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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/वैशाख-शुक्ल पक्ष-दशमी</title>
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		<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 03:34:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज &#8211; वैशाख शुक्ल पक्ष दशमी Sunday, 26 April 2026 श्वेत मलमल के धोती पटका एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर तुर्रा के श्रृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : सारंग) आज धरी गिरधर पिय धोती अति झीनी अरगजा भीनी पीतांबर घन दामिनी जोती ll 1 ll टेढ़ी पाग भृकुटी &#8230;<p class="read-more"> <a class="" href="https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-26-apr-2026/"> <span class="screen-reader-text">SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/वैशाख-शुक्ल पक्ष-दशमी</span> Read More &#187;</a></p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज &#8211; वैशाख शुक्ल पक्ष दशमी<br />
Sunday, 26 April 2026</h6>
<p style="text-align: center;"><strong>श्वेत मलमल के धोती पटका एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर तुर्रा के श्रृंगार</strong></p>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : सारंग)</p>
<p>आज धरी गिरधर पिय धोती<br />
अति झीनी अरगजा भीनी पीतांबर घन दामिनी जोती ll 1 ll<br />
टेढ़ी पाग भृकुटी छबि राजत श्याम अंग अद्भुत छबि छाई l<br />
मुक्तामाल फूली वनराई, &#8216;परमानंद&#8217; प्रभु सब सुखदाई ll 2 ll</p>
<p><strong>साज –</strong> आज श्रीजी में श्वेत रंग की मलमल की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है.वस्त्र – आज श्रीजी को श्वेत रंग की मलमल के धोती एवं पटका धराये जाते है. दोनों वस्त्र रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित हैं.</p>
<p><strong>श्रृंगार –</strong> आज प्रभु को ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.<br />
श्रीमस्तक पर श्वेत रंग की गोल पाग के ऊपर सिरपैंच, तुर्रा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में मोती के कर्णफूल धराये जाते हैं.श्वेत पुष्पों की कलात्मक थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.<br />
श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, झीनें लहरियाँ के वेणुजी एवं वेत्रजी धराये जाते हैं.पट ऊष्णकाल का व गोटी छोटी हकीक की आती है.</p>
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/वैशाख-शुक्ल पक्ष-अष्टमी</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-25-apr-2026/</link>
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		<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 02:02:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज &#8211; वैशाख शुक्ल पक्ष अष्टमी Saturday, 25 April 2026 शरबती मलमल का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर ग्वाल पगा पर पगा चंद्रिका (मोरशिखा) के श्रृंगार राजभोग दर्शन – साज – (राग : सारंग) आवत ही यमुना भर पानी l श्याम रूप काहुको ढोटा वाकी चितवन मेरी गैल भुलानी ll 1 ll &#8230;<p class="read-more"> <a class="" href="https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-25-apr-2026/"> <span class="screen-reader-text">SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/वैशाख-शुक्ल पक्ष-अष्टमी</span> Read More &#187;</a></p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज &#8211; वैशाख शुक्ल पक्ष अष्टमी<br />
Saturday, 25 April 2026</h6>
<p style="text-align: center;">शरबती मलमल का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर ग्वाल पगा पर पगा चंद्रिका (मोरशिखा) के श्रृंगार</p>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>साज – (राग : सारंग)</p>
<p>आवत ही यमुना भर पानी l<br />
श्याम रूप काहुको ढोटा वाकी चितवन मेरी गैल भुलानी ll 1 ll<br />
मोहन कह्यो तुमको या व्रजमें हमे नहीं पहचानी l<br />
ठगी सी रही चेटकसो लाग्यो तब व्याकुल मुख फूरत न बानी ll 2 ll<br />
जा दिनतें चितये री मो तन तादिनतें हरि हाथ बिकानी l<br />
&#8216;नंददास&#8217; प्रभु यों मन मिलियो ज्यों सागरमें सरित समानी ll 3 ll</p>
<p><strong>साज –</strong> आज श्रीजी में शरबती मलमल की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की गयी है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> आज श्रीजी को शरबती मलमल का पिछोड़ा धराया जाता है. पिछोड़ा रुपहली तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होता है परन्तु किनारी बाहर आंशिक ही दृश्य होती है अर्थात भीतर की ओर मोड़ दी जाती है.</p>
