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	<title>Shri DP Enterprises</title>
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/</title>
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		<pubDate>Sat, 24 Oct 2026 02:44:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज &#8211; आश्विन शुक्ल पक्ष त्रयोदशी                      Saturday, 24 October 2026 रासपंचाध्यायी के आधार पर श्रीनाथजी को शरद पूर्णिमा रास महोत्सव के मुकुट के पांच अध्याय के वर्णित श्रृंगार धराये जाते हैं. आज रास का तीसरा मुकुट-काछनी का श्रृंगार धराया जायेगा. यह [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज &#8211; आश्विन शुक्ल पक्ष त्रयोदशी                      <span style="font-size: 16px;">S</span><span style="font-size: 16px;">aturday, 24 October 2026</span></h6>
<p>रासपंचाध्यायी के आधार पर श्रीनाथजी को शरद पूर्णिमा रास महोत्सव के मुकुट के पांच अध्याय के वर्णित श्रृंगार धराये जाते हैं. आज रास का तीसरा मुकुट-काछनी का श्रृंगार धराया जायेगा.</p>
<p>यह श्रृंगार आश्विन शुक्ल चतुर्दशी को धराया जाता है परन्तु इस साल शरद पूर्णिमा का उत्सव आश्विन शुक्ल चतुर्दशी को है इसलिए आज त्रयोदशी के दिन धराया जाएगा.</p>
<p>रास के भाव से आज, कल और परसों (तीनों दिन) मुकुट-काछनी का श्रृंगार धराया जाएगा.</p>
<p>आज महारास की सेवा का तृतीय अध्याय का मुकुट का श्रृंगार है जिसमें लाल ज़री के हांशिया वाली ज़री की काछनी, रास के चित्रांकन वाली पिछवाई धरायी जाती है. मुकुट धराया जाता है एवं श्री यमुनाजी के भाव से शयन में मंगला की भांति चूंदड़ी का उपरना धराया जाता है.</p>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : सारांग)</p>
<p>करत हरि नृत्य नवरंग राधा संग,<br />
लेत नवगति भेद, चरचरी तालके ।<br />
परस्पर दरस रसमत्त भये तत्त थेई थेई,<br />
गति लेत संगीत सुरसालके ॥ १ ॥<br />
फरहरत बर्हिवर थरहरत उपहार,<br />
भरहरत भ्रमर वर, विमल वनमालके ।<br />
खसित सित कुसुम शिर, हँसत कुंतल मानों,<br />
लसत कल झलमलत,स्वेद कण भालके ॥ २ ॥<br />
अंग अंगन लटक मटक भृंगन भ्रोंह,<br />
पटक पटताल कोमल चरण चालके ।<br />
चमक चल कुंडलन दमक दशनावली,<br />
विविध विद्युत भाव, लोचन विशालके ॥ ३ ॥<br />
बजत अनुसार द्रिम द्रिम मृदंग निनाद,<br />
झमक झंकार, कटि किंकिणि जालके ।<br />
तरल ताटक तड़ित, नील नव जलद में,<br />
यौं विराजत प्रिया, पास गोपालके ॥ ४ ॥<br />
युवति जन यूथ अगणित, बदन चंद्रमा,<br />
चंद्र भयौ मंद उद्योत तिहिं कालके ।<br />
मुदित अनुराग वश, राग रागिणी,<br />
तान गान गत गर्व, रंभादि सुर बालके ॥ ५ ॥<br />
गगनचर सघन रास मगन बरषत फूल,<br />
बार डारत रत्न जतन भर थालके ।<br />
एक रसना गदाधर न वर्णत बनै,<br />
चरित्र अद्भुत कुँवर गिरिधरन लालके ॥ ६ ॥</p>
<p><strong>साज</strong> –श्रीजी में आज रासलीला के चित्रांकन वाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया और चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है.</p>
<p><strong>वस्त्र</strong> – श्रीजी को आज लाल हाशियां का सफ़ेद ज़री का सूथन, काछनी एवं सफ़ेद मलमल का रास-पटका धराया जाता है.चोली स्याम सुतरु की धरायी जाती हैं. ठाड़े वस्त्र सफेद जामदानी (चिकन) के धराये जाते हैं.</p>
<p><strong>श्रृंगार</strong> – प्रभु को आज वनमाला (चरणारविन्द तक) का भारी श्रृंगार धराया जाता है.*मिलवा &#8211; हीरे एवं मोती* के सर्व आभरण धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीमस्तक पर डाख का मुकुट एवं बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है. शरद के दिनो में चोटी (शिखा) नहीं धरायी जाती है.</p>
<p>श्रीकर्ण में हीरा के मयूराकृति कुंडल धराये जाते हैं.*आज हास एवं त्रवल नहीं धराये जाते हैं.कली कस्तूरी एवं कमल माला धरायीं जाती हैं.हीरा की बग्घी एवं बग्घी की कंठी धरायी जाती हैं.श्वेत पुष्पों की कलात्मक थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती है.</p>
<p>श्रीहस्त में कमलछड़ी, चाँदी के वेणुजी दो वैत्रजी धराये जाते हैं. पट लाल गोटी मोर की आती हैं.</p>
<p>संध्या-आरती दर्शन उपरांत सारे वस्त्र, शृंगार ठाड़े वस्त्र पिछवाई बड़े कर के शयन के दर्शन में मंगला के दर्शन की भांति चुंदड़ी का उपरना एवं गोल पाग एवं हीरा मोती के छेड़ान के शृंगार धराये जाते हैं.</p>
<p>*श्रीमस्तक पर रुपहरी लूम-तुर्रा धराये जाते हैं.*</p>
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINAGR/आश्विन-शुक्ल पक्ष-द्वादशी</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shrinagr-23-oct-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 23 Oct 2026 01:23:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज –आश्विन शुक्ल पक्ष द्वादशी Friday, 23 October 2026 दीपावली के आगम के श्रृंगार आरम्भ (प्रथम कार्तिक कृष्ण दशमी का आगम का श्रृंगार) सभी बड़े उत्सवों के पहले उस श्रृंगार के आगम के श्रृंगार धराये जाते हैं. आगम का अर्थ उत्सव के आगमन के आभास से है कि प्रभु के उत्सव [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज –आश्विन शुक्ल पक्ष द्वादशी<br />
