जय श्री कृष्ण 🙏
व्रज – भाद्रपद शुक्ल पक्ष त्रयोदशी
Thursday, 24 September 2026
स्याम पीली एकदानी चूंदड़ी का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर गोल चंद्रिका के श्रृंगार
राजभोग दर्शन –
कीर्तन – (राग : सारंग)
ग्वालिनी मीठी तेरी छाछि l
कहा दूध में मेलि जमायो साँची कहै किन वांछि ll 1 ll
और भांति चितैवो तेरौ भ्रौह चलत है आछि l
ऐसो टक झक कबहु न दैख्यो तू जो रही कछि काछि ll 2 ll
रहसि कान्ह कर कुचगति परसत तु जो परति है पाछि l
‘परमानंद’ गोपाल आलिंगी गोप वधू हरिनाछि ll 3 ll
साज – श्रीजी में आज स्याम पीली एकदानी चूंदड़ी की रुपहली ज़री के हांशिया (किनारी) वाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफेद रंग की बिछावट की जाती है.
वस्त्र – श्रीजी में आज स्याम पीली एकदानी चूंदड़ी का पिछोड़ा धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र गुलाबी रंग के आते हैं.
श्रृंगार – श्रीजी को आज छेड़ान का हल्का श्रृंगार धराया जाता है. गुलाबी मीना के सर्वआभरण धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर लाल एकदानी चूंदड़ी की गोल पाग पर गोल चन्द्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है.
श्रीकर्ण में एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं. पुष्पों की सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.
श्रीहस्त में कमलछड़ी, लहरिया के वेणुजी एवं वैत्रजी धराये जाते हैं.पट श्याम व गोटी चांदी की आती है.