<p><strong>श्रृंगार –</strong> आज श्रीजी को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का छेड़ान का श्रृंगार धराया जाता है.मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीमस्तक पर शरबती रंग के ग्वाल पगा पर मोती की लड़, पगा चंद्रिका (मोरशिखा) एवं बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है.श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं एवं इसी प्रकार की एक कमल माला हमेल की भांति धरायी जाती हैं.</p>
<p>श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, झीने लहरियाँ के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.पट ऊष्णकाल का एवं गोटी बाघ बकरीं की आते हैं.</p>
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/वैशाख-शुक्ल पक्ष-अष्टमी</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-24-apr-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 24 Apr 2026 03:40:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज &#8211; वैशाख शुक्ल पक्ष अष्टमी Friday, 24 April 2026 गुलाबी मलमल की धोती, पटका एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर क़तरा के श्रृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : सारंग) भलेई मेरे आये हो पिय भलेई मेरे आये हो पिय ठीक दुपहरी की बिरियाँ l शुभदिन शुभ नक्षत्र शुभ &#8230;<p class="read-more"> <a class="" href="https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-24-apr-2026/"> <span class="screen-reader-text">SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/वैशाख-शुक्ल पक्ष-अष्टमी</span> Read More &#187;</a></p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज &#8211; वैशाख शुक्ल पक्ष अष्टमी<br />
Friday, 24 April 2026</h6>
<p style="text-align: center;"><strong>गुलाबी मलमल की धोती, पटका एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर क़तरा के श्रृंगार</strong></p>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : सारंग)</p>
<p>भलेई मेरे आये हो पिय<br />
भलेई मेरे आये हो पिय ठीक दुपहरी की बिरियाँ l<br />
शुभदिन शुभ नक्षत्र शुभ महूरत शुभपल छिन शुभ घरियाँ ll 1 ll<br />
भयो है आनंद कंद मिट्यो विरह दुःख द्वंद चंदन घस अंगलेपन और पायन परियां l<br />
&#8216;तानसेन&#8217; के प्रभु मया कीनी मों पर सुखी वेल करी हरियां ll 2 ll</p>
<p><strong>साज &#8211;</strong> आज श्रीजी में गुलाबी रंग की मलमल की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> आज प्रभु को गुलाबी रंग की मलमल धोती एवं राजशाही पटका धराया जाता हैं. दोनों वस्त्र रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होते हैं.</p>
<p><strong>श्रृंगार –</strong> प्रभु को आज मध्य का (घुटने तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीमस्तक पर गुलाबी रंग की गोल पाग के ऊपर सिरपैंच, लूम, क़तरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.<br />
श्रीकर्ण में एक जोड़ी मोती के कर्णफूल धराये जाते हैं.श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं एवं हमेल की भांति दो मालाजी धरायी जाती हैं.<br />
श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, झिने लहरियाँ के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.पट ऊष्णकाल के राग-रंग का एवं गोटी हक़ीक की आती हैं.</p>
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/वैशाख-शुक्ल पक्ष-सप्तमी</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-23-apr-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 03:38:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज &#8211; वैशाख शुक्ल पक्ष सप्तमी Thursday, 23 April 2026 नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री लालगिरधरजी महाराज का उत्सव, श्रीजी सेवा में फव्वारे आरम्भ विशेष – आज नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री लालगिरधरजी महाराज का उत्सव है. आप तिलकायत होने के साथ उत्कृष्ट कवि थे. आपने ‘श्री लालगिरिधर’ के नाम से कई कीर्तन &#8230;<p class="read-more"> <a class="" href="https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-23-apr-2026/"> <span class="screen-reader-text">SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/वैशाख-शुक्ल पक्ष-सप्तमी</span> Read More &#187;</a></p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज &#8211; वैशाख शुक्ल पक्ष सप्तमी<br />
Thursday, 23 April 2026</h6>
<p style="text-align: center;"><strong>नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री लालगिरधरजी महाराज का उत्सव, श्रीजी सेवा में फव्वारे आरम्भ</strong></p>
