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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/अधिक ज्येष्ठ-कृष्ण पक्ष-दशमी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 02:01:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज -अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष दशमी Wednesday, 10 June 2026 गुलाबी मलमल की परधनी एवं श्रीमस्तक पर पाग पर गोल चंद्रिका के श्रृंगार श्रीजी में प्रातः &#8211; चंदन पत्ती मंडली का मनोरथ शाम को &#8211; चंदन पहर नाव हरि बैठे प्रियाजी में प्रातः &#8211; चंदन पत्ती मंडली का मनोरथ शाम को &#8230;<p class="read-more"> <a class="" href="https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-10-jun-2026/"> <span class="screen-reader-text">SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/अधिक ज्येष्ठ-कृष्ण पक्ष-दशमी</span> Read More &#187;</a></p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज -अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष दशमी<br />
Wednesday, 10 June 2026</h6>
<p style="text-align: center;"><strong>गुलाबी मलमल की परधनी एवं श्रीमस्तक पर पाग पर गोल चंद्रिका के श्रृंगार</strong></p>
<p><strong>श्रीजी में</strong></p>
<ul>
<li>प्रातः &#8211; चंदन पत्ती मंडली का मनोरथ</li>
<li>शाम को &#8211; चंदन पहर नाव हरि बैठे</li>
</ul>
<p><strong>प्रियाजी में</strong></p>
<ul>
<li>प्रातः &#8211; चंदन पत्ती मंडली का मनोरथ</li>
<li>शाम को &#8211; श्याम यमुना बीच खेवत नाव</li>
</ul>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>बैठै घनस्याम सुंदर खेवत है नाव।<br />
आज सखी मोहन संग , खेलवे को दाव।।१।।<br />
यमुना गम्भीर नीर, अति तरंग लोले।<br />
गोपिन प्रति कहन लागे, मीठे मृदु बोले।। २।।<br />
पथिक हम खेवट तुम , लीजिये उतराई।<br />
बीच धार मांझ रोकी , मिष ही मिष डुलाई ।। ३।।<br />
डरपत हों स्याम सुंदर, राखिये पद पास।<br />
याहि मिष मिल्यो चाहे, परमानंद दास।।। ४।।</p>
<p><strong>साज –</strong> आज श्रीजी में उदयपुर के प्रसिद्द गणगौर-घाट, राजमहल, नौका-विहार, घूमर नृत्य करती गोपियों, श्री ठाकुर जी, श्री बलदेव जी एवं श्री नंद-यशोदा जी के सुन्दर चित्रांकन से सुशोभित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> आज श्रीजी को गुलाबी मलमल की परदनी धरायी जाती है.</p>
<p><strong>श्रृंगार –</strong> आज प्रभु को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. सर्व आभरण हीरा के धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीमस्तक पर गुलाबी मलमल की छोर वाली पाग के ऊपर सिरपैंच, मोती की घुमावदार चमकानी गोल-चंद्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीकर्ण में एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं.हरे एवं कमल के पुष्पों की विविध पुष्पों की थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती है वहीँ श्वेत पुष्पों एवं कमल की दो मालाजी हमेल की भांति भी धरायी जाती है.</p>
<p>श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, चांदी के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.पट उष्णकाल का व गोटी हकीक की आती है.</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/अधिक ज्येष्ठ-कृष्ण पक्ष-नवमी</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-09-jun-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 01:58:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज -अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष नवमी Tuesday, 09 June 2026 खसखसी मलमल का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर फेटा के साज का श्रृंगार श्रीजी में प्रातः &#8211; कली की मंडली प्रियाजी में प्रातः &#8211; श्वेत कमल मंडली राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : सारंग) गोविंद लाडिलो लडबौरा l अपने रंग फिरत &#8230;<p class="read-more"> <a class="" href="https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-09-jun-2026/"> <span class="screen-reader-text">SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/अधिक ज्येष्ठ-कृष्ण पक्ष-नवमी</span> Read More &#187;</a></p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज -अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष नवमी<br />
