुख्य द्वारों की देहरी (देहलीज) को हल्दी से लीपी जाती हैं एवं आशापाल की सूत की डोरी की वंदनमाल बाँधी जाती हैं.</p>
<p>झारीजी में सभी समय यमुनाजल भरा जाता है. दो समय की आरती थाली में की जाती है.</p>
<p>आज के उत्सव नायक का जीवन अत्यंत सादगी पूर्ण होने से प्रभु को भी सादा वस्त्र, अधरंग (गहरे पतंगी) मलमल का आड़बन्द एवं गोल-पाग के श्रृंगार ही धराये जाते हैं.</p>
<p>गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में आज श्रीजी को केशरयुक्त जलेबी के टूक व दूधघर में सिद्ध की गयी केसरयुक्त बासोंदी की हांडी अरोगायी जाती है.</p>
<p>राजभोग में अनसखड़ी में दाख (किशमिश) का रायता व सखड़ी के मीठा में बूंदी प्रकार अरोगाये जाते हैं.</p>
<p>भोग समय फीका के स्थान पर बीज-चालनी का घी में तला सूखा मेवा आरोगाया जाता है.संध्या-आरती के ठोड़ के वारा में बूंदी के गोद के बड़े लड्डू अरोगाये जाते हैं.</p>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन (राग : सारंग)</p>
<p>बधाई &#8211; श्री वल्लभ नन्दन रूप अनूप</p>
<p>ठीक दुपहरीकी तपनमें भलेई आये मेरे गेह l<br />
भवन बिराजे बिंजना ढुराऊँ श्रम झलकत सब देह ll 1 ll<br />
श्रमको निवारिये अरगजा धारिये जियतें टारिये और संदेह ll 2 ll<br />
चतुर शिरोमनि याही तें कहियत ‘सूर’ सुफल करो नेह ll 3 ll</p>
<p><strong>साज &#8211;</strong> आज श्रीजी में अधरंग (गहरे पतंगी) रंग के मलमल की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया और चरणचौकी के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है.</p>
<p><strong>वस्त्र &#8211;</strong> श्रीजी को अधरंग (गहरे पतंगी) रंग की मलमल का बिना किनारी का आड़बंद धराया जाता है.</p>
<p><strong>श्रृंगार &#8211;</strong> प्रभु को आज छोटा (कमर तक) उष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है.आभरण हीरा के व उत्सव के, श्रीमस्तक पर अधरंग रंग की गोल-पाग के ऊपर रुपहली लूम की किलंगी और बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है. श्रीकर्ण में कर्णफूल धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीकंठ में त्रवल के स्थान पर कुल्हे की कंठी धरायी जाती है.पीले एवं श्वेत पुष्पों की दो मालाजी धरायी जाती हैं वहीँ श्वेत पुष्पों की दो मालाजी हमेल की भांति भी धरायी जाती है.</p>
<p>श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, सूवा वाले वेणुजी तथा एक वेत्रजी धराये जाते हैं.पट ऊष्णकाल का व गोटी बड़ी हकीक की आती है</p>
<p>सभी वैष्णवों को नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री बड़े गिरधारीजी महाराज (१८२५) के उत्सव की बधाई</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/आषाढ़-कृष्ण पक्ष-चतुर्दशी</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-13-jul-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 13 Jul 2026 02:01:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज –आषाढ़ कृष्ण पक्ष चतुर्दशी Monday, 13 July 2026 गुलाबी मलमल की परधनी एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर तुर्रा के श्रृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : सारंग) भलेई मेरे आये हो पिय भलेई मेरे आये हो पिय ठीक दुपहरी की बिरियाँ l शुभदिन शुभ नक्षत्र शुभ महूरत शुभपल &#8230;<p class="read-more"> <a class="" href="https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-13-jul-2026/"> <span class="screen-reader-text">SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/आषाढ़-कृष्ण पक्ष-चतुर्दशी</span> Read More &#187;</a></p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज –आषाढ़ कृष्ण पक्ष चतुर्दशी<br />
Monday, 13 July 2026</h6>
<p style="text-align: center;"><strong>गुलाबी मलमल की परधनी एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर तुर्रा के श्रृंगार</strong></p>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : सारंग)</p>
<p>भलेई मेरे आये हो पिय<br />
भलेई मेरे आये हो पिय ठीक दुपहरी की बिरियाँ l<br />
शुभदिन शुभ नक्षत्र शुभ महूरत शुभपल छिन शुभ घरियाँ ll 1 ll<br />