<p><strong>विशेष –</strong> आज नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री लालगिरधरजी महाराज का उत्सव है. आप तिलकायत होने के साथ उत्कृष्ट कवि थे. आपने ‘श्री लालगिरिधर’ के नाम से कई कीर्तन रचित किये हैं जो कि श्रीजी सेवा में गाये जाते हैं.</p>
<p>सेवाक्रम &#8211; उत्सव होने के कारण श्रीजी मंदिर के सभी मुख्य द्वारों की देहरी (देहलीज) को पूजन कर हल्दी से लीपी जाती हैं एवं आशापाल की सूत की डोरी की वंदनमाल बाँधी जाती हैं.</p>
<p>आज सभी समय यमुनाजल की झारीजी आती है. दो समय थाली में आरती की जाती है.</p>
<p>डोलोत्सव से धीरे धीरे ऊष्णकाल क्रमानुसार आरम्भ हो जाता है और इसमें उत्तरोत्तर वृद्धि होने के साथ ही प्रभु के सुख में भी उसी क्रम में वृद्धि होती रहती है जिससे श्री ठाकुरजी को ऊष्णता का अनुभव न हो.</p>
<p>प्रभु सुखार्थ इतनी सूक्ष्मता से सेवाक्रम का निर्धारण निस्संदेह अद्भुत है.</p>
<p>इसी क्रम में आज से ऊष्णकाल का एक और सौपान बढ़ जाता है जिसमें प्रभु सुखार्थ सेवाक्रम में कुछ परिवर्तन होंगे.</p>
<p>आज से मंगला में श्रीजी को उपरना के स्थान पर आड़बंद धराया जाता है. आज से श्रीजी को ठाड़े (कन्दराजी के) वस्त्र नहीं धराये जायेंगे और प्रभु की पीठिका के दर्शन होंगे.</p>
<p>आज से प्रभु के श्रीहस्त में पुष्पछड़ी के स्थान पर कमलछड़ी धरायी जाती है.</p>
<p>इत्र – प्रभु सुखार्थ आज विशेष रूप से चैत्री गुलाब, रूह गुलाब, सोंधा, मोगरा, जूही अथवा रूह खस का इत्र समर्पित किया जाता है.</p>
<p>प्रभु को नियम का केसरी रंग के डोरिया का पिछोड़ा धराया जाता है, उत्सव के हीरा मोती के आभरण धराये जाते हैं व श्रीमस्तक पर लूम की रूपहरी किलंगी धरायी जाती है.</p>
<p>उत्सव होने के कारण श्रीजी को गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में विशेष रूप से केशरयुक्त जलेबी के टूक एवं दूधघर में सिद्ध की गयी केसर युक्त बासोंदी की हांडी अरोगायी जाती है. राजभोग में अनसखड़ी में दाख (किशमिश) का रायता व सखड़ी में श्रीखण्ड-भात अरोगाये जाते हैं.</p>
<p><strong>राजभोग दर्शन-</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : सारंग)</p>
<p>श्रीवल्लभ नंदन रूप अनूप स्वरुप कह्यो न जाई l<br />
प्रकट परमानंद गोकुल बसत है सब जगत के सुखदाई ll 1 ll<br />
भक्ति मुक्ति देत सबनको निजजनको कृपा प्रेम बरखत अधिकाई l<br />
सुखद एक रसना कहां लो वरनो ‘गोविंद’ बलबल जाई ll 2 ll</p>
<p><strong>साज –</strong> आज श्रीजी में केसरी रंग की मलमल की, उत्सव के कमल के काम और रुपहली तुईलैस की किनारी के हांशिया से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> आज श्रीजी को केसरी डोरिया का स्याम झाई का पिछोड़ा धराया जाता है. आज से ठाड़े वस्त्र नहीं धराये जाते अतः पीठिका के दर्शन होते हैं.</p>
<p><strong>श्रृंगार –</strong> आज श्रीजी को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. उत्सव के हीरा व मोती के आभरण धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीमस्तक पर श्याम झांई की केसरी छज्जेदार पाग के ऊपर संक्रान्ति वाले सिरपैंच, रुपहली लूम की किलंगी एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीकर्ण में हीरा के झुमका वाले कर्णफूल एक जोड़ी धराये जाते हैं.श्रीकंठ में त्रवल नहीं आवे यद्यपि कंठी धरायी जाती है.श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं एवं इसी प्रकार दो मालाजी हमेल की भांति धरायी जाती हैं.</p>
<p>आज पीठिका के ऊपर श्वेत एवं गुलाबी पुष्पों की एक मोटी सुन्दर मालाजी भी धरायी जाती है.<br />
श्रीहस्त में कमलछड़ी, ऊष्णकाल सुवा वाले वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.पट ऊष्णकाल का व गोटी बड़ी हकीक की आती है.</p>
<p>आज से भोग दर्शन में प्रभु सुखार्थ श्रीजी के सम्मुख शीतल जल के चांदी के फव्वारे चलाये जायेंगे एवं राजभोग उपरान्त हर घन्टे भीतर व संध्या आरती दर्शन उपरान्त डोल-तिबारी में भी शीतल जल का छिड़काव प्रारंभ हो जायेगा.</p>
<p>भोग समय अरोगाये जाने वाले फीका के स्थान पर बीज-चालनी के सूखे मेवा अरोगाये जाते हैं</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/वैशाख-शुक्ल पक्ष-षष्ठी</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-22-apr-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 03:42:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज &#8211; वैशाख शुक्ल पक्ष षष्ठी Wednesday, 22 April 2026 छैल जो छबीला, सब रंग में रंगीला बड़ा चित्त का अड़ीला, कहूं देवतों से न्यारा है। माल गले सोहै, नाक-मोती सेत जो है कान, कुण्डल मन मोहै, लाल मुकुट सिर धारा है। दुष्टजन मारे, सब संत जो उबारे ताज, चित्त में &#8230;<p class="read-more"> <a class="" href="https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-22-apr-2026/"> <span class="screen-reader-text">SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/वैशाख-शुक्ल पक्ष-षष्ठी</span> Read More &#187;</a></p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज &#8211; वैशाख शुक्ल पक्ष षष्ठी<br />
