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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/भाद्रपद-कृष्ण पक्ष-द्वादशी</title>
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		<pubDate>Tue, 08 Sep 2026 04:33:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज -भाद्रपद कृष्ण पक्ष द्वादशी Tuesday, 08 September 2026 वत्स द्वादशी (बच्छ बारस) ऐसा कहा जाता है कि जब प्रभु श्रीकृष्ण अढाई वर्ष के थे तब आज के दिन ही यशोदाजी ने भी गाय और बछड़े का पूजन कर शगुन के रूप में उनको वन में बछड़े चराने को भेजा था.इस [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज -भाद्रपद कृष्ण पक्ष द्वादशी<br />
Tuesday, 08 September 2026</h6>
<p style="text-align: center;"><strong>वत्स द्वादशी (बच्छ बारस)</strong></p>
<p>ऐसा कहा जाता है कि जब प्रभु श्रीकृष्ण अढाई वर्ष के थे तब आज के दिन ही यशोदाजी ने भी गाय और बछड़े का पूजन कर शगुन के रूप में उनको वन में बछड़े चराने को भेजा था.इस कारण से आज का दिवस वत्स द्वादशी कहलाता है.</p>
<p>इसके अतिरिक्त लाला अक्षय तृतीया को अपने मुंडन के दिवस भी वन में गौ-चारण को गये परन्तु भीषण गर्मी से बेहाल प्रभु को थोड़े ही समय में लौट कर आना पड़ा.</p>
<p>यह प्रसंग मैं अक्षय तृतीया को बता चुका हूँ.</p>
<p>यद्यपि लाला ने यथाविधि गौ-चारण गोपाष्टमी के दिवस से प्रारंभ किया था और उसी दिन से गोपाल कहाए थे.</p>
<p>गुजरात में गौ-वत्स द्वादशी दीपावली के पहले आने वाली कार्तिक कृष्ण द्वादशी को होती है.</p>
<p>श्रीजी में सेवाक्रम &#8211; आज श्रीजी को नियम की गौ पूजन की पिछवाई, लाल चौफूली चूंदड़ी की लाल गोल-काछनी, सूथन और श्रीमस्तक पर हीरा की तिलक वाली टोपी धरायी जाती है.</p>
<p>बालभाव के कीर्तन गाये जाते हैं जिसमें गौ-पूजन को जाते बालक श्री श्यामसुंदर के श्रृंगार, सुन्दर वस्त्रों, आभूषणों एवं यशोदाजी के बड़े भाग्य का अद्भुत वर्णन किया गया है.</p>
<p>नीचे वर्णित कीर्तन को भावपूर्वक पढ़ें और सुन्दर शब्दों को समझने का प्रयास कर उनका आनंद लें.</p>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : सारंग)</p>
<p>ठाडी लिये खिलावत कनियां l<br />
प्रेममुदित मन गावत यशोदा हरि लीला मोहनियां ll 1 ll<br />
काजर तिलक पीत तन झगुली कणित पाई पैजनिया l<br />
हंसुली हेम हमेल बिराजत झर झटकन मनि मनिया ll 2 ll<br />
हुलरावति हसि कंठ लगावत प्रीति रीति अति धनियां l<br />
चुंबत मुख ‘रघुनाथदास’ बलि बड़ भागिन नंद रनियां ll 3 ll</p>
<p><strong>साज –</strong> नन्दभवन की तिबारी में बछड़े सहित गाय का तिलक कर पूजन करती श्री यशोदा माँ, रोहिणी माँ तथा दूसरी ओर गायों के साथ ग्वाल-बालों के सुन्दर चित्रांकन से सुशोभित पिछवाई आज श्रीजी में धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरण चौकी पर सफेद बिछावट की जाती है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> श्रीजी को आज लाल रंग की चौफूली चुन्दडी के रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित सूथन एवं गोल काछनी (मोर काछनी) धरायी जाती है. ठाड़े वस्त्र मेघश्याम रंग के धराये जाते हैं.</p>
<p><strong>श्रृंगार –</strong> श्रीजी को आज वनमाला (चरणारविन्द तक) का भारी श्रृंगार धराया जाता है. हीरे के सर्व आभरण धराये जाते हैं. कली, कस्तूरी एवं कमल माला आती है.</p>
<p>श्रीमस्तक हीरा की टोपी तिलक व फूंदा वाली पर जाली(net) की तीन तुर्री और बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीकर्ण में मयुराकृति कुंडल धराये जाते हैं एवं स्वरुप की बायीं ओर मीना की चोटी धरायी जाती है.पीले एवं श्वेत पुष्पों की कलात्मक थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.</p>
<p>श्रीहस्त में कमलछड़ी लहरिया के वेणुजी एवं दो वेत्रजी (लहरिया व एक सोना के) धराये जाते हैं.पट लाल, गोटी मोर की व आरसी बावा साहब द्वारा पधराई कांच के कलात्मक काम की आती है.</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/भाद्रपद-कृष्ण पक्ष-एकादशी (अजा एकादशी)</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-07-sep-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 07 Sep 2026 03:26:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज -भाद्रपद कृष्ण पक्ष एकादशी (अजा एकादशी) Monday, 07 September 2026 आज अजा एकादशी हैं. महापापी अजामिल के प्रसंग में प्रभु के जीव पर अनुग्रह को आत्मसात करे. अजा एकादशी विशेष – महापापी अजामिल जिसने अपने अंतिम समय में अपने स्वयं के पुत्र ‘नारायण’ के नामोच्चारण के निमित प्रभु का नाम [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज -भाद्रपद कृष्ण पक्ष एकादशी (अजा एकादशी)<br />
Monday, 07 September 2026</h6>
<p><strong>आज अजा एकादशी हैं. महापापी अजामिल के प्रसंग में प्रभु के जीव पर अनुग्रह को आत्मसात करे.</strong></p>
<p style="text-align: center;"><strong>अजा एकादशी</strong></p>
<p>विशेष – महापापी अजामिल जिसने अपने अंतिम समय में अपने स्वयं के पुत्र ‘नारायण’ के नामोच्चारण के निमित प्रभु का नाम उच्चारण किया था. प्रभु की दयालुता देखें कि केवल अंत समय में ‘नारायण’ के नाम के उच्चारण मात्र से उन्होंने आज के दिन अपने देवदूत भेज अजामिल पर अनुग्रह कर उसका उद्धार किया था. प्रभु ने यह अपना अनुग्रह प्रकट करने के लिए किया इसी लिए कहते हे की प्रभु कर्तुम अकर्तुम अन्यथाकर्तुम सर्वसमर्थ है।आज की एकादशी उसी अजामिल के नाम से अजा एकादशी कहलाती है.</p>