Friday, 23 October 2026</p>
<p><strong>दीपावली के आगम के श्रृंगार आरम्भ</strong></h6>
<p>(प्रथम कार्तिक कृष्ण दशमी का आगम का श्रृंगार)</p>
<p>सभी बड़े उत्सवों के पहले उस श्रृंगार के आगम के श्रृंगार धराये जाते हैं.<br />
आगम का अर्थ उत्सव के आगमन के आभास से है कि प्रभु के उत्सव की अनुभूति मन में जागृत हो जाए कि उत्सव आने वाला है और हम उसकी तैयारी आरंभ कर दें.</p>
<p>आज से दीपावली के उत्सव के आगम के श्रृंगार आरम्भ होते हैं.<br />
इसी श्रृंखला में पहला आगम का श्रृंगार कार्तिक कृष्ण दशमी का आज श्रीजी को धराया जाता है सफ़ेद कारचोव (सफ़ेद सुतरु वस्त्र पे सोना के तार की बुटी) से सुसज्जित साज, चिरा (ज़री की छज्जेदार पाग) एवं वस्त्र धराये जाते हैं और कर्णफूल का हल्का श्रृंगार धराया जाता है.</p>
<p>लगभग यही वस्त्र व श्रृंगार दीपावली के पूर्व की दशमी को भी धराये जायेंगे.</p>
<p>इस श्रृंगार को धराये जाने का अलौकिक भाव भी जान लें.</p>
<p>आज से अन्नकूट तक अष्टसखियों के भाव से आठ विशिष्ट श्रृंगार धराये जाते हैं. जिस सखी का श्रृंगार हो उनकी अंतरंग सखी की ओर से ये श्रृंगार धराया जाता है. आज का श्रृंगार विशाखाजी का है और उनकी प्रिय सखी आच्छादिकाजी की ओर से किया जाता है.</p>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : सारंग)</p>
<p>नागरी नागरसो मिल गावत रासमें सारंग राग जम्यो l<br />
तान बंधान तीन मूर्छना देखत वैभव काम कम्यौ ll 1 ll<br />
अद्भुत अवधि कहां लगी वरनौ मोहन मूरति वदन रम्यो l<br />
भजि ‘कृष्णदास’ थक्ति नभ उडुपति गिरिधर कौतुक दर्प दम्यो ll 2 ll</p>
<p><strong>साज</strong> – श्रीजी में आज सफ़ेद कारचोव (सफ़ेद सुतरु वस्त्र पे सोना के तार की बुटी) रंग की मलमल की पिछवाई धरी जाती है ,गादी, तकिया और चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है.</p>
<p><strong>वस्त्र</strong> – श्रीजी को आज सफ़ेद कारचोव (सफ़ेद सुतरु वस्त्र पे सोना के तार की बुटी) के दोहरी (रुपहली और सुनहरी) ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित सूथन, चोली एवं घेरदार वागा धराये जाते हैं. पटका मलमल का धराया जाता हैं. ठाड़े वस्त्र गहरे लाल रंग के दरियाई के धराये जाते हैं.</p>
<p><strong>श्रृंगार</strong> – श्रीजी को आज छोटा (कमर तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. पन्ना के सर्व आभरण धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीमस्तक पर रुपहली ज़री के चिरा (छज्जेदार पाग) के ऊपर सिरपैंच, लूम की सुनहरी किलंगी एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में पन्ना के कर्णफूल धराये जाते हैं.<br />
आज चार मालाजी धराई जाती हैं.<br />
श्वेत एवं पीले पुष्पों की विविध रंगों की थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.<br />
श्रीहस्त में कमलछड़ी, हरे मीना के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.<br />
पट श्वेत गोटी छोटी सोने की आती हैं.<br />
आरसी शृंगार में सोने की छोटी एवं राजभोग में बटदार दिखाई जाती हैं.</p>
<p>🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼</p>
<p>अनोसर में चिरा (छज्जेदार पाग) बड़ी करके गोल पाग धराई जाती हैं.</p>
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINHAR/आश्विन-शुक्ल पक्ष-दशमी</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shrinhar-21-oct-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Oct 2026 01:29:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज – आश्विन शुक्ल पक्ष दशमी Wednesday, 21 October 2026 &#160; दशहरे के परचारगी श्रृंगार, श्रीगुसाँईजी के ज्येष्ठ पुत्र श्री गिरधरजी के प्रथम लालजी श्रीमुरलीजी का उत्सव राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : नट बिलावल) आन और आन कहत भेचक रहत व्रजनारी नर l कटु तिकत आम्ल मधुर खारे सलोने [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज – आश्विन शुक्ल पक्ष दशमी<br />
Wednesday, 21 October 2026</h6>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>दशहरे के परचारगी श्रृंगार, श्रीगुसाँईजी के ज्येष्ठ पुत्र श्री गिरधरजी के प्रथम लालजी श्रीमुरलीजी का उत्सव</strong></p>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : नट बिलावल)</p>
<p>आन और आन कहत भेचक रहत व्रजनारी नर l<br />
कटु तिकत आम्ल मधुर खारे सलोने प्रकार खटरसको प्रीतसों आरोगत सुन्दरवर ll 1 ll<br />
गिरिराज बरन बरन शिला जु सहस्त्रन मोदक ठोर ठोर बेसन गुंजा बाबरन l<br />
‘राजाराम’के प्रभु को अचवावन कारन इन्द्र झारी भर लायो जलधर ll 2 ll</p>