Wednesday, 22 April 2026</h6>
<p>छैल जो छबीला, सब रंग में रंगीला<br />
बड़ा चित्त का अड़ीला, कहूं देवतों से न्यारा है।<br />
माल गले सोहै, नाक-मोती सेत जो है कान,<br />
कुण्डल मन मोहै, लाल मुकुट सिर धारा है।<br />
दुष्टजन मारे, सब संत जो उबारे ताज,<br />
चित्त में निहारे प्रन, प्रीति करन वारा है।<br />
नन्दजू का प्यारा, जिन कंस को पछारा,<br />
वह वृन्दावन वारा, कृष्ण साहेब हमारा है।।</p>
<p>ताज़बीबी के अन्नय भाव के सूथन, फेटा और पटका के श्रृंगार</p>
<p><strong>विशेष –</strong> आज प्रभु को सूथन, फेंटा और पटका का श्रृंगार धराया जाता है. यद्यपि आज का दिन इस श्रृंगार के लिए नियत नहीं परन्तु सामान्यतया आज के दिन ही धराया जाता है.</p>
<p>श्रीजी ने अपने सभी भक्तों को आश्रय दिया है, मान दिया है चाहे वो किसी भी धर्म से हो.</p>
<p>इसी भाव से आज ठाकुरजी अपनी अनन्य मुस्लिम भक्त ताज़बीबी की भावना से सूथन-पटका का श्रृंगार धराते हैं. यह श्रृंगार ताज़बीबी की विनती पर सर्वप्रथम भक्तकामना पूरक श्री गुसांईजी ने धराया था.</p>
<p>ताज़बीबी की ओर से यह श्रृंगार वर्ष में छह बार धराया जाता है. भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी (गणेश चतुर्थी) के दिन यह श्रृंगार नियम से धराया जाता है यद्यपि इस श्रृंगार को धराने के अन्य पांच दिन निश्चित नहीं हैं.</p>
<p>ताज़बीबी बादशाह अकबर की बेग़म, प्रभु की भक्त और श्री गुसांई जी की परम-भगवदीय सेवक थी. उन्होंने कई कीर्तनों की रचना भी की है और उनके सेव्य स्वरुप श्री ललितत्रिभंगी जी वर्तमान में गुजरात के पोरबंदर में श्री रणछोड़जी की हवेली में विराजित हैं.</p>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : सारंग)</p>
<p>बन्यो वागौ वामना चंदनको l<br />
चंपकली की पाग बनाई भाल तिलक बन्यो वंदन को ll 1 ll<br />
चोली की छबि कहत न आवे काछोटा मनफंदनको l<br />
‘परमानंद’ आनंद तहाँ नित मुख निरखत नंद नंदनको ll 2 ll</p>
<p><strong>साज –</strong> आज श्रीजी में फिरोज़ी धोरा के रंग की मलमल की रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी के हांशिया से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> आज श्रीजी को फिरोज़ी धोरा के रंग की मलमल का धोरे (थोड़े-थोड़े अंतर से किनारी के धोरे) वाला सूथन और राजशाही पटका धराया जाता है. दोनों वस्त्र रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित हैं. ठाड़े वस्त्र गुलाबी रंग के धराये जाते हैं.</p>
<p><strong>श्रृंगार –</strong> प्रभु को आज मध्य (घुटने तक) का उष्णकालीन छेड़ान का श्रृंगार धराया जाता है.मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीमस्तक पर फिरोज़ी धोरा के रंग के फेंटा के ऊपर सिरपैंच, चंद्रिका, कतरा तथा बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है.<br />
श्रीकर्ण में लोलकबिन्दी लड़ वाले कर्णफूल धराये जाते हैं.श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर कलात्मक मालाजी धरायी जाती हैं.<br />
श्रीहस्त में कमलछड़ी, गंगा जमुनी के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.पट उष्णकाल का व गोटी बाघ-बकरी की आती है.</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/वैशाख-शुक्ल पक्ष-पंचमी (चतुर्थी क्षय)</title>
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		<pubDate>Tue, 21 Apr 2026 03:23:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज &#8211; वैशाख शुक्ल पक्ष पंचमी (चतुर्थी क्षय) Tuesday, 21 April 2026 मल्लकाछ टिपारा का श्रृंगार मल्लकाछ (मल्ल एवं कच्छ) दो शब्दों से बना है और ये एक विशेष पहनावा है जो आम तौर पर पहलवान मल्ल (कुश्ती) के समय पहना करते हैं.सामान्यतया वीर-रस का यह श्रृंगार पराक्रमी प्रभु की चंचलता &#8230;<p class="read-more"> <a class="" href="https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-21-apr-2026/"> <span class="screen-reader-text">SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/वैशाख-शुक्ल पक्ष-पंचमी (चतुर्थी क्षय)</span> Read More &#187;</a></p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज &#8211; वैशाख शुक्ल पक्ष पंचमी (चतुर्थी क्षय)<br />
Tuesday, 21 April 2026</h6>
<p style="text-align: center;"><strong>मल्लकाछ टिपारा का श्रृंगार</strong></p>
<p>मल्लकाछ (मल्ल एवं कच्छ) दो शब्दों से बना है और ये एक विशेष पहनावा है जो आम तौर पर पहलवान मल्ल (कुश्ती) के समय पहना करते हैं.सामान्यतया वीर-रस का यह श्रृंगार पराक्रमी प्रभु की चंचलता प्रदर्शित करने की भावना से धराया जाता है.</p>