Tuesday, 09 June 2026</h6>
<p style="text-align: center;"><strong>खसखसी मलमल का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर फेटा के साज का श्रृंगार</strong></p>
<ul>
<li><strong>श्रीजी में</strong><br />
प्रातः &#8211; कली की मंडली</li>
<li><strong>प्रियाजी में</strong><br />
प्रातः &#8211; श्वेत कमल मंडली</li>
</ul>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : सारंग)</p>
<p>गोविंद लाडिलो लडबौरा l<br />
अपने रंग फिरत गोकुल में श्याम बरण जैसे भौंरा ll 1 ll<br />
किंकणी कवणित चारू चल कुंडल तन चंदन की खौरा l<br />
नृत्यत गावत वसन फिरावत हाथ फूलन के झोरा ll 2 ll<br />
माथे कनक वरण को टिपारो ओढ़े पीत पिछोरा l<br />
देखी स्वरुप ठगी व्रजवनिता जिय भावे नहीं औरा ll 3 ll<br />
जाकी माया जगत भुलानो सकल देव सिरमौरा l<br />
‘परमानंददास’ को ठाकुर संग ढीठौ ना गौरा ll 4 ll</p>
<p><strong>साज –</strong> आज श्रीजी में खसखाना के चित्रांकन की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> आज श्रीजी को खसखसी रंग की मलमल का पिछोड़ा धराया जाता है.</p>
<p><strong>श्रृंगार –</strong> आज प्रभु को वनमाला का (चरणारविन्द तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीमस्तक पर फेंटा का साज धराया जाता है. खसखसी मलमल के फेंटा के ऊपर सिरपैंच, श्वेत रेशम की मोरशिखा, कतरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीकर्ण में मोती के लोलकबंदी (लड़वाले) कर्णफूल धराये जाते हैं.तुलसी एवं श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर कलात्मक मालाजी धरायी जाती हैं.</p>
<p>श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, सुआ के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.पट ऊष्णकाल का एवं गोटी बाघ बकरी की आती है.</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/अधिक ज्येष्ठ-कृष्ण पक्ष-अष्टमी</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-08-jun-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 01:39:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज &#8211; अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष अष्टमी Monday, 08 June 2026 श्वेत धोती, गाती का पटका एवं श्रीमस्तक कूल्हे पर श्वेत घेरा के श्रृंगार श्रीजी में प्रातः &#8211; श्वेत कमल मंडली शाम &#8211; मचक मचक झूले प्रियाजी में प्रातः &#8211; कली की मंडली शाम &#8211; यमुना पुलीन हिंडोलना राजभोग दर्शन – &#8230;<p class="read-more"> <a class="" href="https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-08-jun-2026/"> <span class="screen-reader-text">SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/अधिक ज्येष्ठ-कृष्ण पक्ष-अष्टमी</span> Read More &#187;</a></p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज &#8211; अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष अष्टमी<br />
Monday, 08 June 2026</h6>
<p style="text-align: center;"><strong>श्वेत धोती, गाती का पटका एवं श्रीमस्तक कूल्हे पर श्वेत घेरा के श्रृंगार</strong></p>
<p><strong>श्रीजी में</strong></p>
<ul>
<li>प्रातः &#8211; श्वेत कमल मंडली</li>
<li>शाम &#8211; मचक मचक झूले</li>
</ul>
<p><strong>प्रियाजी में</strong></p>
<ul>
<li>प्रातः &#8211; कली की मंडली</li>
<li>शाम &#8211; यमुना पुलीन हिंडोलना</li>
</ul>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : सारंग)</p>
<p>आज ठाड़े लाल मुकुट धरे l<br />
वदन लसत मकराकृत कुंडल रतिपति मन जु हरे ll 1 ll<br />