<p><strong>साज</strong> – आज श्रीजी में हरे रंग के आधार वस्त्र पर पुष्प-पत्रों की लता के सुरमा-सितारा के कशीदे के ज़रदोज़ी के भरतकाम वाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया और चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है.</p>
<p><strong>वस्त्र</strong> – श्रीजी को आज रुपहली ज़री का सूथन, चोली एवं घेरदार वागा धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र गहरे हरे दरियाई के धराये जाते हैं. पटका सुनहरी ज़री का धराया जाता है.</p>
<p><strong>श्रृंगार</strong> – आज प्रभु को वनमाला का (चरणारविन्द तक) भारी श्रृंगार धराया जाता है. माणक की प्रधानता एवं जड़ाव सोने के आभरण धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर चीरा (रुपहली ज़री की पाग) के ऊपर माणक का पट्टीदार सिरपैंच, लूम, पन्ना की सीधी चन्द्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.</p>
<p>स्वर्ण का जड़ाव का चौखटा पीठिका के ऊपर धराया जाता है.<br />
कली, कस्तूरी वल्लभी आदि माला धरायी जाती हैं.श्रीकर्ण में चार कर्णफूल धराये जाते हैं. गुलाब एवं श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती है.श्रीहस्त में कमलछड़ी, माणक के वेणुजी एवं वेत्रजी (एक हीरा का) धराये जाते हैं.</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/व्रज –आश्विन पक्ष शुक्ल नवमी</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-20-oct-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 20 Oct 2026 00:32:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज –आश्विन पक्ष शुक्ल नवमी Tuesday, 20 October 2026 विजयदशमी (दशहरा) आज की पोस्ट आज के विजयदशमी पर्व की अद्भुत विलक्षणता को समाहित करते हुए कुछ लम्बी परन्तु बहुत सुन्दर व अर्थपूर्ण है. समय देकर पूरी अवश्य पढ़ें आज असत्य पर सत्य की विजय का पर्व विजयदशमी (दशहरा) है. आज से [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज –आश्विन पक्ष शुक्ल नवमी<br />
Tuesday, 20 October 2026</h6>
<p style="text-align: left;"><strong>विजयदशमी (दशहरा)</strong></p>
<p>आज की पोस्ट आज के विजयदशमी पर्व की अद्भुत विलक्षणता को समाहित करते हुए कुछ लम्बी परन्तु बहुत सुन्दर व अर्थपूर्ण है. समय देकर पूरी अवश्य पढ़ें</p>
<p>आज असत्य पर सत्य की विजय का पर्व विजयदशमी (दशहरा) है.</p>
<p>आज से ही प्रतिदिन खिड़क से गौमाता पधारें इस भाव से प्रभु के सम्मुख काष्ट (लकड़ी) की गाय पधरायी जाती है.</p>
<p>हल्की ठण्ड आरम्भ हो गयी है अतः आज से मंगला समय प्रभु स्वरुप की पीठिका पर दत्तु ओढाया जाता है.</p>
<p>आज से तीन माह पूर्व आषाढ़ शुक्ल एकादशी को तुलसी के बीज बोये जाते हैं एवं उनकी अभिवृद्धि और रक्षा हेतु प्रयत्न किये जाते हैं. कन्यावत उनका पालन कर कार्तिक शुक्ल एकादशी को उनका विवाह प्रभु के साथ किया जाता है.<br />
इससे श्रीजी में यह परंपरा है कि आज से एक माह तक समस्त पुष्टि-सृष्टि के वैष्णवों की ओर से सभी जीवों के कृतार्थ हेतु मंगला दर्शन उपरांत श्रीजी के श्रीचरणों में प्रतिदिन सवा लाख (1,25,000) तुलसी दल (पत्र) समर्पित किये जाते हैं.</p>
<p>मंगला दर्शन पश्चात प्रभु को केसर युक्त चन्दन, आवंला, एवं फुलेल (सुगन्धित तेल) से अभ्यंग (स्नान) कराया जाता है.</p>
<p>आज से प्रभु को ज़री के वागा धराये जाने आरम्भ हो जाते हैं जो कि बसंत पंचमी से एक दिन पूर्व तक धराये जायेंगे. ठाडे वस्त्र भी दरियाई के आरम्भ हो जाते हैं.</p>
<p>ज़री के वस्त्र प्रभु के श्रीअंग पर चुभें नहीं इस भाव से आज से प्रतिदिन प्रभु को सामान्य वस्त्रों के भीतर आत्मसुख के वागा धराये जाते हैं.<br />
आत्मसुख के वागा विजयदशमी से कार्तिक शुक्ल दशमी तक (मलमल के) व कार्तिक शुक्ल (देवप्रबोधिनी) एकादशी से डोलोत्सव तक (शीत वृद्धि के अनुसार रुई के) धराये जाते हैं.</p>
<p>आज के दिन सुदर्शनजी की सभी सात ध्वजाएं स्वर्ण की ज़री की चढ़ाई जाती है.</p>
<p>आज निर्गुण भक्तों के भाव की सेवा है अतः श्रीजी को नियम के रुपहली ज़री के श्वेत घेरदार वागा धराये जाते हैं और श्रीमस्तक पर रुपहली ज़री की पाग पर मोरपंख की सादी चंद्रिका धरायी जाती है.<br />
आज श्रृंगार में विशेष यह है कि आज प्रभु के दायें श्रीहस्त में प्राचीन पन्ना की जडाऊ कटार धरायी जाती है.</p>
<p>गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में विशेष रूप से मनोर (जलेबी-इलायची) के लड्डू और विशेष रूप से दूधघर में सिद्ध की गयी केसर युक्त बासोंदी की हांडी अरोगायी जाती है.</p>
<p>राजभोग में अनसखड़ी में दाख (किशमिश) का रायता अरोगाया जाता है.<br />
सखड़ी में केसरयुक्त पेठा व मीठी सेव अरोगायी जाती है. आज से राजभोग समय अरोगाये जाने वाले फीका, थपडी के स्थान पर तले जमीकंद (सूरण, अरबी, रतालू व शकरकन्द) अरोगाये जाते हैं.</p>