<p>ये अध्याय से यह सीख मिलती है कि हम सब पुष्टि वैष्णवो को ठाकुरजी की सेवा और नाम किर्तन सतत अंतिम श्र्वास तक करना है , कितनी भी विषम परिस्थिति हमारे जीवन में क्यों न आए ?<br />
ठाकुरजी की सेवा और ठाकुरजी से स्नेह यही पुष्टि जीव का लक्ष्य होना चाहिए ।<br />
मनुष्य चाहे जितना बड़ा पापी हो , चाहे जितना नि:साधन हो ; यदि सच्चे ह्रदय से एकबार भी प्रभु की शरण स्वीकार ले तो प्रभु उसको &#8221; स्वजन &#8221; मान लते हैं . इसीलिए महाप्रभु श्रीवल्लभाचार्यजी ने &#8220;कृष्णाश्रयस्तोत्र&#8221; में कहा हैं :-</p>
<p>&#8220;पापसक्तस्य दीनस्य कृष्ण एव गतिर्मम&#8221;</p>
<p>भावार्थ :- सुखी हो या दु:खी , पापी हो या निष्पाप , धनवान हो या निर्धन , साधन-सम्पन्न हो या नि:साधन ; सभी को श्रीकृष्ण की शरण में ही जाना चाहिए .<br />
सब देवें के देव , सर्वशक्तिमान , सर्वकारण ऐसे श्रीकृष्ण को छोड़ कर अन्य किसी की शरण में क्यों जाएँ ?<br />
इसीलिए पुष्टिमार्ग श्रीकृष्ण की अनन्य भक्ति का मार्ग<br />
दिखाता/सिखाता है .</p>
<p>आज से अमावस्या तक प्रभु को बाल-लीला के श्रृंगार धराये जाते हैं एवं बाल-लीला के ही अद्भुत पद गाये जाते हैं.</p>
<p>आज श्रीजी प्रभु को नियम से यह हल्का श्रृंगार धराया जाता है जिसमें लाल पिछोड़ा, जन्माष्टमी वाला केसरी गाती का पटका, श्रीमस्तक पर गोल पाग के ऊपर पन्ना की गोटी लूम की रुपहली किलंगी धरायी जाती है. नन्दउत्सव के भाव के चित्रांकन की पिछवाई आती है.</p>
<p>जन्माष्टमी के उपरांत आज मंगला के पश्चात सभी साज पर सफेदी चढ़े. टेरा, चौरसा आदि सभी नित्य के आ जाते हैं.</p>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन : (राग – सारंग)</p>
<p>जब मेरो मोहन चलेगो घुटुरुवन तब हो री करोंगी वधाई l<br />
सर्वसु बारि देहूंगी तिहि छिनु मैया कहे तुतुराई ll 1 ll<br />
यशोदा के वचन सुनत ‘केशो प्रभु’ जननी प्रीति जानी अधिकाई l<br />
नंद सुवन सुख दियो मात कों अतिकृपाल मेरो नंदललाई ll 2 ll</p>
<p><strong>साज –</strong> नन्दभवन में बधाई देने एवं दर्शन करने को आये व्रजभक्तों की भीड़ एवं दूसरी ओर छठी पूजन और लालन को पलना झुलाते नंदबाबा और यशोदाजी के सुन्दर चित्रांकन वाली पिछवाई आज श्रीजी में आती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है. चरणचौकी, पड़घा, बंटाजी आदि जड़ाव स्वर्ण के धरे जाते हैं.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> श्रीजी को आज लाल रंग की मलमल पर रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित पिछोड़ा (षष्ठी उत्सव वाला) धराया जाता है. जन्माष्टमी वाला केसरी रंग का गाती का पटका धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र सुवापंखी हरे (तोते के पंखों के जैसे हल्के हरे) रंग के धराये जाते हैं.</p>
<p><strong>श्रृंगार –</strong> प्रभु को आज छोटा (कमर तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. मोती तथा सोने के आभरण धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीमस्तक पर लाल रंग की गोल पाग के ऊपर सिरपैंच, पन्ना की गोटी, रुपहली लूम की किलंगी एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीकर्ण में कर्णफूल धराये जाते हैं. हालरा बघनखा और हमेल धराये जाते हैं.पीले एवं श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर कलात्मक मालाजी धरायी जाती हैं.</p>
<p>श्रीहस्त में कमलछड़ी, लाल मीना के वेणुजी और एक वेत्रजी धराये जाते हैं.पट लाल व गोटी चांदी की आती है.</p>
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/भाद्रपद-शुक्ल पक्ष-दशमी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 06 Sep 2026 06:39:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज –भाद्रपद शुक्ल पक्ष दशमी Sunday, 06 September 2026 जन्माष्टमी का परचारगी श्रृंगार विशेष – जन्माष्टमी के चार श्रृंगार चार यूथाधिपति स्वामिनीजी के भाव से होते हैं. प्रथम बधाई का श्रृंगार श्री यमुनाजी के भाव से, दूसरा जन्माष्टमी के दिन श्री राधिकाजी के भाव से, तीसरा नन्द महोत्सव का श्री चन्द्रावलीजी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज –भाद्रपद शुक्ल पक्ष दशमी<br />
Sunday, 06 September 2026</h6>
<p style="text-align: center;"><strong>जन्माष्टमी का परचारगी श्रृंगार</strong></p>
<p><strong>विशेष –</strong> जन्माष्टमी के चार श्रृंगार चार यूथाधिपति स्वामिनीजी के भाव से होते हैं. प्रथम बधाई का श्रृंगार श्री यमुनाजी के भाव से, दूसरा जन्माष्टमी के दिन श्री राधिकाजी के भाव से, तीसरा नन्द महोत्सव का श्री चन्द्रावलीजी के भाव से और चौथा आज का श्री ललिताजी के भाव से होता है.</p>
<p>आज श्रीजी में सभी साज, वस्त्र एवं श्रृंगार पिछली कल की भांति ही होते हैं.<br />
इसे परचारगी श्रृंगार कहते हैं. श्रीजी में अधिकांश बड़े उत्सवों के एक दिन बाद परचारगी श्रृंगार होता है.</p>
<p>परचारगी श्रृंगार के श्रृंगारी अगर उपस्थित हो तो श्रीजी के परचारक महाराज (चिरंजीवी श्री विशाल बावा) होते हैं.</p>