भयो है आनंद कंद मिट्यो विरह दुःख द्वंद चंदन घस अंगलेपन और पायन परियां l<br />
&#8216;तानसेन&#8217; के प्रभु मया कीनी मों पर सुखी वेल करी हरियां ll 2 ll</p>
<p>साज &#8211; श्रीजी में आज गुलाबी मलमल की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया और चरणचौकी के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> आज श्रीजी को गुलाबी रंग की मलमल की गोल छोर वाली रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित परधनी धरायी जाती है.</p>
<p><strong>शृंगार –</strong> आज प्रभु को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीमस्तक पर गुलाबी रंग की गोल पाग के ऊपर सिरपैंच, तुर्रा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीकर्ण में मोती के एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं.श्रीकंठ में मोती का चोलड़ा धराया जाता हैं.श्वेत पुष्पों की कलात्मक थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.</p>
<p>श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, चाँदी के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.पट ऊष्णकाल का व गोटी छोटी हकीक की आती है.</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/आषाढ़-कृष्ण पक्ष-त्रयोदशी</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-12-jul-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Jul 2026 02:02:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://shridp.in/?p=6544</guid>

					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज –आषाढ़ कृष्ण पक्ष त्रयोदशी Sunday, 12 July 2026 शरबती मलमल का आड़बंद एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर गोल चंद्रिका के श्रृंगार राजभोग दर्शन कीर्तन – (राग : सारंग) तनक प्याय दे पानी याहि मिस गए वाके घर l समझ बूझ के जल भर लाई पीवन लागे ओक ढीली करि &#8230;<p class="read-more"> <a class="" href="https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-12-jul-2026/"> <span class="screen-reader-text">SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/आषाढ़-कृष्ण पक्ष-त्रयोदशी</span> Read More &#187;</a></p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज –आषाढ़ कृष्ण पक्ष त्रयोदशी<br />
Sunday, 12 July 2026</h6>
<p style="text-align: center;"><strong>शरबती मलमल का आड़बंद एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर गोल चंद्रिका के श्रृंगार</strong></p>
<p><strong>राजभोग दर्शन</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : सारंग)</p>
<p>तनक प्याय दे पानी याहि मिस गए वाके घर l<br />
समझ बूझ के जल भर लाई पीवन लागे ओक ढीली करि<br />
तब ग्वालिन मंद मंद मुसिकानी ll 1 ll<br />
वेही जल वैसे ही गयो ओर जल भर लाई<br />
तब ग्वालिन बोली मधुर सी बानी l<br />
‘चतुरबिहारी’ प्यारे प्यासे हो तो पीजिये<br />
नातर सिधारो रावरे जु प्यास मैं जानी ll 2 ll</p>
<p><strong>साज –</strong> आज श्रीजी में शरबती रंग की मलमल की रुपहली तुईलैस की किनारी के हांशिया से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> आज श्रीजी को शरबती मलमल का रूपहली ज़री की किनारी से सुसज्जित आड़बंद धराया जाता है.</p>
<p><strong>श्रृंगार –</strong> आज प्रभु को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है.मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीमस्तक पर शरबती रंग की गोल पाग के ऊपर सिरपैंच, लूम, गोल चंद्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीकर्ण में मोती के एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं.श्वेत पुष्पों की कलात्मक थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.</p>
<p>श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, सुवा के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.पट ऊष्णकाल का व गोटी हक़ीक की छोटी आती है.</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/आषाढ़-कृष्ण पक्ष-द्वादशी (एकादशी क्षय)</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-11-jul-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Jul 2026 01:04:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://shridp.in/?p=6541</guid>