<p>कीर्तन – (राग : सारंग)</p>
<p>अक्षय तृतीया गिरिधर बैठे चंदन को<br />
तन लेप किए ।<br />
प्रफुल्लित वदन सुधाकर निरखत गोपी नयन चकोर पियें ।।१।।<br />
कनक वरन शिर बनयो हे टीपारो ठाडे है कर कमल लिए ।<br />
गोविंद प्रभु की बानिक निरखत वार फेर तन मनजु दिये ।।२।।</p>
<p><strong>साज –</strong> आज श्रीजी में अंगूरी मलमल पर रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी-तकिया एवं चरण चौकी के ऊपर सफेद बिछावट होती है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> श्रीजी को आज अंगूरी मलमल का रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी वाला मल्लकाछ एवं पटका धराया जाता है. इसी प्रकार अंगूरी रंग का रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी वाला पटका भी धराया जाता है. इस श्रृंगार को मल्लकाछ-टिपारा एवं दोहरा पटका का श्रृंगार कहा जाता है. ठाड़े वस्त्र गुलाबी रंग के धराये जाते हैं.</p>
<p><strong>श्रृंगार –</strong> आज प्रभु को श्रीकंठ का शृंगार छेड़ान (हल्का) बाक़ी मध्य का (घुटने तक) ऊष्णक़ालीन श्रृंगार धराया जाता है. मोतियों के सर्व आभरण धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीमस्तक पर टिपारा का साज (अंगूरी मलमल की टिपारा की टोपी के ऊपर मध्य में मोती की मोरशिखा और दोनों ओर दोहरा कतरा) तथा बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीकर्ण में मयुराकृति कुंडल धराये जाते हैं. हांस, त्रवल, पायल कड़ा हस्तसाखलाआदि धराये जाते हैं. श्रीकंठ में श्वेत माला धरायी जाती है. श्वेत पुष्पों की विविध पुष्पों की थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती है.</p>
<p>श्रीहस्त में कमल के फूल की छड़ी, सुवा के वेणुजी तथा दो वेत्रजी धराये जाते हैं.पट उष्णकाल का व गोटी हक़ीक की आती है.</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/वैशाख-शुक्ल पक्ष-तृतीया</title>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 04:36:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज &#8211; वैशाख शुक्ल पक्ष तृतीया Monday, 20 April 2026 अक्षय तृतीया श्याम अंग सखी हेम चंदनको नीको सोहे वागो । चंदन ईजार चंदन को पटुका बन्यो सीस चंदन को पागो ।।१।। अति छबि देत चंदन ऊपरना बीच बन्यो चंदन को तागो । सब अंग छींट बनी चंदन की निरखत सूर &#8230;<p class="read-more"> <a class="" href="https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-20-apr-2026/"> <span class="screen-reader-text">SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/वैशाख-शुक्ल पक्ष-तृतीया</span> Read More &#187;</a></p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज &#8211; वैशाख शुक्ल पक्ष तृतीया<br />
Monday, 20 April 2026</h6>
<h5 style="text-align: center;"><strong>अक्षय तृतीया</strong></h5>
<p>श्याम अंग सखी हेम चंदनको नीको सोहे वागो ।<br />
चंदन ईजार चंदन को पटुका बन्यो सीस चंदन को पागो ।।१।।<br />
अति छबि देत चंदन ऊपरना बीच बन्यो चंदन को तागो ।<br />
सब अंग छींट बनी चंदन की निरखत सूर सुभागो ।।२।।</p>
<p>श्रृंगार समां का कीर्तन –</p>
<p>आज मेरे आएंगे हरि मेहमान l<br />
चंदन भवन लिपाय स्वच्छ करि धर्यो है अरगजा सान ll 1 ll<br />
पलकन के पावड़े बिछाऊँ अंचल पवन दुराऊँ l<br />
सुधे बसन सगमंगे किने मुक्ता ले पहराऊँ ll 2 ll<br />
करके मनोरथ अपने मन को रही न कछु अभिलाष l<br />
पहले बोल सुनत तू आली ‘कृष्णदास’ हित साख ll 3 ll</p>
<p><strong>प्रभु को नियम का श्वेत मलमल का केसर की किनार वाला पिछोड़ा व चंदनिया रंग के ठाड़े वस्त्र धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर श्वेत रंग की कुल्हे के ऊपर तीन मोरपंख की चंद्रिका की जोड़ धरायी जाती है.</strong></p>
<p><strong>श्रीजी को गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में विशेष रूप से कूर (घी में सेके गये कसार) के चाशनी चढ़े गुंजा व दूधघर में सिद्ध की गयी केसर युक्त बासोंदी की हांडी अरोगायी जाती है.</strong></p>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : सारंग)</p>
<p>अक्षय तृतीया अक्षयलीला नवरंग गिरिधर पहेरत चंदन l<br />
वामभाग वृषभान नंदिनी बिचबिच चित्र नव वंदन ll 1 ll<br />
तनसुख छींट ईजार बनी है पीत उपरना विरह-निकंदन l<br />
उर उदार बनमाल मल्लिका सुखद पाग युवतीन मनफंदन ll 2 ll<br />
नखसिख रत्न अलंकृत भूषन श्रीवल्लभ मारग मनरंजन l<br />
‘कृष्णदास’ प्रभु रसिक सिरोमनि लोचन चपल लजावत खंजन ll 3 ll</p>
<p><strong>साज –</strong> आज प्रभु में श्वेत चिकन बूटी की पिछवाई धरायी जाती है जिसमें केसर की किनार की जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> आज प्रभु को श्वेत मलमल का केसर की किनार वाला पिछोड़ा धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र चंदनिया (चंदन के) डोरिया के धराये जाते हैं.</p>