<p>कल नन्दोत्सव से अमावस्या तक प्रभु की बाल-लीला के श्रृंगार धराये जाते हैं एवं कीर्तनों में बाल-लीला के ही पद गाये जाते हैं.</p>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : सारंग)</p>
<p>नंद बधाई दीजे ग्वालिन l<br />
तुम्हारे श्याम मनोहर आये गोकुल के प्रति पालन ll 1 ll<br />
युवतिन बहु विधि भूषन दीजे विप्रन को गोदान l<br />
गोकुल मंगल महामहोच्छव कमल नैन घनश्याम ll 2 ll<br />
नाचत देव विमल गंधर्व मुनि गावत गीत रसाल l<br />
‘परमानंद’ प्रभु तुम चिरजीयो नंद गोप के लाल ll 3 ll</p>
<p><strong>साज &#8211;</strong> श्रीजी में आज लाल दरियाई की बड़े लप्पा की सुनहरी ज़री की तुईलैस के हांशिया (किनारी) वाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया के ऊपर लाल मखमल बिछावट की जाती है तथा स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर सफेद मखमल मढ़ी हुई होती है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> श्रीजी को आज केसरी रंग के जामदानी के, रुपहली ज़री की तुईलैस से सुसज्जित चाकदार वागा एवं चोली धरायी जाती है. सूथन रेशमी सुनहरी छापा का होता है. ठाड़े वस्त्र मेघश्याम रंग के होते हैं. आज तकिया के खोल जड़ाऊ स्वर्ण काम के आते हैं.</p>
<p><strong>श्रृंगार –</strong> प्रभु को आज वनमाला (चरणारविन्द तक) का उत्सव का दो जोड़ (विगत कल चार जोड़) का भारी श्रृंगार धराया जाता है. हीरे और माणक तथा स्वर्ण जड़ाव के आभरण धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीमस्तक पर केसरी रंग की कुल्हे के ऊपर सिरपैंच, पांच मोरपंख की चन्द्रिका की जोड़ एवं बायीं ओर जड़ाव का शीशफूल धराया जाता है.</p>
<p>श्रीकर्ण में मकराकृति कुंडल धराये जाते हैं. बायीं ओर उत्सव की माणक की चोटी (शिखा) धरायी जाती है.</p>
<p>पीठिका के ऊपर हीरे का चौखटा धराया जाता है.</p>
<p>श्रीकंठ में कली,कस्तूरी आदि की माला आती हैं.पीले एवं श्वेत पुष्पों की विविध रंगों की थागवाली दो मालाजी धरायी जाती है.</p>
<p>श्रीहस्त में कमलछड़ी, हीरे के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते है.पट एवं गोटी हीरे के आते हैं.</p>
<p>आरसी शृंगार में चार झाड़ की व राजभोग में स्वर्ण की बड़ी डाँडी की आती है.</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/भाद्रपद-कृष्ण पक्ष-अष्टमी</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-04-sep-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Sep 2026 04:52:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज &#8211; भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी Friday, 04 September 2026 सभी वैष्णवजन को प्रभु के आगमन की ख़ूब ख़ूब बधाई श्रीकृष्ण जन्माष्टमी सेवाक्रम – आज का उत्सव महा-महोत्सव कहलाता है. पुष्टिमार्गीय वैष्णवों के लिए यह महोत्सव सबसे अधिक महत्व का होता है. बीच में एक बात&#8230; कुछ वैष्णवों ने पूछा था [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<p><strong>व्रज &#8211; भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी</strong><br />
<strong>Friday, 04 September 2026</strong></p>
<p style="text-align: center;"><strong>सभी वैष्णवजन को प्रभु के आगमन की ख़ूब ख़ूब बधाई</strong></p>
<p style="text-align: center;"><strong>श्रीकृष्ण जन्माष्टमी</strong></p>
<p><strong>सेवाक्रम – आज का उत्सव महा-महोत्सव कहलाता है. पुष्टिमार्गीय वैष्णवों के लिए यह महोत्सव सबसे अधिक महत्व का होता है.</strong></p>
<p>बीच में एक बात&#8230;</p>
<p>कुछ वैष्णवों ने पूछा था कि प्रभु का जन्म रात्रि को होता है तो पंचामृत स्नान प्रातः क्यों होता है ?</p>
<p>-आज प्रभु को उनके जन्मदिन के महात्म्य स्वरूप यशोदोत्संगलालित स्वरूप के आधार रूप परब्रह्म श्रीकृष्ण के रूप में पंचामृत स्नान कराया जाता है.<br />
रात्रि को प्रभु जन्म उपरांत तो श्री बालकृष्णलालजी के स्वरुप को पंचामृत होता है.</p>
<p>कुछ का प्रश्न यह भी था कि प्रभु जन्म के शुभ दिन फलाहार करना कैसे उचित है ?</p>
<p>&#8211; पुष्टिमार्ग में चारों जयंतियों (श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, श्रीरामनवमी, श्री वामन द्वादशी व श्री नृसिंह जयंती) के दिन फलाहार किया जाता है.<br />
इसका भाव यह है कि जब हम प्रभु के सम्मुख जाएँ अथवा प्रभु हमारे घर पधारें तब तन, मन से शुद्ध हों और आयुर्वेद में भी कहा गया है कि उपवास अथवा फलाहार से तन व मन की शुद्धि होती है.</p>
<p>पंचामृत को दर्शन के पश्चात् श्रीजी के पातलघर से सभी वैष्णवों को वितरित किया जाता है जिसे प्रभु प्रसाद के रूप में सभी ग्रहण करते हैं.</p>
<p>श्रृंगार काफी देर से लगभग 9.30 बजे खुलते हैं क्योंकि पंचामृत स्नान के पश्चात प्रभु स्वरुप अत्यधिक चिकना हो जाता है. साथ ही आज का श्रृंगार, आभरण आदि भी अत्यधिक भारी में भारी होते हैं</p>
<p>(जिनका वर्णन आगे इसी post में है).</p>
<p>श्रृंगार दर्शन में श्रीजी को तिलक एवं अक्षत किया जाता है, भेंट रखी जाती है. इस दौरान शंख, झालर, धंटा आदि बजाये जाते हैं और वैष्णव मंगलगान गाते हैं.</p>
<p>प्रभु के सम्मुख हल्दी से चौक पुराया जाता है. राई, लोन से प्रभु की नज़र उतारी जाती है.</p>
<p><strong>श्रीजी के मुख्य पंड्याजी वर्षपत्र पढ़ते हैं.</strong></p>