<p>शक्तिरूपेण भाव से राजभोग समय प्राचीन मगर की खाल से बनी ढाल (जिसमें स्वर्ण का अद्भुत काम किया हुआ है) को तबकड़ी पर प्रभु के सम्मुख रखा जाता है एवं राजभोग पश्चात हटा लिया जाता है.</p>
<p>इसी भाव से एक दिवस पूर्व संध्या काल में प्रभु के स्वरुप के पीछे एक लकड़ी के लम्बे संदूक में विभिन्न आकारों की ढालें, तलवारें, अद्भुत काम से सुसज्जित कटारें, धनुष-बाण, चाकू आदि विभिन्न अस्त्र-शस्त्र रखे जाते हैं जिन्हें दशहरा के दिन संध्या-आरती दर्शन के उपरांत हटा लिया जाता है.</p>
<p>तृतीय गृह प्रभु श्री द्वारकाधीशजी आदि कुछ पुष्टि स्वरूपों में नवरात्रि के अंतिम दिनों में अस्त्र, शस्त्र प्रभु के सम्मुख रखे जाते हैं.</p>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : नट बिलावल)</p>
<p>आन और आन कहत भेचक रहत व्रजनारी नर l<br />
कटु तिकत आम्ल मधुर खारे सलोने प्रकार खटरसको प्रीतसों आरोगत सुन्दरवर ll 1 ll<br />
गिरिराज बरन बरन शिला जु सहस्त्रन मोदक ठोर ठोर बेसन गुंजा बाबरन l<br />
‘राजाराम’के प्रभु को अचवावन कारन इन्द्र झारी भर लायो जलधर ll 2 ll</p>
<p><strong>साज</strong> – आज श्रीजी में हरे रंग के आधार वस्त्र पर पुष्प-पत्रों की लता के सुरमा-सितारा के कशीदे के ज़रदोज़ी के भरतकाम वाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया और चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है.</p>
<p><strong>वस्त्र</strong> – श्रीजी को आज रुपहली ज़री का सूथन, चोली एवं घेरदार वागा धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र गहरे हरे दरियाई के धराये जाते हैं. पटका सुनहरी ज़री का धराया जाता है.</p>
<p><strong>श्रृंगार</strong> – आज प्रभु को वनमाला का (चरणारविन्द तक) भारी श्रृंगार धराया जाता है. माणक की प्रधानता एवं जड़ाव सोने के आभरण धराये जाते हैं.<br />
श्रीमस्तक पर चीरा (रुपहली ज़री की पाग) के ऊपर माणक का पट्टीदार सिरपैंच, लूम, मोरपंख की सादी चन्द्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.<br />
किलंगी नवरत्न की धराई जाती हैं.<br />
स्वर्ण का जड़ाव का चौखटा पीठिका के ऊपर धराया जाता है.<br />
कली, कस्तूरी वल्लभी आदि माला धरायी जाती हैं.<br />
श्रीकर्ण में चार कर्णफूल धराये जाते हैं. गुलाब एवं श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती है.<br />
श्रीहस्त में कमलछड़ी, माणक के वेणुजी एवं वेत्रजी (एक हीरा का) धराये जाते हैं.<br />
दायें श्रीहस्त में ही आज विशेष रूप से पन्ने की कटार (श्री मुरलीधरजी वाली) धरायी जाती है.<br />
पट रुपहली ज़री का व गोटी चांदी की आती है.<br />
आरसी शृंगार में चार झाड़ की एवं राजभोग में सोना की दिखाई जाती है.</p>
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/आश्विन-शुक्ल पक्ष-सप्तमी (द्वितीय)</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-18-oct-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 18 Oct 2026 01:35:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज &#8211; आश्विन शुक्ल पक्ष सप्तमी (द्वितीय)  Sunday, 18 October 2026 सातौ विलास कियौ श्यामाजू, गह्वर वनमें मतौजू कीन । मुख्य कृष्णावती सहचरी, लघु लाघव अति ही प्रवीन ।। १ ।। बनदेवी हे गुंजा कुंजा, पुहुपन गुही सुमाल । चंद्रावली प्रमुदित बिहसत मुख, मुख ज्यों मुनिया लाल ।। २ ।। रच्यौ [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h4 style="text-align: left;"><span style="font-size: 16px; text-align: left;">व्रज &#8211; आश्विन शुक्ल पक्ष सप्तमी (द्वितीय) </span></h4>
<h4 style="text-align: left;"><span style="font-size: 16px; text-align: left;">Sunday, 18 October 2026</span></h4>
<p>सातौ विलास कियौ श्यामाजू, गह्वर वनमें मतौजू कीन ।<br />
मुख्य कृष्णावती सहचरी, लघु लाघव अति ही प्रवीन ।। १ ।।<br />
बनदेवी हे गुंजा कुंजा, पुहुपन गुही सुमाल ।<br />
चंद्रावली प्रमुदित बिहसत मुख, मुख ज्यों मुनिया लाल ।। २ ।।<br />
रच्यौ खेल देवी ढिंग युवती, कोक कला मनोज ।<br />
अति आवेश भये अवलोकत, प्रगटे मदन सरोज ।। ३ ।।<br />
कोऊ भुजधर कर चरन उर कोऊ, अंग अंग मिलाय ।<br />
कुंवर किशोरकिशोरी रसिकमणि, दास रसिक दुलराय ।। ४ ।।</p>
<p><strong>विशेष</strong> – आज नवविलास के अंतर्गत सप्तम विलास का लीला स्थल गहवर वन है. आज के मनोरथ की मुख्य सखी कृष्णावतीजी हैं और सामग्री वड़ी एवं बूंदी है.<br />
यह सामग्री श्रीजी में नहीं अरोगायी जाती है परन्तु कई पुष्टिमार्गीय मंदिरों में सेव्य स्वरूपों को अरोगायी जाती है.</p>
<p><strong>आगम के श्रृंगार</strong></p>
<p>इस वर्ष आश्विन शुक्ल नवमी (शनिवार, 12 अक्टूबर 2024) के दिन विजय दशमी (दशहरा) का पर्व है और अष्टमी (शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2024) के दिन नियम का मुकुट काछनी का श्रृंगार धराया जाता है अतः उत्सव पूर्व धराया जाने वाला आगम का श्रृंगार आज सप्तमी के दिन धराया जाएगा.</p>