अरुन अधर और चिबुक चारु बन्यो दुलरी मोहन माल गरे l<br />
अति सुगंध और चंदन खोर किये पहोंची मोतीन की लरे ll 2 ll<br />
कर मुरली कटि लाल काछनी किंकणी नूपुर शब्द करे l<br />
गुन भरे ‘कृष्णदास’ प्रभु राधा निरख नेन ईत ऊत न टरे ll 3 ll</p>
<p><strong>साज –</strong> आज श्रीजी में मोर के भाव की श्वेत जाली की कलात्मक पिछवाई धरायी जाती है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> आज प्रभु को श्वेत मलमल धोती एवं गाती का पटका धराया जाता हैं.</p>
<p><strong>श्रृंगार –</strong> आज श्रीजी को मध्य का (घुटने तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीमस्तक पर कूल्हे पर रूपहरा घेरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.श्रीकर्ण में मोती के मयूराकृति कुंडल धराये जाते हैं. श्रीकंठ में कली आदि सभी माला धरायी जाती हैं. तुलसी एवं श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर, कलात्मक मालाजी धरायी जाती हैं.</p>
<p>श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, चांदी के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.पट ऊष्णकाल का व गोटी हकीक की बड़ी आती है.</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/अधिक ज्येष्ठ-कृष्ण पक्ष-षष्ठी</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-06-jun-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 00:53:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज &#8211; अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष षष्ठी Saturday, 06 June 2026 चंदनी मलमल का आड़बंद एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर तुर्रा के श्रृंगार श्रीजी में प्रातः &#8211; छाक लिए श्याम बुलावत, चंदन की गोली शाम &#8211; बृज ही में करत विहार , कली के श्रृंगार प्रियाजी में प्रातः &#8211; लीजे &#8230;<p class="read-more"> <a class="" href="https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-06-jun-2026/"> <span class="screen-reader-text">SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/अधिक ज्येष्ठ-कृष्ण पक्ष-षष्ठी</span> Read More &#187;</a></p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज &#8211; अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष षष्ठी<br />
Saturday, 06 June 2026</h6>
<p style="text-align: center;"><strong>चंदनी मलमल का आड़बंद एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर तुर्रा के श्रृंगार</strong></p>
<p><strong>श्रीजी में</strong></p>
<ul>
<li>प्रातः &#8211; छाक लिए श्याम बुलावत, चंदन की गोली</li>
<li>शाम &#8211; बृज ही में करत विहार , कली के श्रृंगार</li>
</ul>
<p><strong>प्रियाजी में</strong></p>
<ul>
<li>प्रातः &#8211; लीजे लालन अपनी छाक</li>
<li>शाम &#8211; फल की हटड़ी</li>
</ul>
<p style="text-align: left;"><strong>आज प्रभु के श्रीअंगों (वक्षस्थल, दोनों श्रीहस्त और दोनों चरणकमल) में कुल पांच केशर बरास मिश्रित चंदन की गोलियां धरायी जाती है.</strong></p>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>साज – (राग : सारंग)</p>
<p>चंदन को वागो पहिरे चंदन की खोर कीये, चंदन के रुखतरे ठाड़े पिय प्यारी l<br />
चंदन की पाग शिर चंदन को फेंटा, बन्यो चंदन की चोली तन चंदन की सारी ll 1 ll<br />
चंदन की आरसी ले निरखत दोऊ जन हंस हंस गिर जात भरत अंकवारी l<br />
‘सूरदास’ मदन मोहन चंदभवनमें बैठे, गावत सारंग राग रंग रह्यो भारी ll 2 ll</p>
<p><strong>साज –</strong> आज श्रीजी में छाक लीला के भाव की पिछवाई धरायी जाती है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> आज श्रीजी को चंदनी मलमल का आड़बंद धराया जाता है.</p>
<p><strong>श्रृंगार –</strong> आज प्रभु को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है.मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीमस्तक पर गोल पाग के ऊपर सिरपैंच, तुर्रा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं. गुलाबी एवं श्वेत पुष्पों की कलात्मक थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.</p>