<p>आज श्रीजी को गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में विशेष रूप से केशरयुक्त चन्द्रकला एवं केशरी बासोंदी (रबड़ी) की हांड़ी, चार प्रकार के फलों के मीठा अरोगाये जाते हैं.</p>
<p>राजभोग में दाख (किशमिश) का रायता, सखड़ी भोग में पांचभात (मेवा-भात, दही-भात, राई-भात, श्रीखंड-भात और वड़ी-भात) आरोगाये जाते हैं. राजभोग दर्शन लगभग 12.30 को खुलते हैं.</p>
<p>संध्या आरती में जयंती के फलाहार के रूप में मलाई की बासोंदी और खोवा और फीका में घी में तला बीज-चालनी का सूखा मेवा आरोगाया जाता है.</p>
<p>संध्या-आरती दर्शन लगभग रात्रि 7.30 बजे खुलते हैं और लगभग रात्रि 8.30 बजे से जागरण के दर्शन होते हैं जो कि रात्रि लगभग 11.45 तक खुले रहते हैं.</p>
<p><strong>तदुपरांत रात्रि 12 बजे भीतर शंख, झालर, घंटानाद की ध्वनि के मध्य प्रभु का जन्म होता है.</strong></p>
<p>प्रभु जन्म के समय नाथद्वारा नगर के रिसाला चौक में प्रभु को 21 तोपों की सलामी दी जाती है. इस अद्भुत परंपरा के साक्षी बनने के लिये प्रतिवर्ष वहां हजारों की संख्या में नगरवासी व पर्यटक एकत्र होते हैं.</p>
<p>प्रभु सम्मुख विराजित श्री बालकृष्णलालजी पंचामृत स्नान होता है, महाभोग धरा जाता है जिसमें पंजीरी के लड्डू, मनोर (इलायची-जलेबी) के लड्डू, मेवाबाटी, केशरिया घेवर, केशरिया चन्द्रकला, दूधघर में सिद्ध मावे के पेड़ा-बर्फी, दूधपूड़ी (मलाई-पूड़ी), केशर युक्त बासोंदी, जीरा युक्त दही, केसरी-सफेद मावे की गुंजिया, श्रीखंड-वड़ी, घी में तला हुआ बीज-चालनी का सूखा मेवा, विविध प्रकार के संदाना (आचार) के बटेरा, विविध प्रकार के फल आदि अरोगाये जाते हैं.<br />
<strong>महाभोग की सखड़ी में राजभोग की भांति सखड़ी की सामग्री, पांचभात, मीठी सेव, केसरी पेठा आदि अरोगाये जाते हैं.</strong></p>
<p>वैष्णवों के घर श्री ठाकुरजी को शयन पश्चात पोढ़ा दिया जाता है और जागरण नहीं किया जाता. नवमी के दिन श्री ठाकुरजी को जगाकर, मंगल भोग धर कर, सरा कर श्रृंगार किया जाता है. राजभोग में अदकी सामग्रियां धर कर पलने में झूला कर नन्दोत्सव मनाया जाता है परन्तु मंदिरों – हवेलियों आदि में अष्टमी के रात्रि को महाभोग, नवमी के दिवस प्रातः नन्दोत्सव, इसके पश्चात मंगला, श्रृंगार एवं राजभोग आदि का सेवाक्रम किया जाता है.</p>
<p>इस उत्सव में सेवाक्रम मंदिरों में और वैष्णवों के घरों में थोड़ा अलग-अलग होता है.</p>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : सारंग)</p>
<p>ऐ री ऐ आज नंदराय के आनंद भयो l<br />
नाचत गोपी करत कुलाहल मंगल चार ठयो ll 1 ll<br />
राती पीरी चोली पहेरे नौतन झुमक सारी l<br />
चोवा चंदन अंग लगावे सेंदुर मांग संवारी ll 2 ll<br />
माखन दूध दह्यो भरिभाजन सकल ग्वाल ले आये l<br />
बाजत बेनु पखावज महुवरि गावति गीत सुहाये ll 3 ll<br />
हरद दूब अक्षत दधि कुंकुम आँगन बाढ़ी कीच l<br />
हसत परस्पर प्रेम मुदित मन लाग लाग भुज बीच ll 4 ll<br />
चहुँ वेद ध्वनि करत महामुनि पंचशब्द ढ़म ढ़ोल l<br />
‘परमानंद’ बढ्यो गोकुलमे आनंद हृदय कलोल ll 5 ll</p>
<p><strong>साज &#8211;</strong> श्रीजी में आज लाल दरियाई की बड़े लप्पा की सुनहरी ज़री की तुईलैस के हांशिया (किनारी) वाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया के ऊपर लाल मखमल बिछावट की जाती है तथा स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर सफेद मखमल मढ़ी हुई होती है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> श्रीजी को आज केसरी रंग की जामदानी की रुपहली ज़री की तुईलैस से सुसज्जित चाकदार एवं चोली धरायी जाती है. सूथन रेशम का लाल रंग का सुनहरी छापा का होता है. लाल रंग का पीताम्बर चौखटे के ऊपर धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र मेघश्याम रंग के होते हैं.</p>
<p><strong>श्रृंगार –</strong> प्रभु को आज वनमाला (चरणारविन्द तक) का भारी से भारी श्रृंगार धराया जाता है. उत्सव के तीन जोड़ी के हीरा, पन्ना एवं माणक नवरत्नों के आभरण धराये जाते हैं. नीचे तेरह पदक ऊपर हीरा, पन्ना, माणक एवं मोती के हार, माला आदि धराये जाते हैं.हांस, त्रवल, बघनखा,दो हालरा आदि धराये जाते हैं. वैजयंतीमाला धरायी जाती है.</p>
<p>श्रीमस्तक पर केसरी रंग की कुल्हे के ऊपर सिरपैंच, पांच मोरपंख की चन्द्रिका की जोड़ एवं बायीं ओर जमाव का शीशफूल धराया जाता है. श्रीकर्ण में मकराकृति कुंडल धराये जाते हैं. बायीं ओर मानक की चोटीजी (शिखा) धरायी जाती है.</p>
<p>पीठिका के ऊपर प्राचीन हीरे-मोती के जड़ाव का चौखटा धराया जाता है. प्रभु के मुखारविंद पर केशर से कपोलपत्र किये जाते हैं.</p>
<p>श्रीकंठ में कली,कस्तूरी आदि की माला आती हैं.पीले एवं श्वेत पुष्पों की विविध रंगों की थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती है.</p>
<p>श्रीहस्त में कमलछड़ी, हीरे के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते है.पट एवं गोटी जड़ाऊ स्वर्ण की आते हैं.</p>
<p>आरसी शृंगार में जड़ाऊ स्वर्ण की व राजभोग में उस्ताजी की बड़ी दिखाई जाती है.</p>
<p><strong>जागरण कीर्तन – (राग : मालव)</strong></p>
<p>पद्म धर्यो जन ताप निवारण ।<br />
चक्र सुदर्शन धर्यो कमल कर भक्तनकी रक्षा के कारण ॥१॥<br />
शंख धर्यो रिपु उदर विदारन गदाधरी दुष्टन संहारन ।<br />
चारौ भुजा चारौ आयुध धरे नारायण भुव भार उतारन ॥२॥<br />
दीनानाथ दयाल जगत गुरू आरति हरन चिंतामनि ।<br />