					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज – आषाढ़ कृष्ण पक्ष द्वादशी (एकादशी क्षय) Saturday, 11 July 2026 योगिनी एकादशी व्रत केसरी मलमल का पिछोड़ा और दुमाला पर मोती के सेहरा के श्रृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन (राग : सारंग) आज बने गिरिधारी दुल्हे चंदनको तनलेप कीये l सकल श्रृंगार बने मोतिन के विविध कुसुम की माल &#8230;<p class="read-more"> <a class="" href="https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-11-jul-2026/"> <span class="screen-reader-text">SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/आषाढ़-कृष्ण पक्ष-द्वादशी (एकादशी क्षय)</span> Read More &#187;</a></p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज – आषाढ़ कृष्ण पक्ष द्वादशी (एकादशी क्षय)<br />
Saturday, 11 July 2026</h6>
<p style="text-align: center;"><strong>योगिनी एकादशी व्रत</strong></p>
<p><strong>केसरी मलमल का पिछोड़ा और दुमाला पर मोती के सेहरा के श्रृंगार</strong></p>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन (राग : सारंग)</p>
<p>आज बने गिरिधारी दुल्हे चंदनको तनलेप कीये l<br />
सकल श्रृंगार बने मोतिन के विविध कुसुम की माल हिये ll 1 ll<br />
खासाको कटि बन्यो है पिछोरा मोतिन सहरो सीस धरे l<br />
रातै नैन बंक अनियारे चंचल अंजन मान हरे ll 2 ll<br />
ठाडे कमल फिरावत गावत कुंडल श्रमकन बिंद परे l<br />
‘सूरदास’ प्रभु मदन मोहन मिल राधासों रति केल करे ll 3 ll</p>
<p><strong>साज –</strong> आज श्रीजी में सेहरा का श्रृंगार धराये श्री स्वामिनीजी, श्री यमुनाजी एवं मंगलगान करती व्रजगोपियों के सुन्दर चित्रांकन से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> श्रीजी को आज केसरी मलमल का मलमल का पिछोड़ा एवं अंतरवास का राजशाही पटका धराया जाता है.</p>
<p><strong>श्रृंगार –</strong> आज प्रभु को वनमाला का (चरणारविन्द तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीमस्तक पर केसरी दुमाला के ऊपर मोती का सेहरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. दायीं ओर सेहरे की मोती की चोटी धरायी जाती है.</p>
<p>श्रीकर्ण में मकराकृति कुंडल धराये जाते हैं.कली आदि की माला श्रीकंठ में धरायी जाती है. श्वेत एवं गुलाबी पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी भी धरायी जाती हैं एवं इसी प्रकार श्वेत पुष्पों की एक मोटी मालाजी पीठिका के ऊपर भी धरायी जाती है.</p>
<p>श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, गंगा जमुनी के वेणुजी एवं दो वेत्रजी (एक सुवा वाला व एक चांदी की) धराये जाते हैं.पट गोटी ऊष्णकाल के राग-रंग के आते हैं.</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/आषाढ़-कृष्ण पक्ष-दशमी</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-10-jul-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Jul 2026 01:09:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज &#8211; आषाढ़ कृष्ण पक्ष दशमी Friday, 10 July 2026 गुलाबी मलमल की धोती, पटका एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर जमाव का क़तरा के श्रृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : मल्हार) हों इन मोरनकी बलिहारी l जिनकी सुभग चंद्रिका माथे धरत गोवर्धनधारी ll 1 ll बलिहारी या वंश &#8230;<p class="read-more"> <a class="" href="https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-10-jul-2026/"> <span class="screen-reader-text">SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/आषाढ़-कृष्ण पक्ष-दशमी</span> Read More &#187;</a></p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज &#8211; आषाढ़ कृष्ण पक्ष दशमी<br />
Friday, 10 July 2026</h6>
<p style="text-align: center;"><strong>गुलाबी मलमल की धोती, पटका एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर जमाव का क़तरा के श्रृंगार</strong></p>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : मल्हार)</p>