<p>पोस्ट में प्रस्तुत चित्र में सभी वस्त्र एवं पिछवाई आदि पर चंदन के छापा द्रश्य हैं परन्तु वास्तव में ऐसा नही होता. वस्त्रादि साज पर केसर की किनार ही की जाती है.</p>
<p><strong>श्रृंगार –</strong> प्रभु को आज मध्य का (घुटने तक) उष्णकालीन मध्यम श्रृंगार धराया जाता है. विशेष मोती, हीरा एवं स्वर्ण के सर्व आभरण धराये जाते हैं.नीचे उष्ण काल के मोती के पदक ऊपर मोती की माला धरायी जाती हैं.कली एवं सात बालकन की माला धरायीं जाती हैं.<br />
श्रीमस्तक पर श्वेत रंग की कुल्हे के ऊपर सिरपैंच, तीन मोरपंख की चंद्रिका की जोड़ तथा बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.श्रीकर्ण में हीरे के कुंडल धराये जाते हैं.</p>
<p>पीठिका के ऊपर मोती का चौखटा धराया जाता है. श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.</p>
<p>श्रीहस्त में कमलछड़ी, मोती के वेणुजी तथा दो वेत्रजी धराये जाते हैं.पट ऊष्णकाल का, गोटी मोती की व आरसी शृंगार में हरे मख़मल की एवं राजभोग में सोने की डांडी की आती है.</p>
<p>आज ग्वाल के दर्शन नहीं खोले जाते और दो राजभोग दर्शन खुलते हैं.</p>
<p>पहले राजभोग में नित्य-नियम के भोग के साथ अनसखड़ी में दाख (किशमिश) का रायता व सखड़ी में घोला हुआ सतुवा, दहीभात आदि अरोगाये जाते हैं. भोग सरे उपरान्त हस्तनिर्मित खस के पंखा, श्वेत माटी के करवा, कुंजा व चन्दन बरनी का अधिवासन होता है और दर्शन खोले जाते हैं.</p>
<p>आज से प्रभु को चन्दन धराया जाता है. चन्दन को घिस के मलमल के वस्त्र में लेकर जल निचो लिया जाता है एवं इसमें केशर, बरास, इत्र (खस अथवा गुलाब), गुलाबजल आदि मिलाकर इसकी गोलियां बनायी जाती है.</p>
<p>खुले दर्शन के मध्य प्रभु को चंदन समर्पित किया जाता है. पहली गोली प्रभु के वक्षस्थल पर, दूसरी गोली, दायें श्रीहस्त में, तीसरी बायें श्रीहस्त पर, चौथी दायें श्रीचरण पर और पांचवी गोली बायें श्रीचरण पर धरी जाती है.</p>
<p>इसके पश्चात दो नये हस्तनिर्मित ख़स के हाथ-पंखा को जल छिड़ककर प्रभु को कुछ देर पंखा झलकर गादी के पीछे तकिया की दोनों ओर रखे जाते हैं.</p>
<p>पहले राजभोग दर्शन खुलते हैं परन्तु इस दर्शन में आरती नहीं की जाती.</p>
<p>दर्शन उपरांत दूसरे राजभोग में उत्सव भोग रखे जाते हैं जिनमें प्रभु को खरबूजा (शक्कर टेंटी) के छिले हुए बीज के लड्डू, दूधघर में सिद्ध मावे के पेड़ा-बरफी, दूधपूड़ी, बासोंदी, जीरा मिश्रित दही, केसरी-सफेद मावे की गुंजिया, बीज-चालनी का सूखा मेवा, विविध प्रकार के संदाना (आचार), विविध प्रकार के फल, उत्तमोत्तम रत्नागिरी आम की डबरिया, शीतल आदि अरोगाये जाते हैं.</p>
<p>सखड़ी में बड़े टूक, पाटिया, दहीभात, घोला हुआ सतुवा आदि अरोगाये जाती हैं.</p>
<p>दुसरे राजभोग दर्शन में आरती होती है. राजभोग दर्शन में प्रभु के सम्मुख सिकोरी (स्वर्ण का जालीदार पात्र) में पान के बीड़ा धरे जाते हैं.</p>
<p>आज प्रभु के मुंडन का दिन भी है और इस कारण आज के उत्सव में ठाकुरजी के ननिहाल के सदस्य भी आमंत्रित किये जाते हैं और इसीलिए आज श्री यशोदाजी के पीहर की लकड़ी की विशिष्ट चौकी का प्रयोग भोग धरने में किया जाता है.</p>
<p>आज से रथयात्रा तक प्रतिदिन संध्या-आरती में प्रभु को क्रमशः जल में भीगी (अजवायन युक्त) चने की दाल, भीगी मूँग दाल व तीसरे दिन अंकुरित मूँग (अंकूरी) अरोगाये जाते हैं. यद्यपि यह सामग्री रथयात्रा के पश्चात भी जन्माष्टमी तक अरोगायी जाती है परन्तु इसके स्वरुप में कुछ परिवर्तन होता है जिसका वर्णन मैं तभी दूंगा.</p>
<p>आज से जन्माष्टमी तक प्रतिदिन संध्या-आरती में प्रभु को शीतल (जल में बूरा, गुलाबजल, इलायची, बरास आदि मिलाकर सिद्ध किया गया पेय) अरोगाया जाता है.</p>
<p>चंदन की गोलियां संध्या-आरती पश्चात श्रृंगार बड़ा हो तब बड़ी की (हटाई) जाती है.</p>
<p>शयन समय शैयाजी के ऊपर छींट की गादी एवं उसके ऊपर श्वेत मलमल की चादर रखी जाती है. शैयाजी का यह क्रम आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा तक रहता है.</p>
<p><strong>आप सभी को अक्षय-तृतीया के उत्सव की ख़ूबख़ूब बधाई</strong></p>
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/वैशाख-शुक्ल पक्ष-द्वितीया</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-19-apr-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 19 Apr 2026 03:34:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज &#8211; वैशाख शुक्ल पक्ष द्वितीया Sunday, 19 April 2026 आगम का श्रृंगार अधिकांश बड़े उत्सवों के एक दिन पूर्व लाल-पीले वस्त्र एवं पाग-चन्द्रिका का श्रृंगार धराया जाता है. इसे आगम का श्रृंगार कहा जाता है और यह श्रृंगार अनुराग के भाव से धराया जाता है. इस श्रृंगार के लाल वस्त्र &#8230;<p class="read-more"> <a class="" href="https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-19-apr-2026/"> <span class="screen-reader-text">SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/वैशाख-शुक्ल पक्ष-द्वितीया</span> Read More &#187;</a></p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h4>व्रज &#8211; वैशाख शुक्ल पक्ष द्वितीया<br />