परमानंद दासकौ ठाकुर यह औसर छांडो जिन किनि ॥३॥</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/भाद्रपद-कृष्ण पक्ष-षष्ठी (पंचमी क्षय)</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-02-sep-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 02 Sep 2026 03:39:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज &#8211; भाद्रपद कृष्ण पक्ष षष्ठी (पंचमी क्षय) Wednesday, 02 September 2026 विशेष – जन्माष्टमी के पूर्व श्रीजी को घर के श्रृंगार धराये जाते हैं. इन्हें ‘आपके श्रृंगार’ भी कहा जाता है. इस श्रृंखला में आज श्रीजी को हरा सफ़ेद लहरिया और श्रीमस्तक पर पाग और सुनहरी जमाव का कतरा धराया [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज &#8211; भाद्रपद कृष्ण पक्ष षष्ठी (पंचमी क्षय)<br />
Wednesday, 02 September 2026</h6>
<p><strong>विशेष –</strong> <strong>जन्माष्टमी के पूर्व श्रीजी को घर के श्रृंगार धराये जाते हैं. इन्हें ‘आपके श्रृंगार’ भी कहा जाता है.</strong></p>
<p>इस श्रृंखला में आज श्रीजी को हरा सफ़ेद लहरिया और श्रीमस्तक पर पाग और सुनहरी जमाव का कतरा धराया जाता है.<br />
आज सभी समय झारीजी में यमुनाजल आता है.</p>
<p>आज श्रीजी में जन्माष्टमी की पानघर की सेवा की जाती हैं.</p>
<p>आज प्रभु को गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में मेवाबाटी (मेवा मिश्रित खस्ता ठोड़) अरोगायी जाती है.</p>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : सारंग)</p>
<p>सब ग्वाल नाचे गोपी गावे l प्रेम मगन कछु कहत न आवे ll 1 ll<br />
हमारे राय घर ढोटा जायो l सुनि सब लोक बधाये आयो ll 2 ll<br />
दूध दधि घृत कांवरि ढोरी l तंदुल डूब अलंकृत रोरी ll 3 ll<br />
हरद दूध दधि छिरकत अंगा l लसत पीत पट बसन सुरंगा ll 4 ll<br />
ताल पखावज दुंदुभि ढोला l हसत परस्पर करत कलोला ll 5 ll<br />
अजिर पंक गुलफन चढि आये l रपटत फिरत पग न ठहराये ll 6 ll<br />
वारि वारि पटभूषन दीने l लटकत फिरत महारस भीने ll 7 ll<br />
सुधि न परे को काकी नारी l हसि हसि देत परस्पर तारी ll 8 ll<br />
सुर विमान सब कौतिक भूले l मुदित त्रिलोक विमोहित फूले ll 9 ll</p>
<p><strong>साज &#8211;</strong> श्रीजी में आज हरे-श्वेत रंग के लहरिया की रुपहली ज़री के हांशिया (किनारी) से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया के ऊपर लाल मखमल बिछावट की जाती है तथा स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> श्रीजी में आज हरे-श्वेत लहरिया का पिछोड़ा धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र लाल रंग के होते हैं.</p>
<p><strong>श्रृंगार –</strong> प्रभु को आज छोटा (कमर तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है.माणक तथा जड़ाव स्वर्ण के सर्वआभरण धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीमस्तक पर हरे-सफेद लहरिया की पाग के ऊपर सिरपैंच, लूम, सुनहरी जमाव का कतरा एवं सुनहरी तुर्री तथा बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीकर्ण में मानक के कर्णफूल धराये जाते हैं.श्रीकंठ में हार एवं दुलड़ा धराया जाता हैं.पीले पुष्पों की विविध रंग की थागवाली दो मालाजी धरायी जाती है एवं इसी प्रकार की दो मालाजी हमेल की भांति भी धरायी जाती है.</p>
<p>श्रीहस्त में कमलछड़ी, लाल मीना के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.पट शतरंज का हरा एवं गोटी स्वर्ण की शतरंज की धराई जाती हैं.</p>
<p>आरसी श्रृंगार में सोना की एवं राजभोग में सोना की डांडी की आती है.</p>
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/</title>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 01 Sep 2026 03:08:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज – भाद्रपद कृष्ण पक्ष चतुर्थी Thursday, 01 September 2026 आज से आपके श्रृंगार प्रारम्भ विशेष – आज के दिन श्रीजी में चंदरवा, टेरा, वंदनमाल, कसना, तकिया के खोल आदि बदले जाते हैं.आज से भाद्रपद कृष्ण नवमी के दिन तक सभी समय झारीजी में यमुनाजल आता है. सभी बड़े उत्सवों के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज – भाद्रपद कृष्ण पक्ष चतुर्थी<br />
Thursday, 01 September 2026</h6>
<p>आज से आपके श्रृंगार प्रारम्भ</p>
<p><strong>विशेष –</strong> आज के दिन श्रीजी में चंदरवा, टेरा, वंदनमाल, कसना, तकिया के खोल आदि बदले जाते हैं.आज से भाद्रपद कृष्ण नवमी के दिन तक सभी समय झारीजी में यमुनाजल आता है.</p>
<p>सभी बड़े उत्सवों के पूर्व श्रीजी को नियम के घर के श्रृंगार धराये जाते हैं जिन्हें घर के श्रृंगार भी कहा जाता है और इन पर श्रीजी के तिलकायत महाराज का विशेष अधिकार होता है.</p>
<p>जन्माष्टमी के पूर्व आज से घर के श्रृंगार धराये जाते हैं. इस श्रृंखला में आज श्रीजी को लाल एवं पीले रंग की इकदानी चूंदड़ी का पिछोड़ा और श्रीमस्तक पर चुंदड़ी की छज्जेदार पाग के ऊपर लूम की किलंगी धरायी जाती है.</p>
<p>आज श्रीजी को गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में विशेष रूप से मनोर (इलायची-जलेबी) के लड्डू आरोगाये जाते हैं.</p>
<p>आज ही जन्माष्टमी के दिन श्रीजी को धराये जाने वाले वस्त्र एवं साज के लिए सफेद मलमल एवं डोरिया के वस्त्र केसर से रंगे जाते हैं. वस्त्र रंगते समय नक्कारे, थाली एवं मादल बजाये जाते हैं एवं सभी वैष्णव बधाईगान करते हैं.</p>
