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SHREEJI DARSHAN & SHRINGAR/कार्तिक-शुक्ल पक्ष-चतुर्दशी

जय श्री कृष्ण 🙏

व्रज – कार्तिक शुक्ल पक्ष चतुर्दशी
Tuesday, 04 November 2025

नित्यलीलास्थ तिलकायत श्री गोविन्दजी का प्राकट्योत्सव

विशेष – आज नित्यलीलास्थ तिलकायत श्री गोविन्दजी (१८७६) का उत्सव है.

श्रीजी का सेवाक्रम – उत्सव होने के कारण श्रीजी मंदिर के सभी मुख्य द्वारों की देहरी (देहलीज) हल्दी से लीपी जाती हैं एवं आशापाल की सूत की डोरी की वंदनमाल बाँधी जाती हैं.सभी समय झारीजी में यमुनाजल भरा जाता है. दो समय की आरती थाली में की जाती है.

श्रीजी को नियम के पीले खीनखाब के चाकदार वागा और श्रीमस्तक पर लाल माणक की कुल्हे के ऊपर सुनहरी चमक का घेरा धराया जाता है.

माणक की कुल्हे के ऊपर सुनहरी चमक का घेरा वर्षभर में केवल आज के दिन धराया जाता है.

श्रीजी को गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में केशरयुक्त जलेबी के टूक और विशेष रूप से दूधघर में सिद्ध की गयी केसर युक्त बासोंदी की हांडी का अरोगायी जाती है. राजभोग में अनसखड़ी में दाख (किशमिश) का रायता व सखड़ी में बूंदी प्रकार अरोगाये जाते हैं.

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : सारंग)

श्रीवल्लभ नंदन रूप अनूप स्वरुप कह्यो न जाई l
प्रकट परमानंद गोकुल बसत है सब जगत के सुखदाई ll 1 ll
भक्ति मुक्ति देत सबनको निजजनको कृपा प्रेम बर्षन अधिकाई l
सुखद रसना एक कहां लो वरनो ‘गोविंद’ बलबल जाई ll 2 ll

साज – आज श्रीजी में पीले रंग की खीनख़ाब की लाल रंग के हांशिया से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर आज से पुनः सफेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – श्रीजी को आज पीले खीनखाब के रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित सूथन, चोली एवं चाकदार वागा धराये जाते हैं. मोजाजी लाल खीनखाब के धराये जाते हैं. ठाड़े वस्त्र हरे रंग के धराये जाते हैं.

श्रृंगार – प्रभु को आज वनमाला का (चरणारविन्द तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. माणक एवं सोने के सर्व आभरण धराये जाते हैं.

श्रीमस्तक पर लाल रंग की माणक की कुल्हे के ऊपर सिरपैंच, माणक का दुलड़ा, सुनहरी चमक का घेरा तथा बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. बायीं ओर मीना की चोटी धरायी जाती है.

श्रीकर्ण में मकराकृति कुंडल धराये जाते हैं.कली, कस्तूरी आदि सभी माला धरायी जाती है. श्वेत एवं पीले पुष्पों की रंग-बिरंगी थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती है.

श्रीहस्त में लाल मीना के वेणुजी एवं दो वेत्रजी (लाल मीना व स्वर्ण का) धराये जाते हैं.पट लाल, गोटी श्याम मीना की व आरसी शृंगार में पिले खंड की एवं राजभोग में सोने की डांडी की आती है.

संध्या-आरती दर्शन उपरांत श्रीमस्तक व श्रीकंठ के श्रृंगार बड़े कर दिए जाते हैं और छेड़ान के (छोटे) श्रृंगार धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर केसरी गोलपाग सिरपेच टीका एवं एक पंख की (सादी) मोर चन्द्रिका व मानक का झोरा धराये जाते हैं. आज लूम तुर्रा नहीं धराये जाते.

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