Sunday, 19 April 2026</h4>
<p style="text-align: center;"><strong>आगम का श्रृंगार</strong></p>
<p>अधिकांश बड़े उत्सवों के एक दिन पूर्व लाल-पीले वस्त्र एवं पाग-चन्द्रिका का श्रृंगार धराया जाता है. इसे आगम का श्रृंगार कहा जाता है और यह श्रृंगार अनुराग के भाव से धराया जाता है.</p>
<p>इस श्रृंगार के लाल वस्त्र विविध ऋतुओं के उत्सवों के अनुरूप होते हैं अर्थात गत वैशाख कृष्ण नवमी को श्री महाप्रभुजी के उत्सव के पूर्व के इस श्रृंगार में तत्कालीन ऋतु के अनुरूप घेरदार वागा धराये गए थे और वैशाख कृष्ण द्वादशी से सामान्यतया शीतकालीन वस्त्र अर्थात घेरदार, चाकदार एवं खुलेबंद के वागा नहीं धराये जाते अतः आज प्रभु को लाल मलमल का पिछोड़ा धराया जायेगा.</p>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : सारंग)</p>
<p>आज की बानिक कही न जाय, बैठे निकस कुंजद्वार l<br />
लटपटी पाग सिर सिथिल चिहुर चारू खसित बरुहा चंदरस भरें ब्रजराजकुमार ll 1 ll<br />
श्रमजल बिंदु कपोल बिराजत मानों ओस कन नीलकमल पर l<br />
‘गोविंद’ प्रभु लाडिलो ललन बलि कहा कहों अंग अंग सुंदर वर ll 2 ll</p>
<p><strong>साज –</strong> आज श्रीजी में लाल सुनहरी लप्पा की, सुनहरी ज़री की तुईलैस के हांशिया से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> आज प्रभु को लाल मलमल का पिछोड़ा धराया जाता हैं. सभी वस्त्र रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होते हैं. ठाड़े वस्त्र पीले रंग के धराये जाते हैं.</p>
<p><strong>श्रृंगार –</strong> प्रभु को आज छोटा (कमर तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. पन्ना के सर्व आभरण धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीमस्तक पर लाल मलमल की गोल पाग के ऊपर सिरपैंच, लूम, मोरपंख की सादी चन्द्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है.</p>
<p>श्रीकर्ण में एक जोड़ी पन्ना के कर्णफूल धराये जाते हैं. श्रीकंठ में पन्ना की चार माला धरायी जाती है. श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.</p>
<p>श्रीहस्त में कमलछड़ी, हरे मीना के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.पट लाल, गोटी सोने की छोटी व आरसी श्रृंगार में सोना की एवं राजभोग में बटदार आती है.</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/वैशाख-शुक्ल पक्ष-प्रतिपदा</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-18-apr-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 18 Apr 2026 02:07:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज &#8211; वैशाख शुक्ल पक्ष प्रतिपदा Saturday, 18 April 2026 ग्रीष्म ऋतु का अंतिम मुकुट काछनी का श्रृंगार विशेष &#8211; श्रीजी को आज इस ऋतु का अंतिम मुकुट का श्रृंगार धराया जायेगा. आज के पश्चात मुकुट-काछनी का श्रृंगार लगभग दो माह दस दिन पश्चात (आषाढ़ शुक्ल एकादशी को) धराया जायेगा. आज &#8230;<p class="read-more"> <a class="" href="https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-18-apr-2026/"> <span class="screen-reader-text">SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/वैशाख-शुक्ल पक्ष-प्रतिपदा</span> Read More &#187;</a></p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज &#8211; वैशाख शुक्ल पक्ष प्रतिपदा<br />
Saturday, 18 April 2026</h6>
<p style="text-align: center;"><strong>ग्रीष्म ऋतु का अंतिम मुकुट काछनी का श्रृंगार</strong></p>
<p><strong>विशेष &#8211;</strong> श्रीजी को आज इस ऋतु का अंतिम मुकुट का श्रृंगार धराया जायेगा. आज के पश्चात मुकुट-काछनी का श्रृंगार लगभग दो माह दस दिन पश्चात (आषाढ़ शुक्ल एकादशी को) धराया जायेगा.</p>
<p>आज के वस्त्र कांकरौली श्री द्वारिकाधीश मंदिर की तरफ़ से आते हैं.</p>
<p>प्रभु को मुख्य रूप से तीन लीलाओं (शरद-रास, दान और गौ-चारण) के भाव से मुकुट का श्रृंगार धराया जाता है.</p>
<p>अधिक गर्मी एवं अधिक सर्दी के दिनों में मुकुट नहीं धराया जाता इस कारण देव-प्रबोधिनी से फाल्गुन कृष्ण सप्तमी (श्रीजी का पाटोत्सव) तक एवं अक्षय तृतीया से रथयात्रा तक मुकुट नहीं धराया जाता.</p>
<p>जब भी मुकुट धराया जाता है वस्त्र में काछनी धरायी जाती है. काछनी के घेर में भक्तों को एकत्र करने का भाव है.</p>
<p>जब मुकुट धराया जाये तब ठाड़े वस्त्र सदैव श्वेत रंग के होते हैं. ये श्वेत वस्त्र चांदनी छटा के भाव से धराये जाते हैं.</p>