<p>राजभोग आरती पश्चात पूज्य तिलकायत परिवार के सदस्य, मुखियाजी वस्त्र रंगते हैं, वैष्णवजन और दर्जीखाना के सेवकगण अपने हाथ में रख के सुखाते हैं.</p>
<p>भाद्रपद कृष्ण पंचमी के दिन ये वस्त्र रंगे जाते हैं इसका यह भाव है कि “हे प्रभु, जिस प्रकार ये श्वेत वस्त्र आज केशर के रंग में रंगे जा रहे हैं, मेरी पाँचों ज्ञानेन्द्रियाँ और पाँचों कर्मेन्द्रियाँ भी आज पंचमी के दिवस आपके रंग में रंग जाएँ.”</p>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : सारंग)</p>
<p>आँगन नंदके दधि कादौ l<br />
छिरकत गोपी ग्वाल परस्पर प्रगटे जगमे जादौ ll 1 ll<br />
दूध लियो दधि लियो लियो घृत माखन मांट संयुत l<br />
घर घर ते सब गावत आवत भयो महरि के पुत ll 2 ll<br />
बाजत तूर करत कुलाहल वारि वारि दे दान l<br />
जायो जसोदा पुत तिहारो यह घर सदा कल्यान ll 3 ll<br />
छिरके लोग रंगीले दीसे हरदी पीत सुवास l<br />
‘मेहा’ आनंद पुंज सुमंगल यह व्रज सदा हुलास ll 4 ll</p>
<p><strong>साज &#8211;</strong> श्रीजी में आज लाल एवं पीले रंग की मलमल पर इकदानी चूंदड़ी की रुपहली ज़री के हांशिया (किनारी) से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है.गादी, तकिया के ऊपर मेघश्याम मखमल बिछावट की जाती है तथा स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> श्रीजी में आज लाल एवं पीले रंग की इकदानी चूंदड़ी का पिछोड़ा धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र हरे रंग के होते हैं.</p>
<p><strong>श्रृंगार –</strong> श्रीजी को आज छोटा (कमर तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. पन्ना के सर्वआभरण धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीमस्तक पर चुंदड़ी की छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच, लूम की किलंगी एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीकर्ण में कर्णफूल धराये जाते हैं.आज चार माला धरायी जाती हैं.पीले पुष्पों की दो मालाजी धरायी जाती है इसी प्रकार श्वेत पुष्पों की दो मालाजी हमेल की भांति भी धरायी जाती हैं.</p>
<p>श्रीहस्त में कमलछड़ी, हरे मीना के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.पट लाल एवं गोटी स्वर्ण की छोटी धराई जाती हैं.<br />
आरसी श्रृंगार में स्वर्ण की छोटी एवं राजभोग में सोने की डांडी की आती है.</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/भाद्रपद-कृष्ण पक्ष-तृतीया</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-31-aug-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 31 Aug 2026 01:14:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज – भाद्रपद कृष्ण पक्ष तृतीया Monday, 31 August 2026 हिंडोलना विजय के दिन, प्रथम हिंडोलना रोपण के दिन धराये गये साज दीवालगरी, वस्त्र, श्रृंगार आदि सभी वैसे ही धराये जाते हैं. श्रीजी को सुनहरी लप्पा से सुसज्जित लाल पिछोड़ा व श्रीमस्तक पर आसमानी बाहर की खिड़की वाली लाल छज्जेदार पाग [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज – भाद्रपद कृष्ण पक्ष तृतीया<br />
Monday, 31 August 2026</h6>
<p><strong>हिंडोलना विजय के दिन, प्रथम हिंडोलना रोपण के दिन धराये गये साज दीवालगरी, वस्त्र, श्रृंगार आदि सभी वैसे ही धराये जाते हैं.</strong><br />
श्रीजी को सुनहरी लप्पा से सुसज्जित लाल पिछोड़ा व श्रीमस्तक पर आसमानी बाहर की खिड़की वाली लाल छज्जेदार पाग पर सादी मोर-चन्द्रिका धरायी जाती है.</p>
<p>चांदी को शुभ माना जाता है अतः प्रथम हिंडोलने की भांति ही हिंडोलना विजय के दिन भी श्री मदनमोहनजी चांदी के हिंडोलने में झूलते हैं.</p>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : सारंग)</p>
<p>आज महा मंगल महराने ।<br />
पंच शब्द ध्वनि भीर वधाई घर घर बैरख बाने ।।१।।<br />
ग्वाल भरे कांवरि गोरसकी वधू सिंगारत वाने ।<br />
गोपी गोप परस्पर छिरकत दधि के माट ढुराने ।।२।।<br />
नामकरन जब कियो गर्ग मुनि नंद देत बहु दाने ।<br />
पावन जस गावति कटहरिया जाहि परमेश्वर माने ।।३।।</p>
<p><strong>साज –</strong> श्रीजी में आज साज लाल रंग की मलमल की सुनहरी लप्पा की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया के ऊपर लाल मखमल की बिछावट की जाती है तथा स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> श्रीजी को आज लाल रंग की मलमल का सुनहरी लप्पा से सुसज्जित पिछोड़ा धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र पीले रंग के होते हैं.</p>
<p><strong>श्रृंगार &#8211;</strong> आज प्रभु को हीरों का छेड़ान का श्रृंगार धराया जाता है.हीरे के सर्वआभरण धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीमस्तक पर आसमानी मलमल की सुनहरी बाहर की खिड़की वाली छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच, लूम, मोरपंख की सादी चन्द्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीकर्ण में हीरा के कर्णफूल धराये जाते हैं.मोतियों की माला के ऊपर चार पान घाट की जुगावली धराई जाती हैं.श्रीकंठ में त्रवल नहीं धराया जाता हैं. हीरे की बघ्घी धराई जाती हैं.पीले एवं श्वेत पुष्पों की रंग-बिरंगी थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.</p>