<p>हों इन मोरनकी बलिहारी l<br />
जिनकी सुभग चंद्रिका माथे धरत गोवर्धनधारी ll 1 ll<br />
बलिहारी या वंश कुल सजनी बंसी सी सुकुमारी l<br />
सुन्दर कर सोहे मोहन के नेक हू होत न न्यारी ll 2 ll<br />
बलिहारी गुंजाकी जात पर महाभाग्य की सारी l<br />
सदा हृदय रहत श्याम के छिन हू टरत न टारी ll 3 ll<br />
बलिहारी ब्रजभूमि मनोहर कुंजन की अनुहारी l<br />
‘सूरदास’ प्रभु नंगे पायन अनुदिन गैया चारी ll 4 ll</p>
<p><strong>साज &#8211;</strong> आज श्रीजी श्वेत मलमल पर नाचते मोर की चितराम की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> आज प्रभु को गुलाबी रंग की मलमल धोती एवं राजशाही पटका धराया जाता हैं. दोनों वस्त्र रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होते हैं.</p>
<p><strong>श्रृंगार –</strong> प्रभु को आज छेड़ान का ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है.मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.<br />
श्रीमस्तक पर गुलाबी रंग की छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच, लूम, जमाव का क़तरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.<br />
श्रीकर्ण में एक जोड़ी मोती के कर्णफूल धराये जाते हैं.श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं एवं हमेल की भांति दो मालाजी धरायी जाती हैं.</p>
<p>श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, चाँदी के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.पट ऊष्णकाल के राग-रंग का एवं गोटी हक़ीक की आती हैं.</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/आषाढ़-कृष्ण पक्ष-नवमी</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-09-jul-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Jul 2026 01:45:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज – आषाढ़ कृष्ण पक्ष नवमी Thursday, 09 July 2026 चंदनी मलमल की परधनी एवं श्रीमस्तक पर चिनमा पगा पर तुर्रा के श्रृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : सारंग) सोहत लाल के परदनी अति झीनी।। तापर एक अधिक छबि उपजत जलसुत पांति बनी कटी छीनी।।1।। उज्जवल पाग श्याम शिर &#8230;<p class="read-more"> <a class="" href="https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-09-jul-2026/"> <span class="screen-reader-text">SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/आषाढ़-कृष्ण पक्ष-नवमी</span> Read More &#187;</a></p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज – आषाढ़ कृष्ण पक्ष नवमी<br />
Thursday, 09 July 2026</h6>
<p style="text-align: center;"><strong>चंदनी मलमल की परधनी एवं श्रीमस्तक पर चिनमा पगा पर तुर्रा के श्रृंगार</strong></p>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : सारंग)</p>
<p>सोहत लाल के परदनी अति झीनी।।<br />
तापर एक अधिक छबि उपजत जलसुत पांति बनी कटी छीनी।।1।।<br />
उज्जवल पाग श्याम शिर शोभित अलकावली मधुप मधुपीनी।।<br />
‘कुंभनदास&#8217; प्रभु गोवरधनधर चपल नयन युवतीन बस कीनी।।2।।</p>
<p><strong>साज &#8211;</strong> आज श्रीजी में चंदनी मलमल की पिछवाई है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> आज श्रीजी को चंदनी मलमल की परधनी धरायी जाती है.</p>
<p><strong>श्रृंगार –</strong> आज प्रभु को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. मोती के आभरण धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीमस्तक पर चंदनी मलमल पर चिनमा पगा के ऊपर सिरपैंच, तुर्रा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीकर्ण में कर्णफूल धराये जाते हैं.श्वेत पुष्पों की कलात्मक थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं वहीँ एक श्वेत एवं एक कमल के पुष्पों की माला हमेल की भांति धरायी जाती हैं.</p>
<p>श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, झीने लहरियाँ के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.पट ऊष्णकाल का व गोटी छोटी हकीक की आती है.</p>
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