<p>श्रीहस्त में चार कमल की कमलछड़ी, झीने लहरियाँ के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.पट ऊष्णकाल का व गोटी छोटी हकीक की आती है.</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/अधिक ज्येष्ठ-कृष्ण पक्ष-पंचमी</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-05-jun-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 04:17:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज &#8211; अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष पंचमी Friday, 05 June 2026 गुलाबी मलमल के धोती पटका एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर मोर चंद्रिका के श्रृंगार श्रीजी में प्रातः &#8211; अद्भुत डोल बनी शाम &#8211; फाग सवारी का मनोरथ, कली के श्रृंगार प्रियाजी में प्रातः &#8211; अद्भुत डोल बनी का मनोरथ &#8230;<p class="read-more"> <a class="" href="https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-05-jun-2026/"> <span class="screen-reader-text">SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/अधिक ज्येष्ठ-कृष्ण पक्ष-पंचमी</span> Read More &#187;</a></p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज &#8211; अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष पंचमी<br />
Friday, 05 June 2026</h6>
<p style="text-align: center;"><strong>गुलाबी मलमल के धोती पटका एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर मोर चंद्रिका के श्रृंगार</strong></p>
<p><strong>श्रीजी में</strong></p>
<ul>
<li>प्रातः &#8211; अद्भुत डोल बनी</li>
<li>शाम &#8211; फाग सवारी का मनोरथ, कली के श्रृंगार</li>
</ul>
<p><strong>प्रियाजी में</strong></p>
<ul>
<li>प्रातः &#8211; अद्भुत डोल बनी का मनोरथ</li>
<li>शाम &#8211; मोर कुटीर का मनोरथ</li>
</ul>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : सारंग/बिलावल)</p>
<p>कमलमुख देखत कौन अघाय l<br />
सुनरी सखी लोचन अलि मेरे मुदित रहे अरुझाय ll 1 ll<br />
मुक्तामाल लाल ऊर ऊपर मानों फूली वनराय l<br />
गोवर्धनधरके अंग अंग पर ‘कृष्णदास’ बलजाय ll 2 ll</p>
<p><strong>साज &#8211;</strong> आज श्रीजी में हाथी के ऊपर सवारी, पृष्ठभूमि में महल, व्रजभक्तों के साथ होली खेल आदि के चित्रांकन वाली सुन्दर पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> आज प्रभु को गुलाबी रंग की मलमल धोती एवं राजशाही पटका धराया जाता हैं. दोनों वस्त्र रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होते हैं.</p>
<p><strong>श्रृंगार –</strong> प्रभु को आज मध्य का (घुटने तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है.मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.<br />
श्रीमस्तक पर गुलाबी रंग की छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच, लूम, मोर चंद्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.<br />
श्रीकर्ण में मोती के कर्णफूल धराये जाते हैं.श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं एवं हमेल की भांति दो मालाजी धरायी जाती हैं.<br />
श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, चांदी के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.पट गोटी ऊष्णकाल के राग-रंग के आते हैं.