<p>सामान्य तौर पर प्रत्येक बड़े उत्सव के पूर्व लाल वस्त्र, पीले ठाड़े वस्त्र एवं पाग पर सादी चन्द्रिका का श्रृंगार धराया जाता है.<br />
यह श्रृंगार प्रभु को अनुराग के भाव से धराया जाता है.</p>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : सारंग)</p>
<p>बैठे हरि राधासंग कुंजभवन अपने रंग<br />
कर मुरली अधर धरे सारंग मुख गाई ll<br />
मोहन अतिही सुजान परम चतुर गुननिधान<br />
जान बुझ एक तान चूक के बजाई ll 1 ll<br />
प्यारी जब गह्यो बीन सकल कला गुनप्रवीन<br />
अति नवीन रूपसहित वही तान सुनाई ll<br />
वल्लभ गिरिधरनलाल रिझ दई अंकमाल<br />
कहत भलें भलें लाल सुन्दर सुखदाई ll 2 ll</p>
<p><strong>साज</strong> – आज श्रीजी में लाल रंग के छापा वाली सुनहरी ज़री की तुईलैस की किनारी और हांशिया से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद रंग की बिछावट की जाती है.</p>
<p><strong>वस्त्र</strong> – आज श्रीजी को लाल रंग के छापा के सुनहरी एवं रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित सूथन, चोली एवं खुलेबंद के चाकदार वागा धराये जाते हैं. ठाड़े वस्त्र पीले रंग के धराये जाते हैं.</p>
<p><strong>श्रृंगारa</strong> – आज प्रभु को मध्य का (घुटने तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है.<br />
पन्ना तथा जड़ाव स्वर्ण के आभरण धराये जाते हैं.<br />
श्रीमस्तक पर लाल रंग की छापा की छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच, मोरपंख की सादी चन्द्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में पन्ना के कर्णफूल की एक जोड़ी धरायी जाती हैं.<br />
आज चार माला पन्ना की धराई जाती हैं.<br />
विविध पुष्पों की एक एवं दूसरी गुलाब के पुष्पों की सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.<br />
श्रीहस्त में कमलछड़ी, हरे मीना के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.<br />
पट लाल व गोटी छोटी सोना की आती है.<br />
आरसी शृंगार में सोना की डाँडी की दिखाई जाती है.</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/आश्विन-शुक्ल पक्ष-सप्तमी (प्रथम)</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-17-oct-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 17 Oct 2026 01:13:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज &#8211; आश्विन शुक्ल पक्ष सप्तमी (प्रथम) Saturday, 17 October 2026 अमरसी धोती पटका पर स्वेत छापा के खुले बन्ध एवं श्रीमस्तक पर अमरसी गोल पाग पर गोल चंद्रिका के श्रृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : सारंग) बैठे हरि राधा संग कुंजभवन अपने रंग कर मुरली अधर धरे सारंग [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज &#8211; आश्विन शुक्ल पक्ष सप्तमी (प्रथम)<br />
Saturday, 17 October 2026</h6>
<p>अमरसी धोती पटका पर स्वेत छापा के खुले बन्ध एवं श्रीमस्तक पर अमरसी गोल पाग पर गोल चंद्रिका के श्रृंगार</p>
<p><strong><span style="font-size: 16px;">रा</span></strong><span style="font-size: 16px;"><strong>जभोग दर्शन</strong> –</span></p>
<p>कीर्तन – (राग : सारंग)</p>
<p>बैठे हरि राधा संग कुंजभवन अपने रंग<br />
कर मुरली अधर धरे सारंग मुख गाई l<br />
मोहन अति ही सुजान परम चतुर गुन निधान<br />
जान बुझ एक तान चूकके बजाई ll 1 ll<br />
प्यारी जब गह्यो बीन सकल कला गुन प्रवीन<br />
अति नवीन रूप सहित, वही तान सूनाई ll 2 ll<br />
‘वल्लभ’ गिरिधरन लाल रिझ दई अंकमाल<br />
कहत भले भले जु लाल सुंदर सुखदाई ll 3 ll</p>
<p><strong>साज</strong> – श्रीजी को आज श्वेत छापा की रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित हांशिया वाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया और चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है.</p>
<p><strong>वस्त्र</strong> – आज श्रीजी को अमरसी रंग की धोती पर स्वेत छापा के खुलेबंद के चाकदार वागा धराये जाते है.<br />
सभी वस्त्र रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होते हैं. ठाड़े वस्त्र लाल रंग के धराये जाते हैं.</p>
<p><strong>श्रृंगार</strong> – प्रभु को आज छेड़ान का (घुटने तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. माणक के सर्व आभरण धराये जाते हैं.<br />
श्रीमस्तक पर अमरसी रंग की गोल पाग के ऊपर सिरपैंच, गोल चंद्रिका व लूम और तुर्री सुनहरी जरी की एवं बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है. श्रीकर्ण में कर्णफूल के एक जोड़ी धराये जाते हैं.<br />
श्वेत रंग के पुष्पों की रंग-बिरंगी थागवाली दो सुन्दर मालाजी एवं कमल माला धरायी जाती है.<br />
श्रीहस्त में कमलछड़ी, हरे मीना के वेणुजी और वेत्रजी धराये जाते हैं.<br />
