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SHREEJI DARSHAN & SHRINGAR/फाल्गुन-कृष्ण पक्ष-अमावस

जय श्री कृष्ण 🙏

व्रज – फाल्गुन कृष्ण पक्ष अमावस
Tuesday, 17 February 2026

अरि हों श्याम रंग रंगी ।
रिझवे काई रही सुरत पर सुरत मांझ पगी ।।१।।
देख सखी अेक मेरे नयनमें बैठ रह्यो करी भौन ।
घेनु चरावन जात वृंदावन सौंधो कनैया कोन ।।२।।
कौन सुने कासौ कहे सखी कौन करे बकवाद ।
तापे गदाधर कहा कही आवे गूंगो गुड़को स्वाद ।।३।।

चोवा से रंगे स्याम घेरदार वागा, श्रीमस्तक पर गोल पाग पर मोर चंद्रिका के श्रृंगार

विशेष – आज फाल्गुन की अमावस्या के दिन श्रीजी को नियम के चोवा से रंगे दोहरी सुनहरी किनारी के स्याम घेरदार वस्त्र एवं श्रीमस्तक पर गोल-पाग के ऊपर सुनहरी चमक का क़तरा धराया जाता है.

श्याम वस्त्रों में श्यामसुंदर प्रभु की अद्भुत छटा का शब्दों में वर्णन करना किसी के लिए संभव नहीं है.

राजभोग में फेंट में भर कर गुलाल खिलायी जाती हैं. चोवा के वस्त्र को गुलाल, अबीर, चंदन, चोवा सबसे खिलाया जाता हैं.

राजभोग दर्शन-

कीर्तन – (राग : सारंग)

मोहन खेलत होरी ll ध्रु ll
बंसीबट जमुनातट कुंजन तर ठाड़े बनवारी l उतही सखिन को मंडल जोर श्रीवृषभान दुलारी ll
होड़ा होड़ी करत परस्पर गावत आनंद गारी l अबीर गुलाल फेंट भर भामिनी करकंचन पिचकारी ll 1 ll
बाजत बीन बांसुरी किन्नरी महुवर अरु मुख चंगा l आवाज अमृत कुंडली अघवट तातें सरस उपंगा ll
ताल मृदंग झांझ डफ बाजत सूरके उठत तरंगा l गावत नाचत करत कुतूहल छिरकत केसर अंगा ll 2 ll
तबहि श्याम सब सखा बुलाये सबहिन मतो सुनाये l भैया तुम चोक्कस रहीयो मति कोऊ उपाय गहायो ll
जो काहू को पकर पाये है करि है मन को भायो l तातें सावधान व्है रहियो में तुमको समझायो ll 3 ll
तबही किसोरी राधा गोरी मनमें मतोजुकीनो l एक सखी ता बोल आपनी भेख सुबल को दीनो ll
ताके मिलन चले उठ मोहन सखा न कोई चीन्हो l नैंसिक बात लगाय लालको पाछे ते गहिलीनो ll 4 ll….अपूर्ण

साज – आज श्रीजी में सफ़ेद मलमल की सादी पिछवाई धरायी जाती है जिसके ऊपर गुलाल, अबीर व चन्दन से खेल किया जाता है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज प्रभु को चोवा से रंगा श्याम रंग का सूथन, चोली एवं घेरदार वागा धराये जाते हैं. उर्ध्वभुजा की ओर चोवा से रंगा श्याम रंग का ही कटि-पटका भी धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र लाल रंग के धराये जाते हैं. सभी वस्त्र दोहरे सुनहरी किनारी से सुसज्जित होते हैं. सभी वस्त्रों पर अबीर, गुलाल आदि को छांटकर कलात्मक रूप से खेल किया जाता है. प्रभु के कपोल पर भी गुलाल, अबीर लगाये जाते हैं.

श्रृंगार – आज श्रीजी को छोटा (कमर तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. सफ़ेद मीना के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर श्याम रंग की गोल-पाग के ऊपर सिरपैंच मोर चंद्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.

श्रीकर्ण में कर्णफूल धराये जाते हैं.सफ़ेद पुष्पों की कलात्मक थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं
श्रीहस्त में पुष्पछड़ी, चाँदी के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.पट चीड़ का व गोटी फाल्गुन की आती है.

संध्या-आरती दर्शन के उपरांत श्रीकंठ के श्रृंगार बड़े कर छेड़ान के (छोटे) श्रृंगार धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर लूम-तुर्रा सुनहरी धराये जाते हैं.

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