<p>जिस दिन मुकुट धराया जाये उस दिन विशेष रूप से भोग-आरती में सूखे मेवे के टुकड़ों से मिश्रित मिश्री की कणी अरोगायी जाती है.</p>
<p>आज संभवतया श्रीजी के श्रीहस्त में पुष्पछड़ी अंतिम बार धरायी जाती है.</p>
<p>कल से प्रभु के श्रीहस्त में कमल-छड़ी धरायी जायेगी.</p>
<p><strong>कीर्तन – (राग : सारंग)</strong></p>
<p>कुंजभवन तें निकसे माधो-राधा ये चले मेलि गले बांह l<br />
तब प्यारी अरसाय पियसो मंद मंद ज्यों स्वेदकन वदन निहारत करत मुकुट की छांह ll 1 ll<br />
श्रमित जान पट पीत छोरसो पवन ढुरावे हो व्रजवधु वनमांह l<br />
‘जगन्नाथ’ कविराय की प्यारी देखत नयन सिराह ll 2 ll</p>
<p><strong>साज –</strong> आज श्रीजी में अमरसी रंग की मलमल की, सुनहरी लप्पा की तुईलैस के हांशिया से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> श्रीजी को आज अमरसी रंग की मलमल का सूथन, काछनी एवं रास-पटका धराये जाते हैं. चोली नहीं धरायी जाती. सभी वस्त्र रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होते हैं. ठाड़े वस्त्र सफेद जामदानी (चिकन) के धराये जाते हैं.</p>
<p><strong>श्रृंगार &#8211;</strong> श्रीजी को आज वनमाला (चरणारविन्द तक) का भारी श्रृंगार धराया जाता है. हीरा मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर स्वर्ण का डांख का मुकुट एवं बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है.</p>
<p>श्रीकर्ण में हीरा के मयूराकृति कुंडल धराये जाते हैं. बायीं ओर उत्सव की मीना की शिखा (चोटी) धरायी जाती है.</p>
<p>श्रीकंठ में कली, कस्तूरी व कमल माला धरायी जाती है.श्वेत पुष्पों की विविध पुष्पों की थागवाली दो सुन्दर कलात्मक वनमाला धरायी जाती है.</p>
<p>श्रीहस्त में पुष्पछड़ी, लहरिया के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.पट लाल व गोटी शतरंज की आती है.</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/वैशाख-कृष्ण पक्ष-मावस्या</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-17-apr-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 03:35:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज &#8211; वैशाख कृष्ण पक्षअमावस्या Friday, 17 April 2026 केसरी धोती पटका एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर गोल चंद्रिका के श्रृंगार राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : सारंग) आज बने नंदनंदनरी नव चंदनको तन लेप किये l तामे चित्र बने केसर के राजत हैं सखी सुभग हिये ll 1 &#8230;<p class="read-more"> <a class="" href="https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-17-apr-2026/"> <span class="screen-reader-text">SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/वैशाख-कृष्ण पक्ष-मावस्या</span> Read More &#187;</a></p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<p><strong>व्रज &#8211; वैशाख कृष्ण पक्षअमावस्या</strong><br />
<strong>Friday, 17 April 2026</strong></p>
<p style="text-align: center;"><strong>केसरी धोती पटका एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर गोल चंद्रिका के श्रृंगार</strong></p>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : सारंग)</p>
<p>आज बने नंदनंदनरी नव चंदनको तन लेप किये l<br />
तामे चित्र बने केसर के राजत हैं सखी सुभग हिये ll 1 ll<br />
तन सुखको कटि बन्यो हे पिछोरा ठाड़े है कर कमल लिये l<br />
रूचि वनमाल पीत उपरेना नयन मेन सरसे देखिये ll 2 ll<br />
करन फूल प्रतिबिंब कपौलन मृगमद तिलक लिलाट दिये l<br />
‘चतुर्भुज’ प्रभु गिरिधरन लाल छबि टेढ़ी पाग रही भृकुटी छिये ll 3 ll</p>
<p><strong>साज –</strong> आज श्रीजी में केसरी रंग की मलमल पर रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी-तकिया एवं चरण चौकी के ऊपर सफेद बिछावट होती है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> आज श्रीजी को केसरी रंग की मलमल पर रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित धोती एवं राजशाही पटका धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र फ़िरोज़ी रंग के धराये जाते हैं.</p>
<p><strong>श्रृंगार –</strong> आज प्रभु को उष्णकाल का हल्का श्रृंगार धराया जाता है. फ़िरोज़ा के सर्व आभरण धराये जाते हैं.<br />
श्रीमस्तक पर केसरी रंग की गोल पाग के ऊपर सिरपैंच, गोल चंद्रिका तथा बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.<br />
श्रीकर्ण में मोती के एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं.श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.<br />
श्रीहस्त में कमलछड़ी, उष्णकाल के फ़िरोज़ी मीना के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.पट केसरी का एवं गोटी चाँदी की आती हैं.</p>
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