</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/अधिक ज्येष्ठ-कृष्ण पक्ष-चतुर्थी</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-04-jun-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 00:34:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज -अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष चतुर्थी Thursday, 04 June 2026 श्रीजी में प्रातः &#8211; आम की मंडली का मनोरथ, चंदन की चोली का मनोरथ शाम &#8211; मोर कुटीर का मनोरथ प्रियाजी में प्रातः- आम की मंडली का मनोरथ शाम &#8211; फाग की सवारी का मनोरथ राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग &#8230;<p class="read-more"> <a class="" href="https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-04-jun-2026/"> <span class="screen-reader-text">SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/अधिक ज्येष्ठ-कृष्ण पक्ष-चतुर्थी</span> Read More &#187;</a></p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज -अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष चतुर्थी<br />
Thursday, 04 June 2026</h6>
<p><strong>श्रीजी में</strong></p>
<ul>
<li>प्रातः &#8211; आम की मंडली का मनोरथ, चंदन की चोली का मनोरथ</li>
<li>शाम &#8211; मोर कुटीर का मनोरथ</li>
</ul>
<p><strong>प्रियाजी में</strong></p>
<ul>
<li>प्रातः- आम की मंडली का मनोरथ</li>
<li>शाम &#8211; फाग की सवारी का मनोरथ</li>
</ul>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : सारंग)</p>
<p>चंदन को वागो पहिरे चंदन की खोर कीये, चंदन के रुखतरे ठाड़े पिय प्यारी l<br />
चंदन की पाग शिर चंदन को फेंटा, बन्यो चंदन की चोली तन चंदन की सारी ll 1 ll<br />
चंदन की आरसी ले निरखत दोऊ जन हंस हंस गिर जात भरत अंकवारी l<br />
‘सूरदास’ मदन मोहन चंदभवनमें बैठे, गावत सारंग राग रंग रह्यो भारी ll 2 ll</p>
<p><strong>साज –</strong> आज श्रीजी में केसर एवं चंदन मिश्रित चंदनी रंग की मलमल की रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> आज श्रीजी को केसर मिश्रित चंदनिया रंग की मलमल की चोली एवं पिछोड़ा धराये जाते हैं.</p>
<p><strong>श्रृंगार –</strong> आज प्रभु को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है.मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीमस्तक पर चंदनिया रंग की गोल पाग के ऊपर सिरपैंच, तुर्रा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीकर्ण में मोती के कर्णफूल की एक जोड़ी धराये जाते हैं. श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.</p>
<p>श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, झीने लहरियाँ के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.पट एवं गोटी ऊष्णकाल के आते है.</p>
<p>राजभोग में आभरन बड़े करके चंदन की चोली धरायी जाती हैं.</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/अधिक ज्येष्ठ-कृष्ण पक्ष-तृतीया</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-03-jun-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 03 Jun 2026 01:00:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज &#8211; अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष तृतीया Wednesday, 03 June 2026 बसरा के मोतियों से सिद्ध परधनी एवं श्रीमस्तक पर मोती की गोल पाग पर मोती के दोहरा क़तरा का श्रृंगार  श्रीजी में प्रातः फूल महल बैठे नंद नंदन शाम को माई फूल को हिंदोरों बन्यो  प्रियाजी में प्रातः चितराम का &#8230;<p class="read-more"> <a class="" href="https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-03-jun-2026/"> <span class="screen-reader-text">SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/अधिक ज्येष्ठ-कृष्ण पक्ष-तृतीया</span> Read More &#187;</a></p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज &#8211; अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष तृतीया<br />
Wednesday, 03 June 2026</h6>
<p style="text-align: center;"><strong>बसरा के मोतियों से सिद्ध परधनी एवं श्रीमस्तक पर मोती की गोल पाग पर मोती के दोहरा क़तरा का श्रृंगार</strong></p>
<ul>
<li> <strong>श्रीजी में</strong><br />
प्रातः फूल महल बैठे नंद नंदन<br />
शाम को माई फूल को हिंदोरों बन्यो</li>
<li> <strong>प्रियाजी में</strong><br />
प्रातः चितराम का बंगला<br />
शाम को फुल हिंडोरा माई झूले</li>
</ul>