पट सफ़ेद व गोटी मीना की आती है.</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>SHREEJI DARAHAN &#038; SHRINGAR/आश्विन-शुक्ल पक्ष-षष्ठी</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darahan-shringar-16-oct-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 16 Oct 2026 01:16:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज –आश्विन शुक्ल पक्ष षष्ठी Friday, 16 October 2026 छठो विलास कियो श्यामा जु गौधन वन चली भामा जु । पहेरे रंग रंग सारी हाथन पूजन थारी । ताकी मुख्य सहचरी राई खेलनमें बहुत सुधराई ।।१।। चली बन बन बिहसी सुंदरी हार कंकन जगमगे । आई मंदिर पूजन देवी भोग सिखरन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;"><strong>जय श्री कृष्ण 🙏</strong></h4>
<h6 style="text-align: left;">व्रज –आश्विन शुक्ल पक्ष षष्ठी<br />
Friday, 16 October 2026</h6>
<p>छठो विलास कियो श्यामा जु<br />
गौधन वन चली भामा जु ।<br />
पहेरे रंग रंग सारी हाथन पूजन थारी ।<br />
ताकी मुख्य सहचरी राई खेलनमें बहुत सुधराई ।।१।।<br />
चली बन बन बिहसी सुंदरी हार कंकन जगमगे ।<br />
आई मंदिर पूजन देवी भोग सिखरन सगमगे ।।२।।<br />
ता समे प्रभु पधारे कोटि मन्मथ मोहे ही ।<br />
निरखी सखियन कमल मुख मानो निर्धन धन जो सोहे ।।३।।<br />
खेलको आरंभ कीनो राधा माधो बीच किये ।<br />
वाकी परछाई परी तब रसिक चरनन चित दिये ।।४।।</p>
<p><strong>विशेष</strong> &#8211; आज छठे विलास का लीला स्थल गोवर्धन वन है. आज के मनोरथ की मुख्य सखी राईजी हैं और सामग्री मोहनथाल एवं दूधपूवा है यद्यपि यह सामग्री श्रीजी में नहीं अरोगायी जाती है परन्तु कई पुष्टिमार्गीय मंदिरों में सेव्य स्वरूपों को अरोगायी जाती है.</p>
<p>आज नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री गोवर्धनलालजी महाराजश्री के बहूजी का उत्सव है जिसे राणीजी का उत्सव भी कहा जाता हैं.</p>
<p>श्रीजी को आज गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में विशेष रूप से सिकोरी (मूंगदाल, मावे, इलायची के मीठे मसाले से निर्मित पूरणपूड़ी जैसी सामग्री) अरोगायी जाती है.<br />
आज श्रीजी को सखड़ी में पत्तरवेला प्रकार आरोगाया जाता हैं.</p>
<p>श्रीजी में सभी देवों को मान दिया जाता है और महाप्रभुजी ने भी भगवान विष्णु के दस अवतारों में से चार (श्रीकृष्ण, श्रीराम, श्रीवामन एवं श्रीनृसिंह) को मान्यता दी है.<br />
इसी सन्दर्भ में आज श्रीजी में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचन्द्रजी को मान देती आज श्री रामचंद्रजी के जीवन चरित्र का दर्शन कराती पिछवाई धरायी जाती है.<br />
इसी प्रकार रामभक्त हनुमान जी के गुणगान एवं अन्य रामभक्त जानकीजी को खोज रहे हैं ऐसी लीला के कीर्तन संध्या-आरती में मारू राग में गाये जाते हैं.</p>
<p>पायं तो पूजि चले रघुनाथ<br />
हनुमान आदि ले बडरे योद्धा लीने साथ।।<br />
से तू बांधि के लंका लूटी, रावण के काटे माथ।<br />
कृष्ण दास सीता घर लाये, विभीषण कियो सनाथ।।</p>
<p>आज प्रभु श्री रामचन्द्रजी के पराक्रम की भावना को दर्शाता मल्लकाछ-टिपारा का श्रृंगार धराया जाता है.<br />
इस श्रृंगार के विषय में मैं पहले भी कई बार बता चुका हूँ कि मल्लकाछ शब्द दो शब्दों (मल्ल एवं कच्छ) के मेल से बना है. ये एक विशेष परिधान है जो आम तौर पर पहलवान मल्ल (कुश्ती) के समय पहना करते हैं. यह श्रृंगार पराक्रमी प्रभु को वीर-रस की भावना से धराया जाता है.</p>
<p>आज के इस श्रृंगार की विशेषता यह है कि वर्षभर में केवल आज मल्लकाछ के ऊपर चाकदार वागा धराये जाते हैं जो कि विशिष्ट वीर-रस का धोतक है.</p>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन (राग : सारंग)</p>
<p>वृन्दावन सघनकुंज माधुरी लतान तर जमुना पुलिनमे मधुर बाजे बांसुरी l<br />
जबते धुनि सुनी कान मानो लागे मैंनबान, प्राननकी कासौ कहू पीर होत पांसुरी ll 1 ll<br />
व्याप्यो जु अनंग ताते अंग सुधि भूल गई कौऊ वंदो कोऊ निंदो करौ उपहासरी l<br />
ऐसे ‘व्रजाधीश’सों प्रीति नई रीति बाढ़ी जाके उर गढ़ रही प्रेम पुंज गांसरी ll 2 ll</p>
<p><strong>साज</strong> – आज श्रीजी में प्रभु श्री रामचंद्रजी के जन्म से रावण वध एवं उनके राज्याभिषेक तक के विविध प्रसंगों को दर्शाते चित्रांकन वाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया और चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है.</p>
<p><strong>वस्त्र</strong> – श्रीजी को आज लाल रंग के सुनहरी ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित मल्लकाछ एवं इसी प्रकार गुलाबी रंग के छापा का, रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित चोली एवं चड़ी आस्तीन का खुलेबंध का चाकदार वागा धराया जाता है. आज पटका लाल रंग का एक ही धराया जाता हैं. ठाड़े वस्त्र मेघश्याम रंग के धराये जाते हैं.</p>
<p><strong>श्रृंगार</strong> – आज प्रभु को मध्य का (घुटने तक) भारी श्रृंगार धराया जाता है. हीरा के सर्व आभरण धराये जाते हैं.<br />