<p>श्रीहस्त में कमलछड़ी, सोने के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.पट लाल एवं गोटी छोटी स्वर्ण की छोटी धराई जाती हैं.</p>
<p>आरसी श्रृंगार में लाल मख़मल की एवं राजभोग में सोने की डांडी की आती है.</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/श्रावण-शुक्ल पक्ष-त्रयोदशी</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-26-aug-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 26 Aug 2026 04:05:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज &#8211; श्रावण शुक्ल पक्ष त्रयोदशी Wednesday, 26 August 2026 किंकोडा तेरस, चतुरा नागा के श्रृंगार आज किंकोड़ा तेरस है. आज के दिन व्रज में विराजित श्रीजी यवनों के उपद्रव का नाश कर पाड़े (भैंसे) के ऊपर बैठकर रामदासजी, कुम्भनदासजी आदि को साथ लेकर चतुरा नागा नाम के विरक्त योगी को [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज &#8211; श्रावण शुक्ल पक्ष त्रयोदशी<br />
Wednesday, 26 August 2026</h6>
<h6 style="text-align: center;">किंकोडा तेरस, चतुरा नागा के श्रृंगार</h6>
<p>आज किंकोड़ा तेरस है. आज के दिन व्रज में विराजित श्रीजी यवनों के उपद्रव का नाश कर पाड़े (भैंसे) के ऊपर बैठकर रामदासजी, कुम्भनदासजी आदि को साथ लेकर चतुरा नागा नाम के विरक्त योगी को दर्शन देने एवं उक्त पाड़े (भैंसे) का उद्धार करने टॉड का घना नाम के घने वन में पधारे थे.</p>
<p>चतुरा नागा श्रीजी के दर्शन को लालायित थे परन्तु वे श्री गिरिराजजी पर पैर नहीं रखते थे जिससे श्रीजी के दर्शन से विरक्त थे.</p>
<p>भक्तवत्सल प्रभु अत्यन्त दयालु हैं एवं अपने सभी भक्तों को मान देते हैं अतः वे स्वयं अपने भक्त को दर्शन देने पधारे.चतुरा नागा की अपार प्रसन्नता का कोई छोर नहीं था.</p>
<p>वर्षा ऋतु थी सो चतुरा नागा तुरंत वन से किंकोडा के फल तोड़ लाये और उसका शाक सिद्ध किया. रामदासजी साथ में सीरा (गेहूं के आटे का हलवा) सिद्ध कर के लाये थे सो श्रीजी को सीरा एवं किंकोडा का शाक भोग अरोगाया.</p>
<p>तब कुम्भनदासजी ने यह पद गाया –<br />
“भावत है तोहि टॉडको घनो ।<br />
कांटा लगे गोखरू टूटे फाट्यो है सब तन्यो ।।१।।<br />
सिंह कहां लोकड़ा को डर यह कहा बानक बन्यो ।<br />
‘कुम्भनदास’ तुम गोवर्धनधर वह कौन रांड ढेडनीको जन्यो ।।२।।</p>
<p>कुछ देर पश्चात समाचार आये कि यवन लश्कर फिर से बढ़ गया है जिससे तुरंत श्रीजी को पुनः मंदिर में पधराया गया.</p>
<p>आज भी राजस्थान में भरतपुर के समीप टॉड का घना नमक स्थान पर श्रीजी की चरणचौकी एवं बैठकजी है जो कि अत्यंत रमणीय स्थान है.</p>
<p>आज श्रीजी को मुकुट-काछनी का श्रृंगार धराया जाता है.</p>
<p>उपरोक्त प्रसंग की भावना से ही आज के दिन श्रीजी को गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में किंकोडा का शाक एवं सीरा (गेहूं के आटे का हलवा) अरोगाया जाता है.</p>
<p>अद्भुत बात यह है कि आज भी प्रभु को उसी लकड़ी की चौकी पर यह भोग रखे जाते हैं जिस पर सैंकड़ों वर्ष पूर्व चतुरा नागा ने प्रभु को अपनी भाव भावित सामग्री अरोगायी थी.</p>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : सारंग)</p>
<p>आज महा मंगल महराने l<br />
पंच शब्द ध्वनि भीर बधाई घर घर बेरखबाने ll 1 ll<br />
ग्वाल भरे कांवरि गोरस की वधु सिंगारत वाने l<br />
गोपी ग्वाल परस्पर छिरकत दधि के माट ढुराने ll 2 ll<br />
नाम करन जब कियो गर्गमुनि नंद देत बहु दाने l<br />
पावन जश गावति ‘कटहरिया’ जाही परमेश्वर माने ll 3 ll</p>
<p><strong>साज –</strong> चतुरा नागा के भाव चित्रांकन की सुन्दर पिछवाई आज श्रीजी में धरायी जाती है. गादी और तकिया के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है तथा स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है. पीठिका के ऊपर व इसी प्रकार से पिछवाई के ऊपर रेशम के रंग-बिरंगे पवित्रा धराये जाते हैं.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> श्रीजी को आज लाल-सफेद लहरिया का रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित सूथन, काछनी एवं पीताम्बर (रास-पटका) धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र श्वेत डोरिया के धराये जाते हैं.</p>
<p><strong>श्रृंगार &#8211;</strong> प्रभु को आज वनमाला (चरणारविन्द तक) का भारी श्रृंगार धराया जाता है.मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं. कली व कमल माला धरायी जाती है.आज चोटीजी नहीं धरायी जाती है.</p>
<p>श्रीमस्तक पर सिलमा-सितारा की टोपी व मुकुट एवं बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है.</p>
<p>श्रीकर्ण में मयूराकृति कुंडल धराये जाते हैं. रंग-बिरंगे पवित्रा मालाजी के रूप में धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीहस्त में कमलछड़ी, झीने लहरिया के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.पट लाल व गोटी मीना की आती है.</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/श्रावण-शुक्ल पक्ष-एकादशी (पुत्रदा एकादशी व्रत सोमवार द्वादशी को)</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-23-aug-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 23 Aug 2026 02:58:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज – श्रावण शुक्ल पक्ष एकादशी (पुत्रदा एकादशी व्रत सोमवार द्वादशी को) Sunday, 23 August 2026 पवित्रा एकादशी के आगम का श्रृंगार कल पवित्रा एकादशी का उत्सव है अतः आज श्रीजी को उत्सव के एक दिन पूर्व धराया जाने वाला आगम का हल्का श्रृंगार धराया जाता है. सामान्य तौर पर प्रत्येक [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज – श्रावण शुक्ल पक्ष एकादशी (पुत्रदा एकादशी व्रत सोमवार द्वादशी को)<br />