<p><strong>श्रृंगार दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : बिलावल)</p>
<p>देखे री हरि नंगमनंगा l<br />
जलसुत भूषन अंग विराजत बसन हीन छबि उठि तरंगा ll 1 ll<br />
अंग अंग प्रति अमित माधुरी निरखि लज्जित रति कोटि अनंगा l<br />
किलकत दधिसुत मुख लेपन करि ‘सूर’ हसत ब्रज युवतिन संगा ll 2 ll</p>
<p><strong>राजभोग दर्शन</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : सारंग)</p>
<p>शीतल उसीर गृह छिरक्यों गुलाबनीर<br />
परिमल पाटीर घनसार बरसत हैं ।<br />
सेज सजी पत्रणकी अतरसो तर कीनी<br />
अगरजा अनूप अंग मोद दरसत हैं ॥१॥<br />
बीजना बियाँर सीरी छूटत फुहारें नीके<br />
मानो घन नहैनि नहैनि फ़ूही बरसत हैं ।<br />
चतुर बिहारी प्यारी रस सों विलास करे<br />
जेठमास हेमंत ऋतु सरस दरसत हैं ॥२॥</p>
<p><strong>साज –</strong> आज श्रीजी में श्वेत जाली की कलात्मक पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> आज श्रीजी को बसरा के मोतियों से सिद्ध परधनी धरायी जाती है.</p>
<p><strong>शृंगार –</strong> आज प्रभु को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है.<br />
मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.<br />
श्रीमस्तक पर मोती की गोल पाग के ऊपर सिरपैंच, मोती का दोहरा क़तरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीकर्ण में मोती के एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं.</p>
<p>श्वेत पुष्पों की कलात्मक थागवाली एक सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.<br />
श्रीहस्त में चार कमल की कमलछड़ी, मोती के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.<br />
पट ऊष्णकाल का व गोटी छोटी हकीक की आती है.</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/अधिक ज्येष्ठ-कृष्ण पक्ष-द्वितीया</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-02-jun-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 00:55:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज -अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष द्वितीया Tuesday, 02 June 2026 गुलाबी मलमल का आड़बंद एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर गोल चंद्रिका के श्रृंगार श्रीजी में प्रातः कुसुम गुलाब महल में बैठे शाम को गुलाबी गणगौर का मनोरथ प्रियाजी में प्रातः केसरी बंगला/केसरी घटा का मनोरथ शाम को केसरी गणगौर का &#8230;<p class="read-more"> <a class="" href="https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-02-jun-2026/"> <span class="screen-reader-text">SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/अधिक ज्येष्ठ-कृष्ण पक्ष-द्वितीया</span> Read More &#187;</a></p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज -अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष द्वितीया<br />
Tuesday, 02 June 2026</h6>
<p style="text-align: center;"><strong>गुलाबी मलमल का आड़बंद एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर गोल चंद्रिका के श्रृंगार</strong></p>
<p><strong>श्रीजी में</strong></p>
<ul>
<li>प्रातः कुसुम गुलाब महल में बैठे</li>
<li>शाम को गुलाबी गणगौर का मनोरथ</li>
</ul>
<p><strong>प्रियाजी में</strong></p>
<ul>
<li>प्रातः केसरी बंगला/केसरी घटा का मनोरथ</li>
<li>शाम को केसरी गणगौर का मनोरथ</li>
</ul>
<p style="text-align: left;"><strong>संध्या आरती दर्शन के बाद शीतल जल से स्नान</strong></p>
<p><strong>राजभोग दर्शन</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : सारंग)</p>
<p>तनक प्याय दे पानी याहि मिस गए वाके घर l<br />
समझ बूझ के जल भर लाई पीवन लागे ओक ढीली करि<br />
तब ग्वालिन मंद मंद मुसिकानी ll 1 ll<br />
वेही जल वैसे ही गयो ओर जल भर लाई<br />
तब ग्वालिन बोली मधुर सी बानी l<br />
‘चतुरबिहारी’ प्यारे प्यासे हो तो पीजिये<br />
नातर सिधारो रावरे जु प्यास मैं जानी ll 2 ll</p>