श्रीमस्तक पर टिपारा का साज धराया जाता है जिसमें लाल रंग के छापा की टिपारा की टोपी के ऊपर सिरपैंच, मध्य में मोरशिखा, दोनों ओर दोहरा कतरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. बायीं ओर मोती की चोटी (शिखा) धरायी जाती है. श्रीकर्ण में हीरा के कुंडल धराये जाते हैं.<br />
आज चड़ी आस्तीन का बागा धराने से हीरा की एक ही गोल पहुची धराई धराई जाती हैं.<br />
श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती है.<br />
श्रीहस्त में कमलछड़ी, लहरिया के वेणुजी और दो वेत्रजी धराये जाते हैं.<br />
पट गुलाबी व गोटी बाघ-बकरी की आती है.</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>SHREEJI DARAHAN &#038; SHRINGAR/आश्विन शुक्ल पक्ष पंचमी</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darahan-shringar-15-oct-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 15 Oct 2026 01:12:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज – आश्विन शुक्ल पक्ष पंचमी Thursday, 15 October 2026 पाँचो विलास कियौ शयामाजू, कदली वन संकेत । ताकी मुख्य सखी संजावलि, पिया मिलनके हेत ।।१।। चली रली उमगी युवती सब, पूजन देवी निकसीं । धूप,दीप,भोग,संजावलि, कमल कली सों विकसीं ।।२।। आनँद भर नाचत गाबत, वधू रस में रस उपजाती । [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<blockquote>
<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<p style="text-align: left;">
<h6>व्रज – आश्विन शुक्ल पक्ष पंचमी<br />
Thursday, 15 October 2026</h6>
<p>पाँचो विलास कियौ शयामाजू,<br />
कदली वन संकेत ।<br />
ताकी मुख्य सखी संजावलि,<br />
पिया मिलनके हेत ।।१।।<br />
चली रली उमगी युवती सब,<br />
पूजन देवी निकसीं ।<br />
धूप,दीप,भोग,संजावलि,<br />
कमल कली सों विकसीं ।।२।।<br />
आनँद भर नाचत गाबत,<br />
वधू रस में रस उपजाती ।<br />
मंडलमें हरी ततच्छि आये,<br />
हिल मिल भये एकपाँती ।।३।।<br />
द्वै युग जाम श्यामश्या<br />
संग भाभिनी यह रस पीनौ ।<br />
उनकी कृपा द्रष्टि अवलोकत,<br />
रसिक दास रस भीनौ ।।४।।</p>
<p>विशेष &#8211; आज पंचम विलास का लीला स्थल कदलीवन है. आज के मनोरथ की मुख्य सखी संजावलीजी हैं और सामग्री मनोहर (इलायची-जलेबी) के लड्डू और दूधपूआ है.</p>
<p>मनोर के लड्डू श्रीजी में नहीं अरोगाये जाते परन्तु कई पुष्टिमार्गीय मंदिरों में सेव्य स्वरूपों को दोनों सामग्रियां अरोगायी जाती है.</p>
<p>श्रीजी को आज गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में विशेष रूप से दूधपूआ (दूध में मेदे के घोल से सिद्ध मालपूए जैसी सामग्री) आरोगाए जाते हे</p>
<p>राजभोग दर्शन –</p>
<p>कीर्तन – (राग : सारंग)</p>
<p>कहा कहो लाल सुघर रंग राख्यो मुरलीमें l<br />
तान बंधान स्वर भेदलेत अतिजित<br />
बिचबिच मिलवत विकट अवधर ll 1 ll<br />
चोख माखनीकी रेख तामे गायन मिलवत लांबे लांबे स्वर l<br />
बिच बिच लेत तिहारो नाम सुनरी सयानी,<br />
‘गोविंदप्रभु’ व्रजरानी के कुंवर ll 2 ll</p>
<p>साज – आज श्रीजी में श्याम रंग के छापा की, चाँद-सितारे और सूर्य की छापवाली, सुनहरी ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है जिसमें पीठिका के आसपास पुष्प-पत्रों का हांशिया बना है. गादी, तकिया और चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है.</p>
<p>वस्त्र – श्रीजी को आज श्याम रंग के छापा का सूथन, श्याम छापा के वस्त्र की चोली एवं खुलेबंद का चाकदार वागा धराये जाते हैं जो कि सफेद ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होते हैं. ठाड़े वस्त्र गुलाबी रंग के धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रृंगार – श्रीजी को आज छोटा (छेड़ान) का हल्का श्रृंगार धराया जाता है. सोने के सर्व आभरण धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीमस्तक पर लाल रंग का छापा वाला ग्वालपगा के ऊपर सिरपैंच, पगा चंद्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.<br />
श्रीकर्ण में सोना की लोलकबिन्दी धराये जाते हैं.<br />
कमल माला धरायी जाती हैं.<br />
श्वेत पुष्पों की विविध रंगों वाले पुष्पों की थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती है.<br />
श्रीहस्त में कमलछड़ी, सोने के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.<br />
पट श्याम व गोटी बाघ-बकरी की आती है.</p></blockquote>
]]></content:encoded>
					
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/अश्विन-कृष्ण पक्ष-तृतीया</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-29-sep-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Sep 2026 01:34:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज &#8211; अश्विन कृष्ण पक्ष तृतीया Tuesday, 29 September 2026 लाल पीली एकदानी चूंदड़ी का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर क़तरा के श्रृंगार राजभोग दर्शन &#8211; कीर्तन – (राग : सारंग) ग्वालिनी मीठी तेरी छाछि l कहा दूध में मेलि जमायो साँची कहै किन वांछि ll 1 ll और [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज &#8211; अश्विन कृष्ण पक्ष तृतीया<br />