Sunday, 23 August 2026</h6>
<p style="text-align: center;"><strong>पवित्रा एकादशी के आगम का श्रृंगार</strong></p>
<p><strong>कल पवित्रा एकादशी का उत्सव है अतः आज श्रीजी को उत्सव के एक दिन पूर्व धराया जाने वाला आगम का हल्का श्रृंगार धराया जाता है.</strong></p>
<p>सामान्य तौर पर प्रत्येक बड़े उत्सव के एक दिन पूर्व लाल वस्त्र, पीले ठाड़े वस्त्र एवं पाग-चन्द्रिका का श्रृंगार धराया जाता है.</p>
<p>यह श्रृंगार अनुराग के भाव से धराया जाता है. इस श्रृंगार के लाल वस्त्र विविध ऋतुओं के उत्सवों के अनुरूप होते हैं अर्थात ऊष्णकाल में जब गहरे रंग वर्जित हों तब कुछ हल्के और शुभ रंग के गुलाबी वस्त्र धराये जाते हैं.</p>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : धनाश्री)</p>
<p>यशोदारानी जायो है सुत नीको l<br />
आनंदभयो सकल गोकुलमे गोपवधू लाई टीको ll 1 ll<br />
अक्षत दूब रोचन बंदन नंदे तिलक दही को l<br />
अंचल बारि बारि मुख निरखत कमल नैन प्यारो जीकौ ll 2 ll<br />
अपने अपने भवन से निकसी पहेरे चीर कसुम्भी को l<br />
&#8216;यादवेन्द्र&#8217; व्रजकुल प्रति पालक कंस काल भय भीकौ ll 3 ll</p>
<p><strong>साज –</strong> श्रीजी में आज लाल रंग की मलमल पर रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी के हांशिया से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी और तकिया के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है तथा स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> श्रीजी को आज लाल रंग की मलमल का सुनहरी किनारी का पिछोड़ा धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र पीले रंग के होते हैं.</p>
<p><strong>श्रृंगार –</strong> प्रभु को आज छोटा (कमर तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. पन्ना एवं सोने के सर्व आभरण धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीमस्तक पर लाल रंग की छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच, लूम, मोरपंख की सादी चन्द्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है.</p>
<p>श्रीकर्ण में पन्ना के कर्णफूल के दो जोड़ी धराये जाते हैं.आज कमल माला धरायी जाती हैं.श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.<br />
श्रीहस्त में कमलछड़ी, हरे मीना के वेणुजी एवं वेत्रजी (एक स्वर्ण का) धराये जाते हैं.पट लाल, गोटी छोटी सोने की व आरसी श्रृंगार में सोना की आती है.</p>
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/श्रावण-शुक्ल पक्ष-दशमी</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-22-aug-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 01:05:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 &#160; व्रज &#8211; श्रावण शुक्ल पक्ष दशमी Saturday, 22 August 2026 लाल पीली एकदानी चूंदड़ी का पिछोड़ा और श्रीमस्तक पर ग्वाल पगा पर पगा चन्द्रिका के श्रृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : धनाश्री) यशोदारानी जायो है सुत नीको l आनंदभयो सकल गोकुलमे गोपवधू लाई टीको ll 1 ll अक्षत [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<p>&nbsp;</p>
<h6>व्रज &#8211; श्रावण शुक्ल पक्ष दशमी<br />
Saturday, 22 August 2026</h6>
<p style="text-align: center;"><strong>लाल पीली एकदानी चूंदड़ी का पिछोड़ा और श्रीमस्तक पर ग्वाल पगा पर पगा चन्द्रिका के श्रृंगार</strong></p>
<p style="text-align: left;">
<strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : धनाश्री)</p>
<p>यशोदारानी जायो है सुत नीको l<br />
आनंदभयो सकल गोकुलमे गोपवधू लाई टीको ll 1 ll<br />
अक्षत दूब रोचन बंदन नंदे तिलक दही को l<br />
अंचल बारि बारि मुख निरखत कमल नैन प्यारो जीकौ ll 2 ll<br />
अपने अपने भवन से निकसी पहेरे चीर कसुम्भी को l<br />
&#8216;यादवेन्द्र&#8217; व्रजकुल प्रति पालक कंस काल भय भीकौ ll 3 ll</p>
<p><strong>साज &#8211;</strong> प्रभु को लाल पीली एकदानी चूंदड़ी की पिछवाई है. गादी और तकिया के ऊपर सफेद बिछावट की है तथा स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> आज प्रभु को लाल पीली एकदानी चूंदड़ी का पिछोड़ा धराया है. ठाड़े वस्त्र हरे रंग के धराये हैं.</p>
<p>श्रृंगार – आज श्रीजी को छेड़ान का (कमर तक) श्रृंगार धराया है.<br />
मोती के आभरण धराये हैं.<br />
श्रीमस्तक पर लाल पीली एकदानी चूंदड़ी के ग्वाल पगा के ऊपर पगा चन्द्रिका धरायी है.<br />
श्रीकर्ण में मोती के लोलकबिन्दी लड़ वाले कर्णफूल धराये हैं. कमल माला धरायी है.<br />
पुष्पों की सुन्दर थाग वाली दो सुन्दर मालाजी धरायी हैं.<br />
श्रीहस्त में कमलछड़ी, चांदी के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.<br />
पट लाल का गोटी बाघ बकरी की है.</p>
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