<p><strong>साज –</strong> आज श्रीजी में गणगौर के भाव के चित्रांकन की पिछवाई धरायी है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर श्वेत बिछावट की है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> आज श्रीजी को गुलाबी मलमल का आड़बंद धराया जाता है.</p>
<p><strong>श्रृंगार –</strong> आज प्रभु को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीमस्तक पर गुलाबी रंग की गोल पाग के ऊपर सिरपैंच, गोल चंद्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.श्रीकर्ण में एक जोड़ी मोती के कर्णफूल धराये जाते हैं.</p>
<p>श्वेत पुष्पों एवं तुलसी की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं वहीँ दो मालाजी हमेल की भांति भी धरायी जाती है.</p>
<p>श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, गुलाबी मीना के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं. पट ऊष्णकाल का गोटी हक़ीक की छोटी आती है.</p>
<p>संध्या आरती दर्शन के बाद प्रभु को बरास वाले शीतल जल से स्नान कराया जाता है.शयन की सखड़ी में शीतल सामग्रियां आरोगायी जाएगी.</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/अधिक ज्येष्ठ-कृष्ण पक्ष-प्रतिपदा</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-01-jun-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 01 Jun 2026 00:21:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज -अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष प्रतिपदा Monday, 01 June 2026 श्वेत धोती, गाती का पटका एवं श्रीमस्तक पर मोती का किरीट के श्रृंगार आज के मनोरथ  राजभोग में शीशमहल का मनोरथ  शाम को श्याम सजनी शरद रजनी (शरद का मनोरथ) राजभोग दर्शन – कीर्तन – (राग : सारंग) आज ठाड़े लाल &#8230;<p class="read-more"> <a class="" href="https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-01-jun-2026/"> <span class="screen-reader-text">SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/अधिक ज्येष्ठ-कृष्ण पक्ष-प्रतिपदा</span> Read More &#187;</a></p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज -अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष प्रतिपदा<br />
Monday, 01 June 2026</h6>
<p style="text-align: center;"><strong>श्वेत धोती, गाती का पटका एवं श्रीमस्तक पर मोती का किरीट के श्रृंगार</strong></p>
<p><strong>आज के मनोरथ</strong></p>
<ul>
<li> राजभोग में शीशमहल का मनोरथ</li>
<li> शाम को श्याम सजनी शरद रजनी (शरद का मनोरथ)</li>
</ul>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : सारंग)</p>
<p>आज ठाड़े लाल मुकुट धरे l<br />
वदन लसत मकराकृत कुंडल रतिपति मन जु हरे ll 1 ll<br />
अरुन अधर और चिबुक चारु बन्यो दुलरी मोहन माल गरे l<br />
अति सुगंध और चंदन खोर किये पहोंची मोतीन की लरे ll 2 ll<br />
कर मुरली कटि लाल काछनी किंकणी नूपुर शब्द करे l<br />
गुन भरे ‘कृष्णदास’ प्रभु राधा निरख नेन ईत ऊत न टरे ll 3 ll</p>
<p><strong>साज &#8211;</strong> “द्वे द्वे गोपी बीच बीच माधौ” अर्थात दो गोपियों के बीच माधव श्री कृष्ण खड़े शरद-रास कर रहें हैं ऐसी महारासलीला के अद्भुत चित्रांकन से सुसज्जित पिछवाई आज श्रीजी में धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है.</p>
<p><strong>वस्त्र –</strong> आज प्रभु को श्वेत मलमल धोती एवं गाती का पटका धराया जाता हैं. दोनों वस्त्र रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होते हैं.</p>
<p><strong>श्रृंगार –</strong> आज श्रीजी को मध्य का (घुटने तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर मोती का किरीट एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में मोती के मयूराकृति कुंडल धराये जाते हैं.<br />
श्रीकंठ में कली आदि सभी माला धरायी जाती हैं. तुलसी एवं श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर, कलात्मक मालाजी धरायी जाती हैं. श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, चांदी के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.<br />