Tuesday, 29 September 2026</h6>
<p style="text-align: center;"><strong>लाल पीली एकदानी चूंदड़ी का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर क़तरा के श्रृंगार</strong></p>
<p><strong>राजभोग दर्शन &#8211;</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : सारंग)</p>
<p>ग्वालिनी मीठी तेरी छाछि l<br />
कहा दूध में मेलि जमायो साँची कहै किन वांछि ll 1 ll<br />
और भांति चितैवो तेरौ भ्रौह चलत है आछि l<br />
ऐसो टक झक कबहु न दैख्यो तू जो रही कछि काछि ll 2 ll<br />
रहसि कान्ह कर कुचगति परसत तु जो परति है पाछि l<br />
‘परमानंद’ गोपाल आलिंगी गोप वधू हरिनाछि ll 3 ll</p>
<p><strong>साज &#8211;</strong> श्रीजी में आज लाल पीली एकदानी चूंदड़ी की रुपहली ज़री के हांशिया (किनारी) वाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफेद रंग की बिछावट की जाती है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> श्रीजी में आज लाल पीली एकदानी चूंदड़ी का पिछोड़ा धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र हरे रंग के आते हैं.</p>
<p><strong>श्रृंगार –</strong> प्रभु को आज छोटा (कमर तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. हरे मीना के सर्व आभरण धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीमस्तक पर लाल पीली एकदानी चूंदड़ी की छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच, गोल चन्द्रिका तथा बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीकर्ण में चार कर्णफूल धराये जाते हैं.पुष्पों की सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.</p>
<p>श्रीहस्त में कमलछड़ी, लहरियाँ के वेणुजी एवं वैत्रजी धराये जाते हैं.पट लाल व गोटी चाँदी की आती है.</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/अश्विन-कृष्ण पक्ष-द्वितीया</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-28-sep-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 28 Sep 2026 07:10:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज &#8211; अश्विन कृष्ण पक्ष द्वितीया Monday, 28 September 2026 मुकुट काछनी का श्रृंगार अहो विधना तोपै अँचरा पसार माँगू, जनम-जनम दिजौ याहि बृज बसिबौ। अहिर की जात समीप नन्दघर, घरि-घरि घनस्याम सौं हेरि -हेरि हसिबौ॥ दधि के दान मिष बृजकी बिथीन माँझ झकझौरन अँग-अँगकौ परसिबौ। छीतस्वामी गिरधारी विठ्ठलेश वपुघारी,सरदरैंन माँझ [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज &#8211; अश्विन कृष्ण पक्ष द्वितीया<br />
Monday, 28 September 2026</h6>
<p style="text-align: center;"><strong>मुकुट काछनी का श्रृंगार</strong></p>
<p>अहो विधना तोपै अँचरा पसार माँगू, जनम-जनम दिजौ याहि बृज बसिबौ।<br />
अहिर की जात समीप नन्दघर, घरि-घरि घनस्याम सौं हेरि -हेरि हसिबौ॥<br />
दधि के दान मिष बृजकी बिथीन माँझ झकझौरन अँग-अँगकौ परसिबौ।<br />
छीतस्वामी गिरधारी विठ्ठलेश वपुघारी,सरदरैंन माँझ रस रास कौ बिलसिबौ॥</p>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : सारंग)</p>
<p>ग्वालिनी मीठी तेरी छाछि l<br />
कहा दूध में मेलि जमायो साँची कहै किन वांछि ll 1 ll<br />
और भांति चितैवो तेरौ भ्रौह चलत है आछि l<br />
ऐसो टक झक कबहु न दैख्यो तू जो रही कछि काछि ll 2 ll<br />
रहसि कान्ह कर कुचगति परसत तु जो परति है पाछि l<br />
‘परमानंद’ गोपाल आलिंगी गोप वधू हरिनाछि ll 3 ll</p>
<p><strong>साज –</strong> आज प्रातः श्रीजी में गहरवन में दूध-दही बेचने जाती गोपियों के पास से दान मांगते एवं दूध-दही लूटते श्री ठाकुरजी एवं सखा जनों के सुन्दर चित्रांकन वाली दानलीला की प्राचीन पिछवाई धरायी जाती है.गादी, तकिया और चरणचौकी के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> श्रीजी को आज श्याम चौफुली चुंदड़ी की मलमल पर सुनहरी ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित सूथन, काछनी एवं रास-पटका धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र सफेद जमदानी के होते हैं.</p>
<p><strong>श्रृंगार –</strong> आज प्रभु को वनमाला (चरणारविन्द तक) का भारी श्रृंगार धराया जाता है. जड़ाव सोने के सर्व आभरण धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीमस्तक पर मोती जड़ित स्वर्ण का मुकुट और मुकुट पर मुकुट पिताम्बर एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीकर्ण में मयूराकृति कुंडल धराये जाते हैं. कस्तूरी कली एवं कमल माला धराई जाती हैं.पीले एवं श्वेत पुष्पों की कलात्मक थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती है.</p>
<p>श्रीहस्त में कमलछड़ी, सोने के वेणुजी दो वेत्रजी धराये जाते हैं.पट कोयली व गोटी दान की आती है.</p>
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