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SHREEJI DARSHAN & SHRINGAR/पौष-शुक्ल पक्ष-प्रतिपदा

जय श्री कृष्ण 🙏

व्रज – पौष शुक्ल पक्ष प्रतिपदा
Saturday, 20 December 2025

श्याम रंग के साटन के बिना किनारी के घेरदार वागा ,कटि (कमर) पर एक विशेष हीरे का चपड़ास (घुंडी-नाका) एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग और श्याम दोहरा क़तरा के श्रृंगार

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : आसावरी)

माई मेरो श्याम लग्यो संग डोले l
जहीं जहीं जाऊं तहीं सुनी सजनी बिनाहि बुलाये बोले ll 1 ll
कहा करो ये लोभी नैना बस कीने बिन मोले l
‘हित हरिवंश’ जानि हितकी गति हसि घुंघटपट खोले ll 2 ll

साज – आज श्रीजी में स्याम रंग की सुनहरी ज़री की किनारी के हांशिया से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को स्याम रंग के साटन का सुनहरी ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित सूथन, घेरदार वागा, चोली धराये जाते है. स्याम रंग के मोजाजी धराये जाते हैं. ठाड़े वस्त्र रूपहरी ज़री रंग के धराये जाते हैं.

श्रृंगार – आज प्रभु को छोटा (कमर तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. हीरा के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर स्याम रंग की गोल पाग के ऊपर सिरपैंच, स्याम रंग का दोहरा क़तरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.

श्रीकर्ण में एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं.आज प्रभु की कटि (कमर) पर एक विशेष हीरे का चपड़ास (घुंडी-नाका) धराए जाने से त्रवल नहीं धराया जाता हैं.

आज प्रभु को श्रीकंठ में हीरा की कंठी धराई जाती हैं.श्वेत एवं गुलाबी पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती है.

श्रीहस्तं में हरे मीना के एक वेणुजी एवं वेत्रजी धराये जाते हैं.पट स्याम एवं गोटी चाँदी की आती हैं.

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