पट ऊष्णकाल का व गोटी हकीक की बड़ी आती है.</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/अधिक ज्येष्ठ-शुक्ल पक्ष-पूर्णिमा</title>
		<link>https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-31-may-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[shridp]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 31 May 2026 03:29:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[जय श्री कृष्ण 🙏 व्रज &#8211; अधिक ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष पूर्णिमा Sunday, 31 May 2026 राजभोग में छप्पनभोग मनोरथ (बड़ा मनोरथ) शाम को शोभित नव कुंजन की छवि भारी मणिकोठा, डोल-तिबारी, रतनचौक आदि में छप्पनभोग के भोग साजे जाते हैं अतः श्रीजी में मंगला के पश्चात सीधे राजभोग अथवा छप्पनभोग (भोग सरे पश्चात) के दर्शन &#8230;<p class="read-more"> <a class="" href="https://shridp.in/shreeji-darshan-shringar-31-may-2026/"> <span class="screen-reader-text">SHREEJI DARSHAN &#038; SHRINGAR/अधिक ज्येष्ठ-शुक्ल पक्ष-पूर्णिमा</span> Read More &#187;</a></p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 style="text-align: center;">जय श्री कृष्ण 🙏</h4>
<h6>व्रज &#8211; अधिक ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष पूर्णिमा<br />
Sunday, 31 May 2026</h6>
<p style="text-align: center;">
<strong>राजभोग में छप्पनभोग मनोरथ (बड़ा मनोरथ</strong>)</p>
<p><strong>शाम को शोभित नव कुंजन की छवि भारी</strong></p>
<p>मणिकोठा, डोल-तिबारी, रतनचौक आदि में छप्पनभोग के भोग साजे जाते हैं अतः श्रीजी में मंगला के पश्चात सीधे राजभोग अथवा छप्पनभोग (भोग सरे पश्चात) के दर्शन ही खुलते हैं.</p>
<p>श्रीजी को गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में विशेष रूप से दूधघर में सिद्ध की गयी केसर युक्त बासोंदी की हांडी व शाकघर में सिद्ध चार विविध प्रकार के फलों के मीठा अरोगाये जाते हैं.</p>
<p>राजभोग की अनसखड़ी में दाख (किशमिश) का रायता एवं सखड़ी में मीठी सेव, केसरयुक्त पेठा व पाँच-भात (मेवा-भात, दही-भात, राई-भात, श्रीखंड-भात, वड़ी-भात) अरोगाये जाते हैं.</p>
<p>छप्पनभोग दर्शन में प्रभु सम्मुख 25 बीड़ा सिकोरी (सोने का जालीदार पात्र) में रखे जाते है.</p>
<p><strong>राजभोग दर्शन –</strong></p>
<p>कीर्तन – (राग : सारंग)</p>
<p>मदन गोपाल गोवर्धन पूजत l<br />
बाजत ताल मृदंग शंखध्वनि मधुर मधुर मुरली कल कूजत ll 1 ll<br />
कुंकुम तिलक लिलाट दिये नव वसन साज आई गोपीजन l<br />
आसपास सुन्दरी कनक तन मध्य गोपाल बने मरकत मन ll 2 ll<br />
आनंद मगन ग्वाल सब डोलत ही ही घुमरि धौरी बुलावत l<br />
राते पीरे बने टिपारे मोहन अपनी धेनु खिलावत ll 3 ll<br />
छिरकत हरद दूध दधि अक्षत देत असीस सकल लागत पग l<br />
‘कुंभनदास’ प्रभु गोवर्धनधर गोकुल करो पिय राज अखिल युग ll 4 ll</p>
<p><strong>साज –</strong> आज श्रीजी में चितराम की गायों के चित्रांकन वाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है.</p>
<p><strong>वस्त्र &#8211;</strong> श्रीजी को आज शरबती मलमल का छापा का पिछोड़ा धराया है.</p>
<p><strong>श्रृंगार –</strong> आज प्रभु को वनमाला का (चरणारविन्द तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.</p>
<p>श्रीमस्तक पर केसरी रंग की टिपारे की टोपी के ऊपर गुलाबी रंग के रूपहरी किनारी वाले गौकर्ण पर सुनहरी घेरा धराया है.</p>
<p>श्रीकर्ण में मोती के मकराकृति कुंडल धराये जाते हैं.बायीं ओर मोती की चोटी धरायी जाती है.कली, तुलसी एवं श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर कलात्मक मालाजी धरायी जाती हैं.</p>
<p>श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, सुवा के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.पट ऊष्णकाल का एवं गोटी बाघ बकरी की आती है.</p>
]]></content:encoded>
					
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